केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब स्लीपर बसों का निर्माण केवल ऑटोमोबाइल कंपनियां या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान ही कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सभी स्लीपर बसों को भी नए सेफ्टी स्टैंडर्ड के मुताबिक अपग्रेड करना होगा।
यह फैसला स्लीपर कोच बसों में बढ़ती आग की घटनाओं को देखते हुए लिया गया है। गडकरी ने कहा कि स्लीपर बसों को चलाने के लिए अब फायर डिटेक्शन सिस्टम, हथौड़ों के साथ इमरजेंसी एग्जिट, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर को नींद की वॉर्निंग देने वाले सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा।
पिछले 6 महीने में 145 लोगों की मौत
मंत्री ने बताया कि पिछले छह महीनों में स्लीपर कोच बसों में आग लगने की छह बड़ी दुर्घटनाएं रिपोर्ट की गई हैं, जिनमें 145 लोगों की जान चली गई। यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक है और इसी वजह से सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।
गडकरी ने कहा कि ये घटनाएं दिखाती हैं कि स्लीपर बसों में सेफ्टी के मामले में गंभीर कमियां हैं। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए नए नियम लाए जा रहे हैं।
बस में आग लगने के मुख्य कारण
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि ज्यादातर बसों में आग लगने की वजहें समान होती हैं। उन्होंने बताया कि कई बसों में ज्वलनशील इंटीरियर मटेरियल का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे आग फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
गडकरी ने कहा कि संकरे या ब्लॉक किए गए इमरजेंसी एग्जिट और इमरजेंसी विंडो की अनुपस्थिति या खराब हालत से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में बसों में उचित फायर सेफ्टी इक्विपमेंट भी नहीं होता, जिससे यात्रियों के पास बचने के लिए बहुत कम समय रहता है।
उन्होंने आगे कहा कि बस स्टाफ की अपर्याप्त ट्रेनिंग इमरजेंसी के दौरान स्थिति को और बिगाड़ देती है। गडकरी ने जोर देकर कहा कि यात्री सुरक्षा में सुधार के लिए बस बॉडी कोड (AIS-052) को सख्ती से लागू करना अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।
बस बॉडी कोड AIS-052 क्या है?
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि भारत का बस बॉडी कोड AIS-052 देश में निर्मित सभी बस बॉडी के लिए एक अनिवार्य स्टैंडर्ड है। यह कोड सेफ्टी, स्ट्रक्चर और डिजाइन के लिए साफ नियम तय करता है।
उन्होंने कहा कि यह कोड पहले असंगठित बस बॉडी-बिल्डिंग सेक्टर को रेगुलेट करने, यात्रियों और ड्राइवरों की सुरक्षा में सुधार करने, और बस कोच मैन्युफैक्चरिंग में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था।
गडकरी ने बताया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 1 सितंबर 2025 से संशोधित बस बॉडी कोड लागू कर दिया है, ताकि सड़क सुरक्षा मानकों को और मजबूत किया जा सके।
AIS-052 एक इंडस्ट्रियल स्टैंडर्ड है जो भारत में बस बॉडी डिजाइन और अप्रूवल के लिए गाइडलाइन सेट करता है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) द्वारा सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स (CMVR) के तहत जारी किया गया, यह इंडस्ट्री के लिए एक कोड ऑफ प्रैक्टिस के रूप में काम करता है।
AIS-052 में क्या शामिल है?
