तमिलनाडु बॉक्स ऑफिस का बादशाह: थलापति विजय के विदाई के साथ खत्म हो रहा एक स्वर्णिम युग

तमिल सिनेमा के इतिहास में यदि किसी एक अभिनेता ने बीते एक दशक में बॉक्स ऑफिस पर निर्विवाद राज किया है, तो वह नाम है थलापति विजय। उनकी लोकप्रियता, दर्शकों से जुड़ाव और टिकट खिड़की पर सफलता ऐसी रही है, जिसकी मिसाल मौजूदा दौर में मिलना मुश्किल है। लगातार आठ फिल्मों का दुनियाभर में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाना, विजय को तमिल सिनेमा का सबसे भरोसेमंद और बैंकबल सितारा साबित करता है।


अब जब उनकी आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ (Jana Nayagan) को लेकर चर्चाएं तेज हैं और खुद विजय ने फिल्मों से संन्यास लेकर सार्वजनिक जीवन में कदम रखने का ऐलान कर दिया है, तो तमिल फिल्म उद्योग एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां एक युग का अंत साफ दिखाई देता है।


हालांकि, फैंस के लिए निराशाजनक खबर यह रही कि 9 जनवरी को पोंगल से पहले रिलीज होने वाली यह फिल्म सेंसर सर्टिफिकेट में देरी के कारण टल गई। निर्माताओं ने अभी नई रिलीज डेट की घोषणा नहीं की है।

Golden Era Ends with Thalapathy Vijay

शुरुआती सफर से सुपरस्टार बनने तक की कहानी

विजय का फिल्मी करियर करीब 33 वर्षों का रहा है, जिसमें उन्होंने कुल 65 फिल्मों में अभिनय किया। 1992 में नालैय थीरपू’ से बतौर मुख्य अभिनेता शुरुआत करने वाले विजय ने धीरे-धीरे, लेकिन बेहद रणनीतिक तरीके से अपनी स्टारडम की इमारत खड़ी की।

 

फिल्म वितरक और थिएटर मालिक तिरुपुर सुब्रमण्यम, जो तमिलनाडु थिएटर एंड मल्टीप्लेक्स ओनर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं, के मुताबिक विजय का करियर कई चरणों में आगे बढ़ा।

 

उनका कहना है कि करियर की शुरुआत में विजय ने रसिगन’ और कोयंबटूर मापिल्लई’ जैसी एक्शन फिल्मों से दर्शकों का ध्यान खींचा। लेकिन असली मोड़ पूवे उनकागा’ से आया, जिसने उन्हें रोमांटिक हीरो के रूप में स्थापित कर दिया। इसके बाद थुल्लाधा मनमुम थुल्लुम’, काधलुक्कु मरियाधै’ जैसी फिल्मों में उनका ‘लवर बॉय’ अवतार खूब पसंद किया गया।

 

इन फिल्मों का निर्माण ज्यादातर सुपर गुड फिल्म्स के बैनर तले हुआ था, जिसे अनुभवी निर्माता आरबी चौधरी चलाते थे।

 

रोमांटिक हीरो से मास एंटरटेनर तक का सफर

90 के दशक के अंत और 2000 के शुरुआती वर्षों में विजय की छवि एक सफल रोमांटिक अभिनेता की बन चुकी थी। कुशी’ (2000) और बद्री’ (2001) जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को और मजबूत किया।

 

लेकिन असली छलांग तब आई, जब उन्होंने पूरी तरह से मास एंटरटेनर की राह पकड़ी। तिरुपाची’ से वह एक फुल-फ्लेज्ड कमर्शियल हीरो बने, और फिर घिल्ली’ (2004) ने इतिहास रच दिया।

 

‘घिल्ली’ ने 200 दिनों से ज्यादा का थिएटर रन पूरा किया और विजय को तमिल सिनेमा की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल कर दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

 

एक के बाद एक सुपरहिट्स का सिलसिला

घिल्ली के बाद विजय ने लगातार ऐसी फिल्में दीं, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और उनकी स्टार पावर को और ऊंचाई दी।
इनमें प्रमुख हैं:

