Jagannath Dham Trademark को लेकर ओडिशा सरकार और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने बड़ा कदम उठाया है। पुरी के 12वीं शताब्दी के प्रसिद्ध Puri Jagannath Temple से जुड़े कई पवित्र नामों और प्रतीकों के ट्रेडमार्क के लिए आवेदन को ट्रेड मार्क्स रजिस्ट्री से प्रारंभिक मंजूरी मिल गई है। यह फैसला पिछले साल पश्चिम बंगाल के दीघा में बने जगन्नाथ मंदिर के नाम को लेकर हुए विवाद के बाद लिया गया था। आइए जानते हैं कि आखिर Jagannath Dham Trademark का मामला क्या है, इसकी जरूरत क्यों पड़ी और इसका धार्मिक व कानूनी महत्व क्या है।
Jagannath Dham Trademark क्या है?
Jagannath Dham Trademark का मतलब पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर से जुड़े पवित्र नामों, प्रतीकों और पहचान को कानूनी सुरक्षा देना है। इसका उद्देश्य इन धार्मिक शब्दों और प्रतीकों का व्यावसायिक या अनधिकृत इस्तेमाल रोकना, मंदिर की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करना और उनकी विशिष्ट पहचान बनाए रखना है।

Jagannath Dham Trademark की जरूरत क्यों पड़ी?
इस पूरे विवाद की शुरुआत अप्रैल 2025 में हुई, जब पश्चिम बंगाल की तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार ने दीघा में बने जगन्नाथ मंदिर का नाम ‘श्री श्री जगन्नाथ धाम कल्चरल सेंटर‘ रखा। इस पर ओडिशा सरकार, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन, मंदिर के सेवायतों और लाखों श्रद्धालुओं ने कड़ा विरोध जताया।ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उस समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर कहा था कि ‘धाम‘ शब्द केवल पुरी से जुड़ा है और इसका उपयोग किसी अन्य मंदिर के लिए करने से पुरी की विशिष्ट धार्मिक पहचान कमजोर होती है।पुरी के पूर्व गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने भी इसे शास्त्रों और परंपराओं के विरुद्ध बताया था।हालांकि, पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बाद नई सरकार ने जून 2026 में दीघा मंदिर के नाम से ‘धाम‘ शब्द हटा दिया।
Jagannath Dham Trademark में किन नामों को मिली मंजूरी?
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने अब तक कुल 29 ट्रेडमार्क आवेदन दायर किए हैं। इनमें से कई नामों और प्रतीकों को ट्रेड मार्क्स रजिस्ट्री ने दूसरे चरण की जांच के बाद प्रकाशन के लिए मंजूरी दे दी है।
इनमें प्रमुख नाम हैं–
- Jagannath Dham
- Shree Kshetra
- Mahaprasad
- Nilachakra
- Koili Vaikuntha
इससे पहले Patitapaban, Ananda Bajara और Nilachakra Logo से जुड़े आवेदन भी स्वीकृत हो चुके हैं। यदि अगले तीन महीनों में कोई आपत्ति नहीं आती है, तो इन नामों को अंतिम ट्रेडमार्क प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा।
ट्रेडमार्क कराने का उद्देश्य क्या है?
ट्रेडमार्क किसी नाम, लोगो, प्रतीक या पहचान को कानूनी संरक्षण देता है। Jagannath Dham Trademark का मुख्य उद्देश्य है–
- पवित्र नामों का व्यावसायिक दुरुपयोग रोकना।
- मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना।
- नकली ब्रांडिंग और गलत इस्तेमाल पर रोक लगाना।
- Jagannath Heritage को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना।
- Intellectual Property के तहत मंदिर की विशिष्ट पहचान को कानूनी सुरक्षा देना।
SJTA का कहना है कि यह कदम किसी दूसरे मंदिर का विरोध करने के लिए नहीं बल्कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े पवित्र शब्दों की गरिमा बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
क्या सिर्फ पुरी ही आधिकारिक ‘जगन्नाथ धाम‘ है?
धार्मिक परंपराओं और सदियों से चली आ रही मान्यताओं के अनुसार, पुरी को भगवान जगन्नाथ का मूल धाम माना जाता है। चार धामों–बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम और पुरी में पुरी का विशेष स्थान है। इसी कारण ‘जगन्नाथ धाम‘ शब्द सदियों से पुरी के लिए ही प्रयोग किया जाता रहा है। यही वजह है कि ओडिशा सरकार और मंदिर प्रशासन चाहते हैं कि इस नाम का उपयोग केवल उसी धार्मिक संदर्भ में हो, जिससे इसकी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान बनी रहे।
क्या अन्य मंदिरों पर इसका कोई असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रेडमार्क का उद्देश्य किसी अन्य स्थान पर भगवान जगन्नाथ के मंदिर बनने से रोकना नहीं है।
इसका असर मुख्य रूप से इन बातों पर होगा–
- पवित्र नामों का व्यावसायिक इस्तेमाल।
- मंदिर की आधिकारिक ब्रांडिंग।
- धार्मिक पहचान से जुड़े लोगो और प्रतीकों का अनधिकृत उपयोग।
यानी अन्य स्थानों पर जगन्नाथ मंदिर बने रहेंगे, लेकिन ‘Jagannath Dham’ जैसे संरक्षित नामों के उपयोग पर कानूनी नियम लागू हो सकते हैं।
निष्कर्ष
Jagannath Dham Trademark केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि पुरी की सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का प्रयास है। पश्चिम बंगाल के दीघा मंदिर को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद ओडिशा सरकार और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने यह कदम उठाया ताकि Puri Jagannath Temple से जुड़े पवित्र नामों, प्रतीकों और परंपराओं का अनधिकृत या व्यावसायिक उपयोग रोका जा सके। यदि अंतिम मंजूरी मिलती है तो यह भारत में धार्मिक विरासत की कानूनी सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
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FAQs
- ओडिशा सरकार ने ‘जगन्नाथ धाम‘ नाम का ट्रेडमार्क कराने का निर्णय क्यों लिया?
ताकि भगवान जगन्नाथ से जुड़े पवित्र नामों और प्रतीकों का अनधिकृत या व्यावसायिक उपयोग रोका जा सके और पुरी की धार्मिक पहचान सुरक्षित रहे।
- जगन्नाथ धाम को लेकर विवाद क्या है?
दीघा में बने जगन्नाथ मंदिर के नाम में ‘जगन्नाथ धाम‘ शब्द जोड़ने पर ओडिशा सरकार और मंदिर प्रशासन ने विरोध जताया था।
- क्या पुरी ही एकमात्र आधिकारिक जगन्नाथ धाम है?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार पुरी को भगवान जगन्नाथ का मूल और आधिकारिक धाम माना जाता है तथा चार धामों में इसका विशेष स्थान है।
- ट्रेडमार्क कराने का उद्देश्य क्या है?
धार्मिक नामों, लोगो और प्रतीकों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उनके गलत या व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकना।
- क्या इससे अन्य मंदिरों पर कोई प्रभाव पड़ेगा?
नहीं। इससे अन्य स्थानों पर बने जगन्नाथ मंदिरों पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन संरक्षित नामों और आधिकारिक प्रतीकों के उपयोग पर कानूनी नियम लागू हो सकते हैं।
- जगन्नाथ मंदिर का धार्मिक महत्व क्या है?
पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर हिंदू धर्म के चार प्रमुख धामों में से एक है और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा देवी सुभद्रा की पूजा का सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है।

