लॉस एंजेलिस की एक अदालत में इस हफ्ते ऐसा मुकदमा चला जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। मामला सोशल मीडिया कंपनियों पर है और सवाल सीधा है-क्या इंस्टाग्राम, यूट्यूब, टिकटॉक और स्नैप जैसे प्लेटफॉर्म बच्चों को लत लगाने के इरादे से बनाए गए थे? इस केस में सबसे ज्यादा चर्चा मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग की गवाही को लेकर हो रही है, जिन्हें अदालत में कई घंटे तक कड़े सवालों का सामना करना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
यह मुकदमा 1600 से ज्यादा वादियों के एक समूह का हिस्सा है। इनमें परिवार और कुछ स्कूल जिले शामिल हैं। इनका आरोप है कि सोशल मीडिया कंपनियों ने जानबूझकर ऐसे फीचर तैयार किए जो बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक स्क्रीन से जोड़े रखें और इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा।
इस बड़े समूह के मामलों में से यह पहला केस है जिसकी सुनवाई जूरी के सामने हो रही है। इसमें 20 साल की एक युवती, जिसे अदालत में “कैली” के नाम से पहचाना जा रहा है, ने मेटा और यूट्यूब पर आरोप लगाया है कि उसने बहुत कम उम्र में सोशल मीडिया का इस्तेमाल शुरू किया और इससे उसकी मानसिक हालत खराब हुई।
टिकटॉक और स्नैप पहले ही इस मामले की पहली वादी से समझौता कर चुके हैं। लेकिन मेटा और यूट्यूब ने आरोपों को खारिज किया है और अदालत में अपना पक्ष रख रहे हैं।
जकरबर्ग से सीधे सवाल
मार्क जकरबर्ग ने जूरी के सामने कई घंटों तक गवाही दी। उनसे पूछा गया कि क्या मेटा की मंशा लोगों को अपने प्लेटफॉर्म की लत लगाना थी। इस पर उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य एक ऐसा समुदाय बनाना है जो लंबे समय तक टिके। उन्होंने कहा कि अगर कोई चीज लोगों के लिए अच्छी नहीं है तो वे कुछ समय तो ज्यादा इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन अगर वे खुश नहीं होंगे तो लंबे समय तक उस प्लेटफॉर्म पर नहीं रहेंगे।
जब उनसे पूछा गया कि क्या लत वाली चीजों का इस्तेमाल लोग ज्यादा करते हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह बात यहां लागू होती है।
वकीलों ने इंस्टाग्राम की एक आंतरिक प्रस्तुति का भी जिक्र किया जिसमें किशोरों को प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित करने की रणनीतियों पर चर्चा थी। इस पर जकरबर्ग ने कहा कि कंपनी का मकसद उपयोगी और मूल्यवान सेवा देना है, न कि सिर्फ समय बढ़ाना।

समय बढ़ाने के लक्ष्य पर विवाद
अदालत में एक ईमेल भी दिखाया गया जो दिसंबर 2015 का था। इसमें तीन साल की योजना में इंस्टाग्राम पर समय 10% बढ़ाने का लक्ष्य लिखा था। इस पर जकरबर्ग ने कहा कि शुरुआती दौर में टीमों को ऐसे लक्ष्य दिए जाते थे, लेकिन बाद में कंपनी ने यह तरीका बदल दिया। उनके अनुसार अब फोकस “उपयोगिता और मूल्य” पर है, न कि सिर्फ समय बढ़ाने पर।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई चीज लोगों के लिए उपयोगी होती है तो वे स्वाभाविक रूप से उसका ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।
13 साल से कम उम्र के यूजर
मामले का एक बड़ा मुद्दा यह भी है कि क्या इंस्टाग्राम 13 साल से कम उम्र के बच्चों को रोकने में नाकाम रहा। नियम के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर अकाउंट बनाने के लिए उम्र कम से कम 13 साल होनी चाहिए।
लेकिन अदालत में 2015 का एक आंतरिक दस्तावेज पेश किया गया, जिसमें अनुमान लगाया गया था कि अमेरिका में 40 लाख से ज्यादा 13 साल से कम उम्र के बच्चे इंस्टाग्राम का उपयोग कर रहे थे। इसमें यह भी कहा गया था कि यह संख्या अमेरिका के 10-12 साल के बच्चों का लगभग 30% है।
