संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा प्रणाली में अब तक के सबसे स्पष्ट और कड़े बदलावों में से एक की घोषणा की है। बुधवार को जारी CSE 2026 की विस्तृत अधिसूचना के साथ आयोग ने न केवल रिक्तियों और परीक्षा प्रक्रिया की जानकारी दी, बल्कि पहले से चयनित और नियुक्त उम्मीदवारों के लिए प्रयासों और पात्रता को लेकर नई सीमाएं भी तय कर दीं।
इन बदलावों का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा जो किसी न किसी सिविल सेवा में चयनित होने के बावजूद बार-बार परीक्षा देकर बेहतर सेवा या कैडर की उम्मीद रखते हैं। आयोग का स्पष्ट संदेश है-अब “लगातार प्रयास” की गुंजाइश सीमित होगी।
आवेदन प्रक्रिया और समय-सीमा
UPSC ने स्पष्ट किया है कि सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार upsc.gov.in के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 24 फरवरी निर्धारित की गई है।
आयोग ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे आवेदन से पहले नई अधिसूचना को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि पात्रता और प्रयासों से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं।
इस बार कितनी भर्तियां होंगी?
CSE 2026 के जरिए कुल 933 पदों को भरने की घोषणा की गई है। यह संख्या पिछले कुछ वर्षों की तुलना में कम है।
- 2025 में 979 पद अधिसूचित किए गए थे
- उससे पहले 1,105 पदों पर भर्ती हुई थी
यह परीक्षा IAS, IPS, IFS, IRS सहित अन्य समूह ‘A’ और समूह ‘B’ सेवाओं में नियुक्ति के लिए आयोजित की जाती है। घटती रिक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा और भी कड़ी होने की संभावना है।
सबसे बड़ा बदलाव: IAS और IFS में पहले से चयनित उम्मीदवारों पर रोक
नई अधिसूचना के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार किसी पूर्व सिविल सेवा परीक्षा के आधार पर IAS या IFS में नियुक्त हो चुका है और उस सेवा का सदस्य बना हुआ है, तो वह CSE 2026 में बैठने का पात्र नहीं होगा।
आयोग ने अलग-अलग परिस्थितियों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं:
- यदि IAS या IFS में नियुक्ति प्रारंभिक परीक्षा के बाद लेकिन मुख्य परीक्षा से पहले होती है, तो उम्मीदवार को मुख्य परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिलेगी, भले ही वह प्रीलिम्स पास कर चुका हो।
- यदि नियुक्ति मुख्य परीक्षा शुरू होने के बाद लेकिन परिणाम घोषित होने से पहले होती है, तो उम्मीदवार को CSE 2026 के आधार पर किसी भी सेवा में नियुक्ति के लिए विचार नहीं किया जाएगा।
ऐसे मामलों में दोबारा परीक्षा में बैठने का एकमात्र रास्ता सेवा से इस्तीफा देना होगा।
IPS को लेकर अलग और सख्त प्रावधान
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए UPSC ने इस बार विशेष और अधिक स्पष्ट प्रतिबंध जोड़ा है। अब यदि कोई उम्मीदवार किसी पूर्व परीक्षा के आधार पर IPS में चयनित या नियुक्त हो चुका है, तो वह CSE 2026 के परिणाम के आधार पर दोबारा IPS के लिए पात्र नहीं होगा।
हालांकि, ऐसे उम्मीदवार परीक्षा में बैठ सकते हैं और अन्य सेवाओं के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, बशर्ते वे पात्रता शर्तें पूरी करते हों। यह नियम पिछली अधिसूचनाओं की तुलना में कहीं अधिक स्पष्ट और कठोर माना जा रहा है।
CSE 2026 चयनित उम्मीदवारों को एक बार फिर मौका
UPSC ने एक सीमित राहत भी दी है। CSE 2026 के माध्यम से IPS या किसी केंद्रीय सेवा समूह A में आवंटित उम्मीदवारों को CSE 2027 में एक बार फिर परीक्षा देने का अवसर मिलेगा।
लेकिन इसके लिए सख्त शर्तें तय की गई हैं:
- उम्मीदवार को संबंधित प्राधिकरण से “प्रशिक्षण में शामिल होने से एकबारगी छूट” लेनी होगी
- केवल फाउंडेशन कोर्स को स्थगित करने की अनुमति होगी
- यदि उम्मीदवार न प्रशिक्षण में शामिल होता है और न ही छूट लेता है, तो 2026 के तहत उसकी सेवा आवंटन रद्द कर दी जाएगी
दो चयन होने पर क्या होगा?
