राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में अरुणाचल प्रदेश की तीन महिलाओं के साथ हुई कथित नस्लीय टिप्पणी और अपमान का मामला सामने आया है। यह घटना 20 फरवरी की बताई जा रही है, लेकिन इसकी जानकारी अब सार्वजनिक हुई है। एक साधारण विवाद से शुरू हुआ मामला देखते ही देखते गाली-गलौज और आपत्तिजनक टिप्पणियों तक पहुंच गया। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों के साथ बराबरी का व्यवहार हो रहा है या नहीं।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
जानकारी के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश की तीन महिलाएं मालवीय नगर में किराए के फ्लैट में रहती हैं। उनका फ्लैट चौथी मंजिल पर है। 20 फरवरी को दोपहर करीब 3:30 बजे उन्होंने अपने घर में एयर कंडीशनर लगवाने के लिए एक इलेक्ट्रीशियन को बुलाया। एसी लगाने के दौरान दीवार पर ड्रिलिंग की गई, जिससे कुछ धूल और मलबा नीचे पहली मंजिल की बालकनी में गिर गया।
नीचे रहने वाले हर्ष सिंह और उनकी पत्नी रूबी जैन ने इस पर आपत्ति जताई। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई। आरोप है कि बात बढ़ने पर पड़ोसियों ने महिलाओं के साथ गाली-गलौज की और उन्हें उनके उत्तर-पूर्वी पहचान के आधार पर निशाना बनाया।
आपत्तिजनक और नस्लीय टिप्पणियों का आरोप
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि उन्हें “मोमो” कहकर बुलाया गया और “धंधेवाली” जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। एक आरोपी महिला ने यह भी कहा कि वे मसाज पार्लर में काम करती हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में आरोपी महिला कथित रूप से बेहद आपत्तिजनक बातें कहती नजर आ रही है। वीडियो में वह पीड़िता से कहती है कि अगर उसके पति की उम्र जाननी है तो उसके साथ बेडरूम में जाकर देख ले।
विवाद के दौरान एक पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद था, जो दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। हालांकि, महिलाओं का कहना है कि उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया गया और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई गई।

पुलिस की कार्रवाई
पीड़ितों की शिकायत के आधार पर मालवीय नगर थाने में हर्ष सिंह और रूबी जैन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79, 351(2), 3(5) और 196 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। ये धाराएं महिला का अपमान करने, आपराधिक धमकी देने और धर्म, जाति, जन्म स्थान या भाषा के आधार पर दुश्मनी बढ़ाने से जुड़ी हैं।
पुलिस के अनुसार, अभी तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शारीरिक चोट की कोई सूचना नहीं है, लेकिन शिकायतकर्ताओं ने मानसिक उत्पीड़न और अपमान का आरोप लगाया है। जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
फ्लैट खाली करने का दबाव
घटना के बाद महिलाओं को एक और झटका तब लगा, जब बिल्डिंग के ब्रोकर ने उन्हें सूचित किया कि दो महीने के भीतर फ्लैट खाली करना होगा, क्योंकि इमारत में मरम्मत का काम शुरू होना है। इस सूचना से महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं। उनका कहना है कि विवाद के बाद उन्हें डर और चिंता का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने इस मामले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि नॉर्थईस्ट के लोगों के साथ भेदभाव बंद होना चाहिए। उन्होंने ऐसे मामलों को गंभीर बताते हुए समाज से संवेदनशीलता और सम्मान की अपील की।
घृणा अपराध क्या होते हैं?
घृणा अपराध वे अपराध होते हैं, जिनमें किसी व्यक्ति को उसकी पहचान के आधार पर निशाना बनाया जाता है। यह पहचान उसकी जाति, नस्ल, धर्म, भाषा, लिंग या जन्म स्थान से जुड़ी हो सकती है। भारत में “घृणा अपराध” शब्द की अलग से कानूनी परिभाषा नहीं है, लेकिन ऐसे कृत्य भारतीय दंड संहिता (IPC) और अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दंडनीय हैं।
समाज पर असर
ऐसी घटनाएं समाज में दूरी और अविश्वास बढ़ाती हैं। जब किसी समुदाय को बार-बार निशाना बनाया जाता है, तो उसमें डर और असुरक्षा की भावना पैदा होती है। इससे सामाजिक एकता कमजोर होती है और लोगों के बीच भेदभाव की भावना बढ़ती है।
भारत का संविधान सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देता है। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता की बात करता है। अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव को रोकता है। अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार देता है। ऐसे में किसी भी तरह की नस्लीय टिप्पणी न सिर्फ सामाजिक रूप से गलत है, बल्कि कानूनी रूप से भी अपराध हो सकती है।
चुनौतियां क्या हैं?
आज के डिजिटल दौर में ऐसे विवाद तेजी से सोशल मीडिया पर फैल जाते हैं। कई बार बिना पूरी जांच के वीडियो वायरल हो जाते हैं, जिससे माहौल और बिगड़ सकता है। दूसरी ओर, ऐसे मामलों में आरोप साबित करना भी आसान नहीं होता, क्योंकि यह साबित करना पड़ता है कि टिप्पणी जानबूझकर किसी पहचान के आधार पर की गई थी।
भारत में घृणा भाषण को लेकर अलग से स्पष्ट कानून नहीं है। इसी कारण अलग-अलग राज्यों में इन मामलों की व्याख्या और कार्रवाई में अंतर देखा जाता है।
आगे का रास्ता
इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि हमें विविधता का सम्मान करना सीखना होगा। दिल्ली जैसे बड़े शहर में देश के हर कोने से लोग आकर रहते और काम करते हैं। ऐसे में आपसी समझ और सम्मान बेहद जरूरी है।
पुलिस जांच के नतीजे जो भी हों, लेकिन यह मामला समाज को सोचने पर मजबूर करता है। क्या हम सच में एक ऐसे देश में रह रहे हैं, जहां हर नागरिक को समान नजर से देखा जाता है?