वकील ने बताया कि कैली ने 9 साल की उम्र में इंस्टाग्राम इस्तेमाल करना शुरू किया था। उस समय इंस्टाग्राम साइन-अप के दौरान जन्मतिथि नहीं मांगता था, सिर्फ यह पुष्टि कराता था कि यूजर 13 साल से ऊपर है। दिसंबर 2019 में जाकर इंस्टाग्राम ने नए यूजर्स से जन्मतिथि मांगना शुरू किया। अगस्त 2021 में पुराने यूजर्स से भी जन्मतिथि मांगी जाने लगी।
जकरबर्ग ने माना कि कुछ बच्चे अपनी उम्र गलत बताते हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि जब भी कंपनी को कम उम्र के अकाउंट का पता चलता है, तो उन्हें हटा दिया जाता है।
कैली के आरोप
कैली का दावा है कि वह कभी-कभी दिन में कई घंटे इंस्टाग्राम पर रहती थी। एक दिन तो वह 16 घंटे से ज्यादा समय तक ऑनलाइन रही। उसकी मां ने कई बार रोकने की कोशिश की, लेकिन वह प्लेटफॉर्म से अलग नहीं हो पाई।
उसका कहना है कि इंस्टाग्राम के फीचर्स ने उसे चिंता, शरीर को लेकर असंतोष और आत्महत्या जैसे विचारों की ओर धकेला। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे प्लेटफॉर्म पर बुलीइंग और जबरन निजी तस्वीरें मांगने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा।
मेटा के प्रवक्ता ने इन आरोपों से असहमति जताई है। कंपनी का कहना है कि वह लंबे समय से युवाओं की सुरक्षा के लिए काम कर रही है और सबूत दिखाएंगे कि कैली को सोशल मीडिया से पहले भी कई गंभीर व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना था।
माता-पिता का गुस्सा
अदालत के बाहर कई माता-पिता जमा हुए। उनका कहना है कि उनके बच्चों को सोशल मीडिया से नुकसान पहुंचा या उनकी मौत हो गई। जूलियाना अर्नोल्ड नाम की एक मां ने कहा कि उनकी 17 साल की बेटी कोको की मौत के पीछे इंस्टाग्राम की भूमिका थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने मुनाफे के लिए किशोरों का इस्तेमाल किया। उनका कहना था कि यह सब जानबूझकर किया गया, गलती से नहीं।
ब्यूटी फिल्टर पर सवाल
सुनवाई के दौरान इंस्टाग्राम के “ब्यूटी फिल्टर” पर भी चर्चा हुई। ये ऐसे फिल्टर हैं जो चेहरे को बदलकर मेकअप या सर्जरी जैसा लुक देते हैं। वकील ने कहा कि कंपनी ने 18 विशेषज्ञों से सलाह ली थी और उन्हें पता था कि ऐसे फिल्टर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
जकरबर्ग ने कहा कि कंपनी ने फैसला किया कि यूजर अपने फिल्टर बना सकते हैं, लेकिन कंपनी खुद ऐसे फिल्टर नहीं बनाएगी और उन्हें प्रमोट भी नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी को ध्यान में रखते हुए यह संतुलन बनाया गया।
क्या कंपनी ने सुरक्षा को नजरअंदाज किया?
मेटा का कहना है कि उसने युवाओं की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें पेरेंटल कंट्रोल टूल, और “टीन अकाउंट” जैसे फीचर शामिल हैं, जिनमें 18 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए डिफॉल्ट प्राइवेसी और कंटेंट सीमाएं होती हैं।
लेकिन वादी पक्ष का कहना है कि ये कदम काफी नहीं हैं। उनका सवाल है कि क्या कंपनी ने तेजी से बढ़ने और मुनाफा कमाने की दौड़ में बच्चों की सुरक्षा को पीछे छोड़ दिया।
जकरबर्ग की आखिरी बात
सुनवाई के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सोशल मीडिया के पीड़ितों के लिए धन देने का वादा करेंगे, तो उन्होंने सवाल के तरीके से असहमति जताई। उन्होंने पहले कहा था कि वह अपनी संपत्ति का 99% दान करने का संकल्प ले चुके हैं।
पांच घंटे से ज्यादा की गवाही के बाद जकरबर्ग अदालत के पिछले दरवाजे से बाहर निकले। लेकिन बहस यहीं खत्म नहीं हुई है।
आगे क्या होगा?
यह मुकदमा सिर्फ एक युवती का मामला नहीं है। इसका फैसला सैकड़ों दूसरे मामलों को प्रभावित कर सकता है। अगर जूरी ने कंपनियों के खिलाफ फैसला दिया, तो उन्हें अरबों डॉलर का हर्जाना देना पड़ सकता है और अपने प्लेटफॉर्म में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जूरी यह देखेगी कि क्या इंस्टाग्राम कैली की मानसिक परेशानियों का बड़ा कारण था। साथ ही यह भी कि क्या कंपनी ने अपनी तरफ से पर्याप्त सावधानी बरती।

