भारत और तुर्की के बीच नागरिक उड्डयन संबंधों में हाल ही में बदलाव देखा जा रहा है। करीब तीन महीने पहले सरकार तुर्की के साथ हवाई कनेक्टिविटी समाप्त करने की तैयारी कर रही थी, लेकिन अब इंडिगो एयरलाइंस को तुर्की एयरलाइंस के साथ अपने बोइंग 777 विमानों की लीज डील बढ़ाने की अनुमति दे दी गई है।
इंडिगो को DGCA से मिली मंजूरी: इस संदर्भ में भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से दो बोइंग 777 विमानों के लिए तुर्की एयरलाइंस के साथ लीजिंग समझौते को छह महीने तक बढ़ाने की मंजूरी मिल गई है। यह निर्णय उस पहले के निर्देश से अलग है, जिसमें 31 अगस्त तक इस डील को समाप्त करने को कहा गया था।

स्पाइसजेट को मिली तुर्की से विमान लीज की मंजूरी:
बजट एयरलाइन स्पाइसजेट को DGCA ने मंजूरी दी है कि वह तुर्की की कोरेंडन एयरलाइंस की सहायक कंपनी से पांच बोइंग 737 विमान लीज पर ले सके। यह सहायक कंपनी माल्टा में स्थित है और अलग लाइसेंस के तहत काम करती है, लेकिन यह पूरी तरह तुर्की की कोरेंडन एयरलाइंस के स्वामित्व में है।
मंजूरी के पीछे सरकार का तर्क:
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इन लीज समझौतों के तहत विमान देने वाली कंपनियां भारतीय एयरलाइनों को क्रू और रखरखाव की सुविधा भी प्रदान करेंगी। अधिकारियों ने बताया कि ये मंजूरियां विशेष रूप से भारतीय एयरलाइनों के हित और संचालन में आसानी को ध्यान में रखकर दी गई हैं, क्योंकि पाकिस्तानी एयरस्पेस बंद रहने के कारण पहले से ही इंडियन एयरलाइंस को संचालन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
DGCA ने कहा था आगे और एक्सटेंशन नहीं मिलेगी:
30 मई को इंडिगो ने DGCA से टर्किश एयरलाइंस के साथ अपने लीज समझौते को छह महीने और बढ़ाने की अपील की थी। DGCA ने इस एक्सटेंशन को मंजूरी देते हुए स्पष्ट किया कि यह केवल इस शर्त पर लागू होगा कि इंडिगो इस अवधि के भीतर टर्किश एयरलाइंस के साथ डैम्प लीज को समाप्त कर देगी और इसके लिए आगे कोई और विस्तार की मांग नहीं करेगी।
पहलगाम हमले में पाकिस्तान को तुर्की कामिला था समर्थन:
22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा। इस समय तुर्की ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया और भारत के खिलाफ इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान को ड्रोन, हथियार और उन्हें संचालित करने वाले प्रशिक्षित कर्मी उपलब्ध कराए। राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन के शासनकाल में तुर्की में इस्लामी प्रभाव बढ़ा है और एर्दोआन शुरू से ही पाकिस्तान के समर्थन में रहे हैं। कश्मीर मुद्दे पर भी उन्होंने पाकिस्तान का पक्ष लिया है।
भारत में नाराजगी और बहिष्कार की मांग: भारत में तुर्की की इस भूमिका को लेकर नाराजगी का माहौल है। देशभर में “बॉयकॉट तुर्की” की मांग उठ रही है। ऐसे में भारतीय एयरपोर्ट्स का प्रबंधन तुर्की की कंपनी द्वारा किया जाना कई लोगों के लिए चिंताजनक साबित हो रहा था।
भारत–तुर्की एयरलाइंस डील पर आलोचना:
हमले के बाद तुर्की द्वारा पाकिस्तान का समर्थन करने के बाद इस एग्रीमेंट की आलोचना भारत में उठी। इंडिगो की प्रतिद्वंद्वी एयर इंडिया ने भी इस डील का विरोध किया। एयर इंडिया ने बिजनेस इंपैक्ट और सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए भारत सरकार से इस डील को रद्द करने की पैरवी की थी।
30 मई को सरकार इस डील को समाप्त करने की तैयारी कर रही थी। इसका मुख्य कारण सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परिप्रेक्ष्य से संभावित जोखिम और भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को ध्यान में रखना था।
भारत–तुर्की व्यापार:
पांच साल में भारत और तुर्की के बीच व्यापार में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है। अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के बीच भारत ने तुर्की को 5.2 अरब डॉलर (करीब ₹44,500 करोड़) का सामान बेचा, जबकि 2023-24 में यह आंकड़ा 6.65 अरब डॉलर (56,873 करोड़ रुपए) था।
भारत का ट्रेड सरप्लस: इस अवधि में भारत ने तुर्की से 2.84 अरब डॉलर (करीब 24,320 करोड़ रुपए) का सामान खरीदा। दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार में भारत हमेशा ट्रेड सरप्लस में रहा है। यानी, भारत ने तुर्की से जितना सामान खरीदा, उसके मुकाबले ज्यादा निर्यात किया।
मुख्य निर्यात और आयात: भारत मुख्य रूप से मिनरल फ्यूल्स, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और कपास का निर्यात करता है। वहीं, तुर्की से आयात में सोना, संगमरमर, सेब, सब्जियां, सीमेंट और रसायन शामिल हैं। तुर्की भारत को सेब का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देशों में से एक है।
निष्कर्ष:
इंडिगो को DGCA से तुर्किश एयरलाइंस के विमानों की लीज के लिए छह महीने का विस्तार मिल गया है। इस नए निर्णय से इंडिगो फरवरी 2026 तक इन दोनों बोइंग 777 विमानों का संचालन जारी रख सकेगी। इससे खासकर इस्तांबुल रूट पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सुचारू संचालन और यात्रियों को निरंतर सेवाएं मिलेंगी।