इसरो के भरोसेमंद PSLV मिशन में तकनीकी चूक! आठ मिनट बाद तीसरे चरण में आई खराबी, तकनीकी समस्या ने क्यों बढ़ाई चिंता?

संदर्भ :

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए वर्ष 2026 की शुरुआत एक महत्वपूर्ण मिशन से हुई।  हालांकि, उड़ान के लगभग आठ मिनट बाद तीसरे चरण में तकनीकी समस्या सामने आने के कारण मिशन अपने निर्धारित लक्ष्य तक नहीं पहुँच सका। इस घटनाक्रम ने देश-विदेश के वैज्ञानिक समुदाय और आम नागरिकों का ध्यान खींचा, क्योंकि पीएसएलवी को इसरो का सबसे भरोसेमंद प्रक्षेपण यान माना जाता रहा है।

ISRO PSLV mission suffered technical glitch

PSLV-C62 मिशन का उद्देश्य और महत्व :

PSLV-C62 को एक उन्नत पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के प्रक्षेपण के लिए तैयार किया गया था। ऐसे उपग्रह भारत के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं क्योंकि ये देश की विशाल भौगोलिक विविधता पर लगातार नजर रखने में मदद करते हैं।

इस मिशन के माध्यम से उच्च-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें और डेटा प्राप्त करने की योजना थी, जिनका उपयोग फसल आकलन, शहरी विस्तार की निगरानी, मौसम से जुड़ी घटनाओं का अध्ययन और प्राकृतिक आपदाओं के समय त्वरित प्रतिक्रिया के लिए किया जाना था। 2026 के पहले मिशन के रूप में PSLV-C62 से यह अपेक्षा भी थी कि यह वर्षभर के अंतरिक्ष अभियानों के लिए सकारात्मक शुरुआत करेगा।

 

प्रक्षेपण की प्रक्रिया और उड़ान के शुरुआती क्षण :

PSLV-C62 का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। उलटी गिनती के बाद रॉकेट ने सामान्य रूप से उड़ान भरी। पहले और दूसरे चरण का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप रहा। रॉकेट ने निर्धारित पथ का पालन किया और शुरुआती कुछ मिनटों तक सभी प्रणालियाँ सामान्य बताई गईं।

 

इसरो के नियंत्रण कक्ष से मिल रही सूचनाओं के अनुसार, उड़ान के दौरान रॉकेट की गति और ऊँचाई तय मानकों के अनुसार बढ़ रही थी। दर्शकों और विशेषज्ञों के लिए यह एक सामान्य और सफल प्रक्षेपण जैसा ही लग रहा था।

 

तीसरे चरण में आई तकनीकी समस्या :

उड़ान के लगभग आठ मिनट बाद, जब रॉकेट तीसरे चरण में प्रवेश कर रहा था, तभी मिशन में गड़बड़ी दर्ज की गई। तीसरा चरण पीएसएलवी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी चरण में रॉकेट उपग्रह को कक्षा में पहुँचाने के लिए आवश्यक सटीक वेग प्राप्त करता है।


प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, तीसरे चरण के दौरान अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिला। इससे रॉकेट की गति और दिशा पर असर पड़ा और उपग्रह को नियोजित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। सुरक्षा और मिशन नियमों के अनुसार, आगे की प्रक्रिया को रोक दिया गया।

 

इसरो की प्रारंभिक प्रतिक्रिया और जांच :

मिशन के बाद इसरो ने आधिकारिक बयान में कहा कि उड़ान के दौरान तीसरे चरण में समस्या आई, जिसके कारण मिशन अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सका। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी प्रणालियों और डेटा का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा।


इसरो की परंपरा रही है कि किसी भी असफलता के बाद एक आंतरिक जांच समिति बनाई जाती है, जो तकनीकी कारणों की गहराई से समीक्षा करती है। PSLV-C62 के मामले में भी सेंसर डेटा, टेलीमेट्री और उड़ान के हर चरण की जाँच की जा रही है, ताकि असली कारण की पहचान हो सके।

 

PSLV की विश्वसनीयता और इस असफलता का संदर्भ :

पीएसएलवी को इसरो का “वर्कहॉर्स” कहा जाता है। पिछले कई दशकों में इस रॉकेट ने दर्जनों सफल मिशन पूरे किए हैं और भारत को एक भरोसेमंद अंतरिक्ष प्रक्षेपण देश के रूप में स्थापित किया है।

