हाल ही में, गृह मंत्रालय (MHA) ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से स्वदेश वापसी के बाद वरिष्ठ IPS अधिकारी मुकेश सिंह को तत्काल प्रभाव से लद्दाख का नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया है। उन्होंने एस.डी. सिंह जमवाल का स्थान लिया है, जो वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश के डीजीपी हैं।
मुकेश सिंह कौन हैं?
- जन्म: मुकेश सिंह का जन्म 24 जनवरी 1971 को झारखंड के बोकारो स्टील सिटी में हुआ। बचपन से ही उनमें विज्ञान, तर्क और जनसेवा के प्रति विशेष रुचि दिखाई देती थी। वे पढ़ाई में निरंतर उत्कृष्ट रहे और जिम्मेदारी लेने की प्रवृत्ति उनके स्वभाव का हिस्सा बन गई। यही प्रारंभिक संस्कार आगे चलकर उन्हें प्रशासन और सुरक्षा सेवा के उच्चतम स्तर तक ले गए।
- शैक्षणिक पृष्ठभूमि: मुकेश सिंह ने अपनी उच्च शिक्षा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली से प्राप्त की, जहाँ से उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री हासिल की। IIT जैसी प्रतिष्ठित संस्था में अध्ययन ने उन्हें विश्लेषणात्मक सोच, समस्या समाधान और संरचनात्मक दृष्टिकोण प्रदान किया। इंजीनियरिंग की यह पृष्ठभूमि बाद में जटिल सुरक्षा अभियानों, रणनीतिक योजना और संसाधन प्रबंधन में उनके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई।
- भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश: वर्ष 1996 में मुकेश सिंह ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में प्रवेश किया। उन्हें प्रारंभ में जम्मू-कश्मीर कैडर आवंटित किया गया, जो उस समय देश के सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में गिना जाता था। वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद उनका कैडर AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिज़ोरम और केंद्र शासित प्रदेश) में शामिल हुआ।
- प्रारंभिक फील्ड पोस्टिंग:IPS अधिकारी के रूप में अपने शुरुआती वर्षों में मुकेश सिंह ने रीसी, पुलवामा, पुंछ और जम्मू जैसे संवेदनशील जिलों में पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में कार्य किया। यह वह दौर था जब क्षेत्र आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा था। इन नियुक्तियों ने उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियान, खुफिया समन्वय और जनसुरक्षा प्रबंधन का प्रत्यक्ष अनुभव दिया।
- वरिष्ठ रणनीतिक जिम्मेदारियाँ: समय के साथ मुकेश सिंह ने जम्मू-कश्मीर पुलिस में कई वरिष्ठ पदों को संभाला। वे महानिरीक्षक (IG) और बाद में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (ADGP) के रूप में जम्मू रेंज के प्रभारी रहे। इन भूमिकाओं में उन्होंने अनेक जिलों की पुलिस व्यवस्था की निगरानी की और बड़े स्तर के सुरक्षा अभियानों का संचालन किया।
- केंद्रीय प्रतिनियुक्ति: जम्मू-कश्मीर में व्यापक अनुभव के बाद मुकेश सिंह ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) में सेवाएँ दीं। वहाँ उन्होंने महानिरीक्षक (IG) और अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) जैसे उच्च पदों पर कार्य किया। सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनाती के दौरान उन्होंने सीमा सुरक्षा, आंतरिक समन्वय और बल आधुनिकीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में भूमिका निभाई।
- NIA में योगदान: मुकेश सिंह उन वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल रहे जिन्होंने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की स्थापना की नींव रखी। NIA में उन्होंने SP, DIG और IG जैसे पदों पर कार्य किया। इस दौरान उन्होंने देश के कुछ सबसे संवेदनशील और उच्च-प्रोफ़ाइल आतंकी मामलों की जांच का नेतृत्व किया।
- पेशेवर दक्षता: मुकेश सिंह संकट प्रबंधन, आतंकवाद विरोधी रणनीति और बहु-एजेंसी समन्वय में काफी दक्ष हैं। उन्होंने सामुदायिक सहभागिता और विश्वास निर्माण पर भी बल दिया।
- लेखन: उन्होंने पुलिसिंग के शैक्षणिक और वैचारिक पक्ष में भी महत्वपूर्ण कार्य किया। वे Police Operations नामक पुस्तक के सह-लेखक हैं। इसके अलावा उन्होंने Conducting an Anti-Terrorist Operation (2014), Police Operations (2015) और Investigation of Encounter Killings (2016) जैसे शोध पत्र सह-प्रकाशित किए।
- सम्मान और वीरता पुरस्कार: उनकी साहसिक सेवाओं को अनेक बार राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली। 1999 से 2005 के बीच उन्हें कई प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार प्राप्त हुए। इनमें शेर-ए-कश्मीर पुलिस पदक (2002) और चार बार पुलिस पदक (2003, 2005 में दो बार) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें सेना कमांडर प्रशंसा पदक (2005) और DGP प्रशंसा पदक (1999) भी मिला। दीर्घकालिक और उत्कृष्ट सेवा के लिए 2012 में पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा) से सम्मानित किया गया।
पुलिस महानिदेशक (DGP): राज्य पुलिस व्यवस्था का सर्वोच्च नेतृत्व
- पुलिस महानिदेशक (Director General of Police – DGP) किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस व्यवस्था का सर्वोच्च संवैधानिक और प्रशासनिक पद होता है। यह पद पूरे पुलिस बल को दिशा, अनुशासन और रणनीतिक नेतृत्व प्रदान करता है। राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अंतिम जिम्मेदारी DGP पर ही होती है।
- DGP, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की सर्वोच्च रैंक है। राज्य के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जैसे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP), महानिरीक्षक (IG), उप-महानिरीक्षक (DIG) और पुलिस अधीक्षक (SP) प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से DGP के अधीन कार्य करते हैं।
- DGP की नियुक्ति राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा की जाती है। यह प्रक्रिया गृह मंत्रालय और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप होती है। पुलिस, संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार राज्य सूची का विषय है, इसलिए DGP राज्य सरकार के अधीन कार्य करता है, लेकिन उसे कानून के दायरे में स्वतंत्र निर्णय लेने की अपेक्षा होती है।
- प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006) के ऐतिहासिक निर्णय के बाद DGP की नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी। इस निर्णय के अनुसार चयन वरिष्ठता, योग्यता और अनुभव के आधार पर तैयार पैनल से किया जाता है। इसका उद्देश्य राजनीतिक हस्तक्षेप को कम करना और पुलिस नेतृत्व को स्थायित्व देना है।
- DGP पद तक पहुँचने के लिए अधिकारी को लंबा और निष्कलंक सेवा रिकॉर्ड रखना आवश्यक होता है। सामान्यतः कोई IPS अधिकारी 30 से 35 वर्ष की सेवा के बाद इस स्तर तक पहुँचता है।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार DGP का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष होना चाहिए। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि पुलिस नेतृत्व में निरंतरता बनी रहे और अल्पकालिक दबावों से बचा जा सके।
- DGP का दायित्व केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं होता। वह संविधान के मूल्यों, कानून के शासन, मानवाधिकारों और जवाबदेही को सुनिश्चित करता है। DGP, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, खुफिया एजेंसियों और रक्षा संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करता है।
