ईरान के बड़े नेता अली लारिजानी की एयरस्ट्राइक में मौत, क्या इससे मिडिल ईस्ट की जंग और भड़क जाएगी?

ईरान के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक Ali Larijani की एक एयरस्ट्राइक में मौत हो गई। यह हमला तेहरान के पास उनके परिवार के घर पर हुआ, जहां वे मौजूद थे। ईरानी अधिकारियों ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की।

 

यह हमला तेहरान के उत्तर-पूर्व में स्थित परदिस इलाके में तड़के हुआ। इस हमले में लारिजानी के साथ उनके बेटे मोर्तेजा लारिजानी, उनके सुरक्षा उप प्रमुख अलीरेज़ा बयात और कई सुरक्षाकर्मी भी मारे गए।

 

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने एक बयान जारी कर कहा कि लारिजानी ने देश की सेवा में अपना जीवन बिताया और उन्हें “शहीद” बताया।

 

इजराइल ने लिया जिम्मा

इस हमले के बाद इजराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने दावा किया कि यह कार्रवाई इजराइल की ओर से की गई है। उन्होंने कहा कि लारिजानी समेत कई बड़े नेताओं को निशाना बनाया गया।

 

इजराइल ने इसी हमले में ईरान की बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के प्रमुख गुलामरेज़ा सुलेमानी के मारे जाने की भी पुष्टि की है।

 

इजराइल के बयानों से साफ है कि वह ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

 

जंग का बढ़ता दायरा

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान और इजराइल के बीच हमले तेज हो चुके हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रही है।

 

साथ ही, ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और कड़ा कर दिया है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। इससे वैश्विक तेल सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है।

इजराइल की अगली रणनीति
इजराइल की सेना ने संकेत दिए हैं कि वह आगे भी ईरान के बड़े नेताओं को निशाना बनाती रहेगी। सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा कि वे ईरान के नए संभावित सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को भी तलाश करेंगे।


उनका बयान साफ करता है कि यह संघर्ष अब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे नेतृत्व को निशाना बनाया जा रहा है।


नेतन्याहू का बयान
इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान के नेतृत्व को कमजोर करना है। उनका कहना है कि इससे ईरान की जनता को अपने शासन के खिलाफ खड़े होने का मौका मिलेगा।


हालांकि, अभी तक ईरान के अंदर किसी बड़े विरोध या अशांति के संकेत नहीं मिले हैं। लोग लगातार हो रहे हमलों से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों पर शरण ले रहे हैं।


ट्रंप को दिया था जवाब
हमले से एक हफ्ते पहले लारिजानी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की चेतावनी का जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि ईरान किसी भी धमकी से डरने वाला नहीं है और इससे पहले भी कई ताकतवर देशों का सामना कर चुका है।


उनका यह बयान उस समय आया था जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा था।


ईरान की राजनीति में अहम भूमिका
अली लारिजानी ईरान की सत्ता के सबसे अहम चेहरों में गिने जाते थे। वे देश की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख थे, जो रक्षा और विदेश नीति से जुड़े बड़े फैसले लेती है।


इसके अलावा वे 2008 से 2020 तक संसद के स्पीकर भी रह चुके थे। उन्हें ईरान की सत्ता व्यवस्था का “अंदरूनी और भरोसेमंद चेहरा” माना जाता था।


परिवार और राजनीतिक प्रभाव
लारिजानी एक बेहद प्रभावशाली परिवार से आते थे। उनके भाई सादिक लारिजानी न्यायपालिका के प्रमुख रह चुके हैं, जबकि मोहम्मद जवाद लारिजानी विदेश नीति के सलाहकार रहे हैं।
उनका परिवार ईरान में उसी तरह प्रभावशाली माना जाता है, जैसे अमेरिका में केनेडी परिवार।


न्यूक्लियर नीति में बड़ी भूमिका
लारिजानी ने ईरान की परमाणु नीति बनाने में भी अहम भूमिका निभाई थी। वे 2005 से 2007 तक देश के मुख्य परमाणु वार्ताकार रहे।
उन्होंने पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद यूरेनियम संवर्धन के ईरान के अधिकार का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने एक बार पश्चिम के प्रस्तावों की तुलना “मोती के बदले टॉफी” देने जैसी बताई थी।


राजनीति और आलोचना
हालांकि लारिजानी को कुछ लोग व्यावहारिक नेता मानते थे, लेकिन वे हमेशा ईरान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था के साथ खड़े रहे।
अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध भी लगाए थे। आरोप था कि उन्होंने सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका निभाई, जिसमें कई लोगों की मौत हुई थी।


क्रांति से लेकर सत्ता तक का सफर
1958 में इराक के नजफ में जन्मे लारिजानी बाद में ईरान आ गए। उन्होंने इस्लामिक क्रांति के दौर में राजनीति में कदम रखा।
ईरान-इराक युद्ध के दौरान वे रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े रहे और बाद में राजनीति में सक्रिय हो गए। वे संस्कृति मंत्री भी रहे और सरकारी मीडिया के प्रमुख के रूप में भी काम किया।


धीरे-धीरे वे सत्ता के सबसे भरोसेमंद और प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए।


नेतृत्व में बढ़ता खालीपन
हाल के वर्षों में ईरान की राजनीति में रिवोल्यूशनरी गार्ड का प्रभाव बढ़ा है, जिससे लारिजानी जैसे नेताओं की भूमिका कुछ कम होती दिखी।
फिर भी उन्हें भविष्य में भी अहम सलाहकार के रूप में देखा जा रहा था। ऐसे में उनकी मौत ईरान के नेतृत्व के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।


आगे क्या असर पड़ेगा
लारिजानी की हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि यह ईरान की सत्ता संरचना पर सीधा असर डालने वाली घटना है। इससे मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और तेज हो सकते हैं।