पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार सुबह शिया समुदाय की एक मस्जिद में हुए भीषण आत्मघाती हमले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। जुमे की नमाज़ के दौरान हुए इस धमाके में बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई और सैकड़ों घायल हुए। इस हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोपों पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया है।
भारत का स्पष्ट संदेश: आरोप निराधार और तथ्यहीन
भारतीय विदेश मंत्रालय ने देर रात एक आधिकारिक बयान जारी कर इस हमले की निंदा की और कहा कि इसमें भारत की भूमिका होने का दावा पूरी तरह आधारहीन है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस दुखद घटना में जान गंवाने वालों के प्रति भारत गहरी संवेदना व्यक्त करता है।
बयान में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान अपने समाज में मौजूद गंभीर समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए बार-बार बाहरी देशों पर दोष मढ़ने की कोशिश करता रहा है। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह ऐसे हर आरोप को खारिज करता है जो न केवल निराधार हैं बल्कि पूरी तरह निरर्थक भी हैं।
भारत का यह बयान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस दावे के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने हमले के लिए भारत और अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था।
मस्जिद में धमाका, भारी जानमाल का नुकसान
यह आत्मघाती हमला इस्लामाबाद के एक शिया इमामबाड़े में उस समय हुआ, जब बड़ी संख्या में लोग नमाज़ अदा कर रहे थे। पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, इस हमले में 31 लोगों की मौत हुई और 169 लोग घायल हुए। हालांकि, कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या 69 तक बताई जा रही है, जिससे नुकसान की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
घायलों को राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया
हमले के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों को निशाना बनाना पूरी तरह से इंसानियत के खिलाफ है। राष्ट्रपति ने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और प्रशासन को निर्देश दिए कि पीड़ितों को हर संभव बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
वहीं, संसदीय मामलों के मंत्री डॉ. तारिक फजल चौधरी ने भी इस हमले की तीखी निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ऐसी आतंकी घटनाएं न तो देश को झुका सकती हैं और न ही जनता के हौसले को तोड़ सकती हैं। उन्होंने नागरिकों से शांति बनाए रखने और सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग करने की अपील की।
पहले भी हो चुके हैं बड़े हमले
इस्लामाबाद में यह कोई पहली बड़ी आतंकी घटना नहीं है। इससे करीब तीन महीने पहले, 11 नवंबर 2025 को राजधानी के G-11 इलाके में जिला और सत्र न्यायालय के बाहर आत्मघाती हमला हुआ था। उस धमाके में 12 लोगों की मौत हुई थी और 30 से अधिक लोग घायल हुए थे।
इन लगातार हो रहे हमलों ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आतंकवाद से बुरी तरह जूझता पाकिस्तान
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 की रिपोर्ट पाकिस्तान की चिंताजनक स्थिति को और स्पष्ट करती है। रिपोर्ट के अनुसार, बुर्किना फासो के बाद पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आतंक प्रभावित देश बन चुका है। यह स्थिति और भी गंभीर इसलिए है क्योंकि 2024 में पाकिस्तान इस सूची में चौथे स्थान पर था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमलों में लगभग 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमलों में 60 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। इसके अलावा इस्लामिक स्टेट-खुरासान (IS-K) ने भी अब पाकिस्तान के शहरी इलाकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स के मुताबिक, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित प्रांत हैं। देश में होने वाली कुल आतंकी घटनाओं में से लगभग 90 प्रतिशत इन्हीं इलाकों में दर्ज की गई हैं।
रिपोर्ट में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को लगातार दूसरे वर्ष पाकिस्तान का सबसे खतरनाक आतंकी संगठन बताया गया है। वर्ष 2024 में इस संगठन ने 482 हमले किए थे, जिनमें 558 लोगों की मौत हुई थी। यह आंकड़ा 2023 की तुलना में करीब 91 प्रतिशत अधिक है।
इस्लामाबाद में हुआ आत्मघाती हमला एक बार फिर यह दिखाता है कि पाकिस्तान को आतंकवाद की समस्या का समाधान बाहरी आरोपों में नहीं, बल्कि अपने आंतरिक हालात का ईमानदारी से सामना करने में ढूंढना होगा। भारत ने साफ कर दिया है कि वह बेबुनियाद आरोपों को स्वीकार नहीं करेगा और आतंकवाद के हर रूप की निंदा करता रहेगा।