  • पोक्किरी (2007)
  • थुप्पाक्की (2012)
  • कथ्थी (2014)
  • मर्सल (2017)
  • बिगिल (2019)

 

इन फिल्मों की खास बात यह रही कि ये सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं थीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों को भी बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंचाने में सफल रहीं।

 

हालिया फिल्मों ने बनाई ऐतिहासिक कमाई

पिछले कुछ वर्षों में भी विजय की बॉक्स ऑफिस पकड़ कमजोर नहीं हुई।

  • मास्टर’ (2021) ने कोरोना प्रतिबंधों के बावजूद 250 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया।
  • इसके बाद बीस्ट’ (2022), वरिसु’ (2023) और लियो’ (2023) ने शानदार कमाई की।

 

खासकर लियो’ ने दुनियाभर में 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन कर इसे तमिल सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल कर दिया।

 

2024 में आई द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम (GOAT)’ ने भी विजय की लोकप्रियता को बरकरार रखा।

 

थिएटर मालिकों के लिए आर्थिक सहारा

विजय सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि तमिलनाडु के थिएटर मालिकों और वितरकों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच रहे हैं।
जीके सिनेमाज के रुबन मथिवनन के अनुसार, विजय की एक फिल्म की रिलीज से थिएटर मालिकों को दो से तीन महीने तक आर्थिक राहत मिल जाती है।

 

सिंगल स्क्रीन थिएटर से लेकर मल्टीप्लेक्स तक, विजय की फिल्में हाउसफुल शो, लंबा रन और बार-बार देखने वाले दर्शकों की गारंटी देती रही हैं।

 

ऑनलाइन टिकट बुकिंग खुलते ही प्लेटफॉर्म क्रैश होना, फर्स्ट डे फर्स्ट शो का जश्न और फैन क्लबों की दीवानगी-ये सब विजय की फिल्मों के साथ आम दृश्य बन चुके हैं।

 

फीस और ब्रांड वैल्यू

विजय आज तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे ज्यादा फीस लेने वाले अभिनेताओं में शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह एक फिल्म के लिए 175 से 200 करोड़ रुपये तक चार्ज करते हैं।

 

लेकिन उनकी असली कीमत सिर्फ उनकी फीस नहीं, बल्कि वह भरोसा है, जो उनकी फिल्म इंडस्ट्री को देता है।

 

‘जन नायकन’: आखिरी फिल्म, आखिरी सलाम

निर्देशक एच. विनोथ की जन नायकन’ विजय की विदाई फिल्म है। खुद विजय ने घोषणा की है कि वह अब फिल्मों से दूर होकर जनता की सेवा करना चाहते हैं।

 

रुबन मथिवनन का कहना है कि ‘लियो’ और ‘GOAT’ विजय के करियर की बेहतरीन फिल्मों में शामिल हैं, और ‘जन नायकन’ से दर्शकों को एक यादगार विदाई की उम्मीद है।

 

क्या विजय के बिना टिक पाएगा तमिल सिनेमा?

यह सवाल अब हर किसी के मन में है। तिरुपुर सुब्रमण्यम के अनुसार, विजय की गैरमौजूदगी तमिल सिनेमा को गहराई से प्रभावित करेगी। वह अपने करियर के शिखर पर हैं और किसी गिरावट के कारण नहीं, बल्कि निजी फैसले से विदा ले रहे हैं।

 

रुबन मथिवनन भी मानते हैं कि यह खालीपन जल्द भर पाना नामुमकिन है।

 

एक युग का अंत

तमिल सिनेमा आगे बढ़ेगा, नए सितारे उभरेंगे, लेकिन थलापति विजय जैसा मास अपील, बॉक्स ऑफिस भरोसा और सांस्कृतिक प्रभाव एक साथ मिलना बेहद दुर्लभ है।

 

‘जन नायकन’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि तमिल सिनेमा के सबसे सफल अध्यायों में से एक का आखिरी पन्ना है। सवाल यह नहीं कि तमिल सिनेमा विजय के बिना चलेगा या नहीं-सवाल यह है कि उस खाली जगह को भरने में कितने साल लगेंगे।