विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक 2026 का आयोजन 19 जनवरी से स्विट्जरलैंड के दावोस में प्रारंभ हो चुका है। पांच दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक मंदी, भू-राजनीतिक संघर्ष, जलवायु संकट और तकनीकी परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए लगभग 3,000 विश्व नेता एकत्र हुए हैं। यह बैठक बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और बदलती शक्ति संरचना के दौर में आयोजित हो रही है।
विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक 2026 इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि यह अब तक के सबसे बड़े जमावड़ों में से एक है। इस वर्ष 130 से अधिक देशों के शीर्ष नेता इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में भागीदारी कर रहे हैं।
दावोस और विश्व आर्थिक मंच का परिचय
विश्व आर्थिक मंच एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है। पिछले 50 वर्षों से यह संस्था सरकारों, व्यवसायों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और नागरिक समाज के नेताओं को एक मंच पर लाती रही है।
इसकी सबसे प्रमुख घटना वार्षिक दावोस बैठक है, जहां सार्वजनिक-निजी सहयोग के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श होता है। यह मंच सीमाओं और क्षेत्रों के पार संवाद, सहयोग और नीतिगत नवाचार को प्रोत्साहित करके विश्व की स्थिति में सुधार पर केंद्रित है।
स्थापना और संस्थापक
विश्व आर्थिक मंच की स्थापना 1971 में “यूरोपीय प्रबंधन मंच” के रूप में हुई थी। 1987 में इसका नाम बदलकर विश्व आर्थिक मंच कर दिया गया। इसके संस्थापक जर्मन अर्थशास्त्री क्लाउस श्वाब हैं, जिन्होंने “स्टेकहोल्डर कैपिटलिज्म” की अवधारणा प्रस्तुत की।
दावोस 2026: तिथि, स्थान और थीम
विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक 2026 का आयोजन 19 जनवरी से 23 जनवरी 2026 तक दावोस, स्विट्जरलैंड में हो रहा है।
इस वर्ष की आधिकारिक थीम “संवाद की भावना” है, जो विभाजित और विवादित दुनिया में सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित करती है। विचार-विमर्श विश्वास के पुनर्निर्माण, भू-राजनीतिक तनाव के प्रबंधन, नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने और आर्थिक विखंडन तथा तीव्र तकनीकी परिवर्तन के बीच समावेशी विकास सुनिश्चित करने पर केंद्रित रहेगा।
प्रतिभागियों का विवरण
विश्व आर्थिक मंच के अनुसार, दावोस 2026 में 130 से अधिक देशों के लगभग 3,000 नेता उपस्थित होंगे।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व:
- लगभग 400 वरिष्ठ राजनीतिक नेता
- करीब 65 राष्ट्र या सरकार प्रमुख
- G7 देशों के शीर्ष नेता
प्रमुख उपस्थिति: अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी वैश्विक संस्थाओं के प्रमुख भी भागीदारी करेंगे।
व्यवसाय और प्रौद्योगिकी नेताओं की भूमिका
दावोस 2026 में वैश्विक निगमों के लगभग 850 शीर्ष मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और व्यावसायिक नेताओं की भागीदारी देखने को मिलेगी।
सत्य नडेला और जेन्सन हुआंग जैसे प्रौद्योगिकी क्षेत्र के दिग्गजों के उपस्थित रहने की उम्मीद है। चर्चाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन, ऊर्जा संक्रमण, आपूर्ति श्रृंखला और नवाचार-आधारित विकास जैसे विषय केंद्र में रहेंगे। यह वैश्विक आर्थिक परिणामों को आकार देने में निजी क्षेत्र के बढ़ते प्रभाव को प्रदर्शित करता है।
दावोस 2026 में भारत की उपस्थिति
भारत अपने बढ़ते वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए उच्च-स्तरीय राजनीतिक और व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रतिनिधित्व कर रहा है।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व: वाणिज्य, ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना और विदेश मामलों जैसे महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के उपस्थित रहने की संभावना है।
राज्यों की भागीदारी: महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और केरल सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।
कॉर्पोरेट नेतृत्व: टाटा, इन्फोसिस, महिंद्रा और JSW जैसे समूहों के भारतीय कॉर्पोरेट नेता दावोस में भारत की उपस्थिति को मजबूत करेंगे।
भारतीय राज्यों के उद्देश्य
भारतीय राज्य दावोस 2026 का उपयोग विदेशी निवेश आकर्षित करने और विकास मॉडल प्रदर्शित करने के लिए कर रहे हैं।
केरल: जिम्मेदार निवेश और ESG-केंद्रित दृष्टिकोण को बढ़ावा देगा।
झारखंड: नवीकरणीय ऊर्जा और समावेशी विकास पर आधारित अपने ऊर्जा संक्रमण मॉडल को प्रस्तुत करेगा।
आंध्र प्रदेश: बुनियादी ढांचे और उद्योग में निवेश के अवसरों को उजागर करेगा।
ये प्रयास भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक विकास भागीदार के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखते हैं।
वैश्विक महत्व
दावोस 2026 विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भू-राजनीतिक संघर्षों, आर्थिक मंदी, जलवायु दबाव और तीव्र तकनीकी परिवर्तन के बीच आयोजित हो रहा है।
यह मंच ऐसे समय में संवाद के लिए एक तटस्थ मंच के रूप में कार्य करता है जब बहुपक्षीय सहयोग दबाव में है। नेताओं से सतत विकास, जलवायु कार्रवाई, AI शासन और वैश्विक सहयोग के लिए रणनीतियों की रूपरेखा तैयार करने की उम्मीद है, जो भविष्य की वैश्विक नीति निर्माण के लिए इस शिखर सम्मेलन को अत्यधिक प्रासंगिक बनाता है।
विश्व आर्थिक मंच के उद्देश्य
प्रमुख लक्ष्य:
- विश्व की स्थिति में सुधार करना
- सार्वजनिक-निजी सहयोग को बढ़ावा देना
- वैश्विक आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करना
- सरकारों, व्यवसायों और नागरिक समाज के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना
प्रमुख फोकस क्षेत्र
इस वर्ष के सम्मेलन में निम्नलिखित विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
अर्थव्यवस्था: वैश्विक आर्थिक मंदी से निपटने और विकास को पुनर्जीवित करने की रणनीतियां
भू-राजनीति: अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों और तनाव के प्रबंधन के तरीके
कृत्रिम बुद्धिमत्ता: AI का नैतिक और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करने के लिए शासन ढांचा
जलवायु परिवर्तन: पर्यावरणीय संकट से निपटने के लिए ठोस कार्य योजना
समावेशी विकास: सभी वर्गों के लिए विकास के अवसर सुनिश्चित करना
निष्कर्ष:
विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक 2026 एक ऐतिहासिक अवसर है जब वैश्विक नेता जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए एक साथ आए हैं। “संवाद की भावना” की थीम वर्तमान समय की आवश्यकता को सटीक रूप से दर्शाती है। भारत की सक्रिय भागीदारी और विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व देश के बढ़ते वैश्विक महत्व को प्रदर्शित करता है। यह सम्मेलन न केवल वर्तमान समस्याओं पर चर्चा का मंच है, बल्कि भविष्य की नीतियों और सहयोग की दिशा तय करने का भी अवसर है।
