मध्य पूर्व में चल रहे तनाव ने अब वैश्विक ऊर्जा बाजार को सीधा प्रभावित करना शुरू कर दिया है। हाल ही में कतर ने दावा किया कि ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों में उसके सबसे बड़े गैस केंद्र रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी को भारी नुकसान पहुंचा है। यह जगह दुनिया की सबसे बड़ी LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) उत्पादन साइट मानी जाती है।
कतर के सबसे बड़े गैस केंद्र पर हमला
कतर के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाकर किए गए हमले से वहां आग लग गई और बड़े स्तर पर नुकसान हुआ। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी भी व्यक्ति के हताहत होने की खबर नहीं है।
कतर के आंतरिक मंत्रालय के अनुसार आग पर शुरुआती स्तर पर काबू पा लिया गया था। वहीं सरकारी ऊर्जा कंपनी QatarEnergy ने बताया कि सभी कर्मचारियों को सुरक्षित निकाल लिया गया और कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ।
लेकिन बाद में जारी एक और बयान में कहा गया कि अन्य LNG सुविधाओं पर भी हमले हुए, जिससे कई जगहों पर बड़ी आग लगी और अतिरिक्त नुकसान हुआ।
हमले के पीछे क्या वजह?
यह हमला ऐसे समय हुआ जब ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि वह खाड़ी क्षेत्र के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बना सकता है। यह चेतावनी इज़राइल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर किए गए हमले के जवाब में दी गई थी।
ईरान ने कतर के मेसाईद पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, रास लाफान रिफाइनरी, सऊदी अरब के जुबैल और यूएई के अल होसन गैस फील्ड जैसे कई महत्वपूर्ण ठिकानों को संभावित लक्ष्य बताया था।

कतर की सख्त प्रतिक्रिया
हमले के बाद कतर ने कड़ा कदम उठाते हुए अपने यहां मौजूद ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को “पर्सोना नॉन ग्राटा” घोषित कर दिया। उन्हें 24 घंटे के अंदर देश छोड़ने का आदेश दिया गया।
कतर ने इस हमले को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया। उसने यह भी कहा कि ईरान की लगातार बढ़ती आक्रामकता पूरे क्षेत्र को युद्ध के कगार पर ले जा रही है।
वैश्विक नेताओं की चिंता
इस घटनाक्रम के बाद इमैनुएल मैक्रों ने कतर के अमीर और डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की। मैक्रों ने अपील की कि ऊर्जा और पानी जैसी जरूरी सुविधाओं को निशाना बनाने वाले हमलों पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आम लोगों की जरूरतों और वैश्विक ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा को किसी भी हालत में खतरे में नहीं डालना चाहिए।
दुनिया की सबसे बड़ी LNG साइट क्यों अहम है?
रास लाफान, दोहा से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित है और यह दुनिया की सबसे बड़ी LNG उत्पादन सुविधा है। यह अकेले ही दुनिया की करीब 20% LNG सप्लाई करता है।
यानी अगर यहां उत्पादन रुकता है, तो इसका असर सीधे एशिया और यूरोप के ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है।
पहले भी मार्च की शुरुआत में इस जगह पर हमले के बाद LNG उत्पादन रोक दिया गया था। अब ताजा हमलों के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है।
ऊर्जा बाजार में हलचल
इस हमले के बाद वैश्विक तेल और गैस बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से स्थिति और खराब हो गई है।
यह जलमार्ग दुनिया के करीब 20% तेल के परिवहन का रास्ता है। यहां खतरा बढ़ने के कारण जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है और सैकड़ों जहाज सुरक्षित क्षेत्रों में फंसे हुए हैं।
इस वजह से ऊर्जा की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
यूरोप और एशिया पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि LNG की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर यूरोप पर पड़ेगा। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप पहले ही LNG पर ज्यादा निर्भर हो चुका है।
जर्मनी और यूरोपीय संघ के कई देश अब LNG आयात पर निर्भर हैं। इसके अलावा जापान, तुर्किये और भारत जैसे देश भी LNG पर काफी निर्भर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि गरीब और विकासशील देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा, क्योंकि महंगी गैस के कारण उनकी ऊर्जा मांग घट सकती है।
सऊदी अरब और UAE भी निशाने पर
इस बीच सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने भी बताया कि उन्होंने कई मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम किया।
सऊदी अरब ने कहा कि उसने रियाद की ओर आ रही बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। वहीं UAE ने भी दर्जनों मिसाइल और ड्रोन को रोकने का दावा किया।
हालांकि कुछ जगहों पर मलबा गिरने से गैस सुविधाओं को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
युद्ध का बढ़ता दायरा
यह पूरा घटनाक्रम अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का हिस्सा है, जो अब तीसरे हफ्ते में पहुंच चुका है। इस दौरान कई हमलों में हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं।
ईरान लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है, जबकि अमेरिका और इजराइल भी जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। इससे पूरा मध्य पूर्व एक बड़े युद्ध क्षेत्र में बदलता जा रहा है।
भारत पर क्या असर पड़ेगा?
इस संकट का सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% प्राकृतिक गैस आयात करता है।
इसमें से करीब 40% LNG कतर से आता है, यानी भारत की कुल गैस जरूरत का लगभग 20% हिस्सा कतर पर निर्भर है।
अगर कतर से सप्लाई प्रभावित होती है, तो भारत को अपनी गैस खपत कम करनी पड़ सकती है। खासकर उद्योग और बिजली उत्पादन क्षेत्र में इसका असर दिख सकता है।
फिलहाल भारत की रोजाना गैस खपत लगभग 189 MMSCMD है, जिसमें से करीब 97.5 MMSCMD देश में ही उत्पादन होता है। हाल ही में करीब 47.4 MMSCMD की सप्लाई बाधित हुई है, जिसके बाद भारत ने दूसरे देशों से LNG खरीदने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
निष्कर्ष:
कतर पर हुआ यह हमला सिर्फ एक देश तक सीमित घटना नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ऊर्जा सप्लाई, कीमतें, और वैश्विक राजनीति-तीनों ही इस संकट से प्रभावित हो रहे हैं।
अगर यह तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। खासकर उन देशों के लिए जो आयात पर निर्भर हैं, हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

