मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में मीटू मूवमेंट (Malayalam Film Industry MeToo Movement): महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
Malayalam Film Industry MeToo Movement Explained by Ankit Avasthi Sir कुछ वर्ष पूर्व, 2017 में हॉलीवुड में एक बड़ा यौन शोषण अभियान चला, जिसे #MeToo कैंपेन के नाम से जाना गया। यह तब शुरू हुआ जब हॉलीवुड के मशहूर प्रो
Malayalam Film Industry MeToo Movement Explained by Ankit Avasthi Sir
कुछ वर्ष पूर्व, 2017 में हॉलीवुड में एक बड़ा यौन शोषण अभियान चला, जिसे #MeToo कैंपेन के नाम से जाना गया। यह तब शुरू हुआ जब हॉलीवुड के मशहूर प्रोड्यूसर हार्वे वीनस्टीन पर 80 से अधिक महिलाओं ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए। इस घटना के बाद कई मशहूर एक्ट्रेसेस जैसे एंजेलीना जोली, सलमा हायेक आदि ने अपने साथ हुए शोषण को सार्वजनिक किया और "मी टू" लिखकर इस अभियान को बल दिया।
भारत में भी उभरा मीटू मूवमेंट
यह आंदोलन केवल हॉलीवुड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत में भी इसका प्रभाव देखने को मिला। बॉलीवुड सहित राजनीति और अन्य क्षेत्रों की कई महिलाओं ने भी मीटू अभियान में भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। इस अभियान ने समाज में फैले यौन उत्पीड़न को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में मीटू की वापसी
हाल ही में, दक्षिण भारतीय सिनेमा, विशेष रूप से मलयालम फिल्म इंडस्ट्री (Mollywood) में मीटू मूवमेंट ने फिर से जोर पकड़ लिया है। इस बार कई प्रमुख कलाकारों और प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम सामने आ रहे हैं, जिन पर यौन शोषण के आरोप लगे हैं।
मामला तब सुर्खियों में आया जब एक्ट्रेस मीनू मुनीर ने सोशल मीडिया के जरिए कई मलयालम फिल्म कलाकारों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। इनमें मुकेश, मनिया पिल्लू, राजू अदा वेला, बाबू जया सूर्या जैसे नाम शामिल हैं। मीनू मुनीर ने यह आरोप 2013 की एक घटना से जुड़े थे, जिसे अब सार्वजनिक किया गया।
हेमा कमेटी रिपोर्ट और नया विवाद
मीटू अभियान की ताजा लहर मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में तब और तेज हो गई जब हेमा कमेटी रिपोर्ट पब्लिक की गई।
2017 में, एक अभिनेत्री ने सार्वजनिक रूप से खुलासा किया कि उसके साथ कुछ पुरुष कलाकारों ने दुर्व्यवहार किया था। इस मामले के बाद केरल सरकार ने हेमा कमेटी गठित की, जिसका नेतृत्व केरल हाई कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस के. हेमा कर रही थीं। इस समिति का उद्देश्य फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के साथ हो रहे यौन उत्पीड़न और अन्य शोषण के मामलों की जांच करना था।
2019 में 295 पन्नों की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी गई, लेकिन यह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। फरवरी 2022 में सरकार ने कहा कि यह रिपोर्ट गोपनीय है क्योंकि इसमें महिलाओं की गवाही शामिल हैं, जिससे उनकी निजता को नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन हाल ही में रिपोर्ट का एक हिस्सा पब्लिक किया गया, जिससे फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मच गई।
रिपोर्ट के चौंकाने वाले खुलासे
हेमा कमेटी रिपोर्ट में महिलाओं से जुड़े 17 तरह के शोषण का जिक्र किया गया है:
काम के बदले यौन संबंधों की मांग
वर्कप्लेस पर यौन उत्पीड़न
महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाओं (टॉयलेट, चेंजिंग रूम) की कमी
यौन उत्पीड़न का विरोध करने पर करियर खत्म करने की धमकी
पुरुष कलाकारों की तुलना में महिलाओं को कम वेतन
सेट पर शराब और नशीली चीजों का सेवन और दुर्व्यवहार
महिला कर्मचारियों को तकनीकी कार्यों में कम मौके
ऑनलाइन उत्पीड़न और अश्लील मैसेज भेजना
फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के लिए कोई शिकायत निवारण तंत्र नहीं
रिपोर्ट के खुलासे के बाद कई महिलाओं ने दोबारा अपने अनुभव साझा किए।
https://youtu.be/p-qwR930RcUइस्तीफों की झड़ी और बढ़ता दबाव
हेमा कमेटी रिपोर्ट पब्लिक होने के बाद मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में कई प्रमुख नामों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा:
फिल्ममेकर रंजीत – बंगाली एक्ट्रेस श्रीलेखा ने उन पर यौन उत्पीड़न और रेप का आरोप लगाया, जिसके बाद उन्हें केरल चलचित्र अकादमी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा।
अभिनेता सिद्दकी – एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (AMMA) के महासचिव पद से इस्तीफा।
बाबूराज सहित 17 अन्य कलाकारों ने भी अपने पद छोड़ दिए।
मीनू मुनीर ने सीपीएम विधायक और अभिनेता मुकेश एम पर सेट पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसके बाद धारा 354 के तहत मामला दर्ज किया गया।
अब आगे क्या?
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर दी है। साथ ही, विपक्ष और महिला संगठनों ने सरकार से जवाबदेही की मांग की है कि आखिर क्यों 5 साल तक यह रिपोर्ट दबाई गई और अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
निष्कर्ष
मीटू मूवमेंट का पुनरुत्थान यह दर्शाता है कि फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म उद्योग में महिलाओं के साथ भेदभाव और उत्पीड़न आज भी जारी है। यह सरकार और समाज दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है कि महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए और यौन शोषण के आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में मीटू मूवमेंट की यह नई लहर समाज को जागरूक करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में एक अहम भूमिका निभा सकती है। अब देखना यह होगा कि क्या इस बार सिनेमा जगत में बदलाव आएगा या यह भी बीते मामलों की तरह धुंधला पड़ जाएगा?
मैं, अंकित अवस्थी, ने इस महत्वपूर्ण विषय को अपने यूट्यूब वीडियो में कवर किया है। पूरी जानकारी के लिए वीडियो देखें: https://youtu.be/p-qwR930RcU
इस वीडियो में मैंने [संक्षेप में विषय का उल्लेख करें] से जुड़ी हर जरूरी जानकारी दी है। इस अहम अपडेट को मिस न करें—अभी देखें!
🔴 नई जानकारी के लिए चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करें!