 

ऐसे में PSLV-C62 की यह असफलता असामान्य मानी जा रही है। हालांकि, अंतरिक्ष अभियानों में जोखिम स्वाभाविक होता है। दुनिया की लगभग सभी प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों को समय-समय पर ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इसरो के इतिहास में भी पहले कुछ मिशन असफल रहे हैं, लेकिन उन्हीं से सीख लेकर आगे बड़ी सफलताएँ हासिल की गई हैं।

 

राष्ट्रीय महत्व और वैज्ञानिक दृष्टिकोण :

PSLV-C62 की असफलता को केवल एक तकनीकी घटना के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे सीखने के अवसर के रूप में समझा जा रहा है। पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों की जरूरत भारत जैसे देश के लिए लगातार बढ़ रही है।


कृषि संकट, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सटीक और समय पर डेटा की भूमिका बेहद अहम है। इसरो और वैज्ञानिक समुदाय इस बात पर सहमत हैं कि असफलता से मिले सबक भविष्य के मिशनों को और अधिक मजबूत बनाएंगे।

 

आगे की रणनीति और आने वाले मिशन :

इसरो ने संकेत दिए हैं कि PSLV-C62 से जुड़ी जांच पूरी होने के बाद आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाएंगे। इसके साथ ही 2026 में प्रस्तावित अन्य मिशनों की समय-सारणी पर भी पुनः समीक्षा की जा सकती है।
इसरो का लक्ष्य केवल एक मिशन की सफलता नहीं, बल्कि दीर्घकालिक अंतरिक्ष कार्यक्रम की मजबूती है। मानव अंतरिक्ष उड़ान, चंद्र और ग्रह मिशन तथा उन्नत उपग्रह कार्यक्रम-इन सभी के लिए मजबूत प्रक्षेपण प्रणालियाँ अनिवार्य हैं।

 

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भारत की छवि :

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसरो की छवि एक सक्षम और भरोसेमंद अंतरिक्ष एजेंसी की रही है। PSLV-C62 की असफलता के बावजूद, वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि इसरो अपनी पारदर्शी प्रक्रिया और त्वरित सुधारात्मक कदमों के कारण जल्द ही स्थिति संभाल लेगा।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की भूमिका केवल व्यावसायिक प्रक्षेपण तक सीमित नहीं है, बल्कि विकासशील देशों के लिए तकनीकी सहयोग का भी माध्यम रही है।

 

निष्कर्ष :

PSLV-C62 मिशन, जो 2026 का इसरो का पहला मिशन था, तीसरे चरण में आई तकनीकी समस्या के कारण सफल नहीं हो सका। यह घटना निश्चित रूप से निराशाजनक है, लेकिन अंतरिक्ष अनुसंधान की प्रकृति ही ऐसी है जहाँ जोखिम और सीख साथ-साथ चलते हैं।
इसरो की ताकत उसकी वैज्ञानिक क्षमता, अनुभव और आत्ममंथन की संस्कृति में निहित है। विस्तृत जांच और सुधार के बाद आने वाले मिशन न केवल इस कमी को दूर करेंगे, बल्कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को और अधिक मजबूत बनाएंगे। PSLV-C62 की असफलता अंत नहीं, बल्कि आगे की सफलताओं की तैयारी का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

 

प्रश्न :
ISRO के PSLV-C62 मिशन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. PSLV-C62 वर्ष 2026 में ISRO का पहला अंतरिक्ष मिशन था।
  2. इस मिशन का उद्देश्य पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को कक्षा में स्थापित करना था।
  3. मिशन उड़ान के लगभग आठ मिनट बाद रॉकेट के तीसरे चरण में तकनीकी समस्या के कारण सफल नहीं हो सका।
  4. PSLV रॉकेट का उपयोग केवल मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए किया जाता है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(a) केवल 1, 2 और 3
(b) केवल 1 और 4
(c) केवल 2 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4

प्रश्न (GS-III : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)


ISRO के PSLV-C62 मिशन की तीसरे चरण में हुई विफलता ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के सामने तकनीकी चुनौतियों को उजागर किया है।
इस संदर्भ में पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों के महत्व, PSLV की भूमिका और अंतरिक्ष मिशनों में असफलताओं से सीख के महत्व की चर्चा कीजिए।

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