क्या धागों में उलझकर टूटने वाली है बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था? टेक्सटाइल संकट ने बजाई खतरे की घंटी

बांग्लादेश की टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट (RMG) इंडस्ट्री, जो दशकों से देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती रही है, आज अपने सबसे गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। जनवरी 2026 के अंत तक यदि सरकार ने यार्न (धागे) के ड्यूटी-फ्री आयात पर फैसला नहीं लिया, तो 1 फरवरी से देशभर में कपड़ा मिलों के बंद होने की चेतावनी दी गई है। यह केवल औद्योगिक हड़ताल नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक आर्थिक संकट का संकेत है, जिसके सामाजिक, राजनीतिक और क्षेत्रीय प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं।

 

बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) के अनुसार, भारत से आयातित सस्ते यार्न ने घरेलू स्पिनिंग इंडस्ट्री को लगभग अपंग कर दिया है। लगभग ₹12,000 करोड़ का यार्न स्टॉक बिना बिके पड़ा है, 50 से अधिक स्पिनिंग मिलें बंद हो चुकी हैं और करीब 10 लाख नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है

 

बांग्लादेश की टेक्सटाइल अर्थव्यवस्था:

चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट निर्यातक है। देश के कुल निर्यात का लगभग 84% हिस्सा इसी सेक्टर से आता है और यह GDP में करीब 11% का योगदान देता है। प्रत्यक्ष रूप से लगभग 50 लाख और अप्रत्यक्ष रूप से 1.5 करोड़ लोग इस उद्योग पर निर्भर हैं। खास बात यह है कि इस सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी अत्यधिक है, जिससे यह केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक स्थिरता का आधार भी बनता है।

 

1980 के दशक में शुरू किया गया Bonded Warehouse System बांग्लादेश के गारमेंट निर्यात मॉडल की नींव रहा है। इसके तहत निर्यातक फैक्ट्रियां बिना कस्टम ड्यूटी, VAT या टैक्स चुकाए यार्न, फैब्रिक और अन्य कच्चा माल आयात कर सकती हैं, बशर्ते अंतिम उत्पाद का निर्यात किया जाए। यही मॉडल बांग्लादेश को वैश्विक ब्रांड्स-जैसे H&M, Zara, Calvin Klein, Tommy Hilfiger, Hugo Boss-का प्रमुख सप्लायर बनाता रहा।

यार्न संकट की जड़: नीति, आयात और असंतुलन

समस्या तब गहराई जब ड्यूटी-फ्री आयात सुविधा का दुरुपयोग बढ़ने लगा। 2025 में बांग्लादेश ने लगभग 70 करोड़ किलोग्राम यार्न आयात किया, जिसकी कीमत करीब 2 अरब डॉलर थी। इसमें से 78% यार्न भारत से आया। यह यार्न सस्ता, बेहतर गुणवत्ता वाला और समय पर उपलब्ध होता है, जबकि घरेलू स्पिनिंग मिलें महंगी ऊर्जा, गैस की अनियमित सप्लाई और ऊंची ब्याज दरों से जूझ रही हैं।

 

इसका नतीजा यह हुआ कि गारमेंट फैक्ट्रियों ने स्थानीय धागा खरीदना लगभग बंद कर दिया। स्पिनिंग यूनिट्स के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया और उत्पादन क्षमता कई जगह 50% से भी कम रह गई। BTMA इसे “अन्यायपूर्ण प्रतिस्पर्धा” मानता है, जबकि गारमेंट निर्यातक संगठन BGMEA का तर्क है कि अगर ड्यूटी-फ्री आयात बंद हुआ तो उनकी लागत बढ़ेगी और वैश्विक बाजार में बांग्लादेश की प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ जाएगी।

 