यह स्टैंडर्ड अनिवार्य है और देशभर में बस मैन्युफैक्चरर्स, बॉडी बिल्डर्स और ट्रांसपोर्ट अथॉरिटीज को इसका पालन करना होगा। यह स्टैंडर्ड सभी बस बॉडी पर लागू होता है, जब भी कोई बस डिजाइन या मॉडिफाई की जाती है।
इसमें शामिल हैं:
- बस बॉडी डिजाइनिंग और बेसिक फ्रेमवर्क
- डायमेंशन, सीटिंग अरेंजमेंट, गैंगवे (ड्राइवर से लास्ट सीट तक का रास्ता)
- इमरजेंसी एग्जिट गेट, सीट्स, लेदर की ताकत
- सेफ्टी फीचर्स जैसे – हैंडल, इमरजेंसी एग्जिट
- अप्रूवल प्रोसेस कि RTO/अथॉरिटी द्वारा बस बॉडी को कैसे वैलिड माना जाएगा
इसका उद्देश्य है:
- बसों के लिए बॉडी डिजाइन, स्ट्रक्चर और सेफ्टी स्टैंडर्ड को समान रूप से निर्धारित करना
- यात्री सुरक्षा, आराम, सामान्य डायमेंशन और इमरजेंसी साधनों के लिए नियम सेट करना
- बसें सुरक्षित, मजबूत और आरामदायक हों और यात्री परिवहन के लिए स्टैंडर्ड के अनुरूप हों
पिछले 3 महीने में बस आग की 5 बड़ी घटनाएं
भारत में पिछले तीन महीनों में बस में आग लगने की पांच बड़ी दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 67 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए।
18 दिसंबर 2025 – देहरादून, उत्तराखंड: तमिलनाडु के 40 स्टूडेंट्स को लेकर जा रही बस शिमला बाईपास रोड पर आग की चपेट में आ गई। ड्राइवर ने धुआं देखा, बस रोकी और सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। कोई जनहानि नहीं हुई।
16 दिसंबर 2025 – मथुरा, उत्तर प्रदेश: यमुना एक्सप्रेसवे पर घने कोहरे में आठ बसों और तीन कारों की टक्कर हो गई। गाड़ियों में आग लग गई, जिसमें BJP नेता समेत 13 लोगों की मौत हो गई और 70 घायल हुए। पुलिस ने बिखरे शरीर के अंगों को 17 पॉलीथीन बैग में इकट्ठा किया।
28 अक्टूबर 2025 – जयपुर, राजस्थान: एक बस हाई-टेंशन तार से टकरा गई और आग लग गई। उत्तर प्रदेश के दो लोगों की मौत हो गई और 10 से ज्यादा मजदूर घायल या झुलस गए। आग के दौरान बस पर रखे सिलेंडर फट गए।
24 अक्टूबर 2025 – कर्नूल, आंध्र प्रदेश: 40 यात्रियों को लेकर जा रही एक प्राइवेट बस में आग लग गई, जब एक बाइक टकराकर इसके फ्यूल टैंक में फंस गई। इस हादसे में 20 यात्री जिंदा जल गए।
14 अक्टूबर 2025 – जैसलमेर-जोधपुर हाईवे, राजस्थान: एक AC स्लीपर बस यात्रा के दौरान आग की चपेट में आ गई, जिसमें 20 यात्रियों की मौत हो गई और 15 घायल हुए। कुछ यात्रियों ने आग से बचने के लिए चलती बस से कूद लगा दी।
ये घटनाएं भारत में बस यात्रा को लेकर चल रही सुरक्षा चिंताओं को उजागर करती हैं।
नए नियमों का प्रभाव
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि वर्तमान में चल रही स्लीपर कोच बसों को अनिवार्य सेफ्टी फीचर्स के साथ रेट्रोफिट किया जाना चाहिए। इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर ड्राउजीनेस इंडिकेटर शामिल हैं। इसके अलावा, सभी मौजूदा यूनिट्स में यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इमरजेंसी एग्जिट और हथौड़े लगाए जाने चाहिए।
हाल के प्रेस कॉन्फ्रेंस में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने बताया कि उन्होंने राजस्थान सरकार को पत्र लिखा है। उन्होंने राज्य के उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है जिन्होंने मैनुअल बस बॉडी बिल्डर्स को सेल्फ-सर्टिफिकेशन का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।
निष्कर्ष:
यह फैसला यात्री सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्लीपर बसों में बार-बार होने वाली आग की घटनाओं ने सरकार को सख्त नियम बनाने के लिए मजबूर किया है। नए नियमों के तहत केवल मान्यता प्राप्त कंपनियां ही स्लीपर बसें बना सकेंगी और सभी बसों में सेफ्टी फीचर्स अनिवार्य होंगे। उम्मीद है कि इन उपायों से भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं में कमी आएगी और यात्रियों की जान सुरक्षित रहेगी।
