अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने आखिरकार मान लिया है कि 2024 में सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष मिशन गंभीर तकनीकी और प्रबंधन की गलतियों का उदाहरण था। एजेंसी ने इस मिशन को “टाइप ए दुर्घटना” की श्रेणी में रखा है, जो उसकी सबसे गंभीर श्रेणी मानी जाती है। यही श्रेणी 2003 की कोलंबिया स्पेस शटल त्रासदी के लिए भी इस्तेमाल की गई थी, जिसमें भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला सहित सात लोगों की जान गई थी।
क्या था पूरा मामला?
सुनीता विलियम्स जून 2024 में बोइंग के स्टारलाइनर यान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए रवाना हुई थीं। यह मिशन केवल आठ दिनों का होना था। उनके साथ अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर भी थे। लेकिन उड़ान के तुरंत बाद ही यान की प्रणोदन प्रणाली में खराबी आने लगी। जैसे ही यान स्टेशन के करीब पहुंचा, उसके पांच थ्रस्टर बंद हो गए और हीलियम गैस के रिसाव की समस्या सामने आई।
हालांकि दोनों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित तरीके से ISS पर पहुंच गए, लेकिन यान की स्थिति चिंताजनक थी। जांच में सामने आया कि तकनीकी समस्याओं के बावजूद समय सीमा को प्राथमिकता दी गई। सुरक्षा चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। यही वजह रही कि तय समय पर वापसी संभव नहीं हो सकी।
सितंबर 2024 में स्टारलाइनर कैप्सूल खाली ही पृथ्वी पर लौट आया। सुनीता और विलमोर को आखिरकार मार्च 2025 में स्पेसएक्स ड्रैगन यान के जरिए वापस लाया गया। इस तरह आठ दिन का मिशन नौ महीने से ज्यादा लंबा हो गया।

घटना को गंभीर कैटेगरी में क्यों रखा?
19 फरवरी 2026 को जारी 311 पेज की रिपोर्ट में NASA प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने साफ कहा कि यह मिशन इंजीनियरिंग और नेतृत्व दोनों स्तर पर असफल रहा। “टाइप ए” श्रेणी वही है, जो चैलेंजर और कोलंबिया जैसी बड़ी दुर्घटनाओं के लिए दी जाती है। इसका मतलब है कि या तो भारी वित्तीय नुकसान हुआ या यान पर नियंत्रण पूरी तरह खो गया।
रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन में 200 मिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ, जो टाइप ए की न्यूनतम सीमा से कई गुना अधिक है। हालांकि इस बार किसी की जान नहीं गई, लेकिन दो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा जोखिम में पड़ी।
कोलंबिया हादसे से समानता
2003 में कोलंबिया शटल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय टूट गया था। उस समय भी इंजीनियरों की चेतावनियों को नजरअंदाज करने की बात सामने आई थी। नई रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टारलाइनर मिशन में भी प्रबंधन दबाव और कार्यक्रम की समयसीमा ने सुरक्षा फैसलों को प्रभावित किया। यानी, संस्कृति में वही कमजोरियां फिर दिखाई दीं।
सुनीता विलियम्स का करियर और रिटायरमेंट
सुनीता विलियम्स ने 27 दिसंबर 2025 से NASA से रिटायरमेंट लिया। वे 1998 में एजेंसी से जुड़ी थीं और तीन अंतरिक्ष मिशनों का हिस्सा रहीं। उन्होंने कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए। 9 दिसंबर 2006 को उन्होंने पहली बार अंतरिक्ष की यात्रा की थी।
सुनीता ने नौ स्पेसवॉक किए और 62 घंटे 6 मिनट तक अंतरिक्ष में चहलकदमी की, जो किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री के लिए सबसे ज्यादा है।
हाल ही में भारत दौरे पर उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से धरती को देखने पर एहसास होता है कि हम सब एक हैं। उनके पिता गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव से थे, इसलिए भारत आना उन्हें घर वापसी जैसा लगता है। चंद्रमा पर जाने के सवाल पर उन्होंने मजाक में कहा कि वे जाना चाहेंगी, लेकिन उनके पति शायद अनुमति न दें।
ISS: अंतरिक्ष में तैरती प्रयोगशाला
ISS 330 से 435 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है। इसकी शुरुआत 1998 में हुई और 2011 तक इसका निर्माण पूरा हुआ। यह अमेरिका, रूस, फ्रांस समेत 18 देशों की साझेदारी का नतीजा है।
यह 109 मीटर लंबा है और पृथ्वी के चारों ओर करीब 28,163 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूमता है। हर 90 मिनट में यह एक चक्कर पूरा कर लेता है। इसमें छह स्लीपिंग रूम, दो बाथरूम और एक जिम है। वहां रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को रोज दो घंटे व्यायाम करना होता है।
2 सितंबर 2017 को पैगी व्हिटसन ने 665 दिन अंतरिक्ष में रहकर रिकॉर्ड बनाया था। वहीं, स्कॉट केली की लंबाई एक साल के मिशन के दौरान दो इंच बढ़ गई थी, हालांकि पृथ्वी पर लौटने के बाद वह सामान्य हो गई।
आगे क्या?
NASA ने इस मिशन को गंभीर चेतावनी के रूप में लिया है। एजेंसी का कहना है कि अब सुरक्षा संस्कृति को मजबूत किया जाएगा और भविष्य में ऐसे जोखिम नहीं लिए जाएंगे। बोइंग के स्टारलाइनर कार्यक्रम पर भी सवाल उठे हैं।