ऊर्जा संकट, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक दबाव

यार्न संकट अकेला कारण नहीं है। बीते कुछ महीनों में बांग्लादेश ने गंभीर ऊर्जा संकट झेला है। गैस की कमी, बढ़ती कीमतें और बिजली आपूर्ति में कटौती ने उद्योग को लगभग पंगु बना दिया। अडानी पावर झारखंड लिमिटेड द्वारा बकाया भुगतान न होने के कारण बिजली सप्लाई घटाए जाने से स्थिति और बिगड़ी

इसके साथ ही, शेख हसीना सरकार के पतन के बाद राजनीतिक अस्थिरता, हड़तालें और लॉजिस्टिक बाधाएं बढ़ीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले छह महीनों में बांग्लादेश की गारमेंट इंडस्ट्री 5–7 बिलियन डॉलर के ऑर्डर खो चुकी है और 800–900 फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। यह संकट अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक अशांति का रूप लेने लगा है।

 

वैश्विक प्रभाव और भारत के लिए अवसर

इस संकट का सीधा असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स वैकल्पिक सप्लायर्स की तलाश में हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ भारत को मिला है। 2024–25 में भारत का टेक्सटाइल निर्यात 8.5% बढ़कर 7.5 बिलियन डॉलर पहुंच गया और बीते छह महीनों में लगभग 60,000 करोड़ का अतिरिक्त कारोबार भारत को मिला है

 

इसके साथ ही, भारत–EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत यूरोप में टेक्सटाइल पर टैरिफ 12% से घटकर 0% होना भारतीय उद्योग के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। तिरुप्पुर, सूरत, लुधियाना, इचलकरंजी और वारंगल जैसे औद्योगिक क्लस्टरों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना है।

 

यह संकट बांग्लादेश के निर्यात-आधारित विकास मॉडल की कमजोरियों को उजागर करता है। अत्यधिक आयात-निर्भरता, कम वैल्यू-एडिशन, ऊर्जा सुरक्षा की अनदेखी और श्रम-प्रधान सेक्टर पर एकतरफा निर्भरता ने अर्थव्यवस्था को असंतुलित बना दिया।

 

दूसरी ओर, भारत धीरे-धीरे पूरे टेक्सटाइल वैल्यू चेन-स्पिनिंग से लेकर फिनिश्ड गारमेंट तक-को मजबूत करने की दिशा में बढ़ रहा है। यही अंतर दोनों देशों की वर्तमान स्थिति को समझाता है।

 

निष्कर्ष:

बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री का मौजूदा संकट केवल यार्न ड्यूटी या ऊर्जा कीमतों का मामला नहीं है, बल्कि यह एक नीतिगत और संरचनात्मक विफलता का परिणाम है। यदि सरकार स्पिनिंग मिलों और गारमेंट निर्यातकों के बीच संतुलन नहीं बना पाती, तो देश को बड़े पैमाने पर बेरोजगारी और सामाजिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।

 

वहीं, भारत के लिए यह संकट एक अवसर है-बशर्ते वह गुणवत्ता, समयबद्ध आपूर्ति और श्रम-संरक्षण के साथ अपनी वैश्विक साख बनाए रखे। दक्षिण एशिया की टेक्सटाइल भू-राजनीति अब एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है।

 

Prelims प्रश्न

बांग्लादेश में गारमेंट निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लागू Bonded Warehouse System के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. इसके तहत निर्यातक फैक्ट्रियां कच्चा माल बिना कस्टम ड्यूटी आयात कर सकती हैं।
  2. आयातित कच्चा माल घरेलू बाजार में बिना किसी कर के बेचा जा सकता है।
  3. यह प्रणाली 1980 के दशक से बांग्लादेश में लागू है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 1
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3

 

Mains प्रश्न

“बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री में उत्पन्न वर्तमान संकट उसके निर्यात-आधारित विकास मॉडल की अंतर्निहित कमजोरियों को उजागर करता है।” इस कथन के आलोक में संकट के कारणों, सामाजिक-आर्थिक प्रभावों तथा भारत के लिए उत्पन्न अवसरों का विश्लेषण कीजिए।

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