यदि कोई उम्मीदवार CSE 2027 में फिर से चयनित हो जाता है, तो उसे 2026 या 2027 में मिली सेवा में से किसी एक को चुनना होगा। जो सेवा नहीं चुनी जाएगी, वह स्वतः रद्द मानी जाएगी।
यदि उम्मीदवार 2027 में चयनित नहीं होता, तो वह 2026 में आवंटित सेवा में शामिल हो सकता है। हालांकि, किसी भी स्थिति में यदि प्रशिक्षण में शामिल होने में विफलता होती है, तो दोनों आवंटन रद्द हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे उम्मीदवारों को CSE 2028 या उसके बाद की किसी भी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं होगी, जब तक कि वे अपनी आवंटित सेवा से इस्तीफा नहीं दे देते।
वरिष्ठता पर क्या असर पड़ेगा?
UPSC ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार की ज्येष्ठता (seniority) अंततः जिस सेवा में वह शामिल होगा, उसी के आधार पर तय की जाएगी।
ज्येष्ठता को किसी भी स्थिति में कम नहीं किया जाएगा, भले ही उम्मीदवार ने दो बार चयन का विकल्प इस्तेमाल किया हो।
पुराने बैचों को भी मिला सीमित अवसर
CSE 2025 या उससे पहले की परीक्षाओं के आधार पर पहले से किसी सेवा में आवंटित उम्मीदवारों के लिए भी अधिसूचना में एकबारगी अवसर दिया गया है।
ऐसे उम्मीदवार सेवा से इस्तीफा दिए बिना अपने शेष प्रयासों का उपयोग करते हुए CSE 2026 या CSE 2027 में से किसी एक परीक्षा में बैठ सकते हैं।
हालांकि, यदि वे CSE 2028 या उसके बाद परीक्षा देना चाहते हैं, तो उन्हें अनिवार्य रूप से अपनी वर्तमान सेवा से इस्तीफा देना होगा।
इस्तीफे के बिना अब लंबी रेस नहीं
आयोग ने साफ कर दिया है कि एकबारगी सुधार विकल्प का उपयोग करने के बाद उम्मीदवारों को आगे बार-बार परीक्षा देने की छूट नहीं मिलेगी।
यह नियम यह सुनिश्चित करता है कि उम्मीदवार अपने करियर निर्णयों को गंभीरता से लें और सेवा में रहते हुए अनिश्चितता बनाए न रखें।
UPSC ने ये बदलाव क्यों किए?
इन संशोधनों के पीछे आयोग का उद्देश्य सिस्टम की खामियों को बंद करना बताया जा रहा है। पिछले वर्षों में यह देखा गया था कि कई उम्मीदवार सेवा में शामिल होने के बावजूद बेहतर विकल्प के लिए बार-बार परीक्षा देते रहे।
नए ढांचे के तहत:
- स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है
- सेवा आवंटन के बाद अनिश्चितता कम की गई है
- नए उम्मीदवारों के लिए अवसरों को संतुलित किया गया है
विशेष रूप से IPS को लेकर लगाए गए प्रतिबंध यह सुनिश्चित करते हैं कि एक ही सेवा के लिए दोबारा प्रतिस्पर्धा न हो।
निष्कर्ष:
UPSC द्वारा घोषित नए नियम सिविल सेवा परीक्षा प्रणाली में अनुशासन, पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने की दिशा में एक अहम कदम माने जा रहे हैं।
इन बदलावों से यह संदेश साफ है कि एक बार सेवा में चयन होने के बाद उम्मीदवार से पूर्ण प्रतिबद्धता की अपेक्षा की जाएगी।
साथ ही, यह व्यवस्था उन अभ्यर्थियों के लिए भी राहत लेकर आती है जो पहली बार परीक्षा में बैठ रहे हैं और लंबे समय से बार-बार प्रयास करने वालों के कारण अवसरों की कमी महसूस कर रहे थे।
आने वाले वर्षों में ये नियम सिविल सेवा परीक्षा की प्रकृति और रणनीति-दोनों को प्रभावित करेंगे।
