भारत (India) और कनाडा (Canada) के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव (Diplomatic Tension) को कम करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। दोनों देशों ने राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) और कानून प्रवर्तन (Law Enforcement) से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के लिए एक साझा कार्ययोजना (Shared Work Plan) तैयार करने पर सहमति जताई है। इसके तहत दोनों देश सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन संपर्क अधिकारियों (Security and Law-Enforcement Liaison Officers) की नियुक्ति करेंगे, ताकि आपसी समन्वय (Coordination) को मजबूत किया जा सके।
यह निर्णय शनिवार को कनाडा की राजधानी ओटावा (Ottawa) में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। इस बैठक में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (National Security Adviser – NSA) अजीत डोभाल और कनाडा की उनकी समकक्ष (Counterpart) नाथाली ड्रुइन (Nathalie Drouin) शामिल हुईं। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच नियमित द्विपक्षीय सुरक्षा संवाद (Bilateral Security Dialogue) का हिस्सा थी।
2023 के विवाद के बाद रिश्ते सुधारने की कोशिश
भारत-कनाडा संबंधों में आई खटास की पृष्ठभूमि वर्ष 2023 से जुड़ी है, जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) ने एक बयान में आरोप लगाया था कि कनाडा में मारे गए खालिस्तानी अलगाववादी (Khalistani Separatist) हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की भूमिका हो सकती है। भारत सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “बेतुका (Absurd)” बताया था।
इस विवाद के बाद दोनों देशों के रिश्ते दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के राजनयिकों (Diplomats) को निष्कासित (Expel) किया और कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्वों (Extremist Elements) और आपराधिक गिरोहों (Criminal Gangs) को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाए गए।
सुरक्षा सहयोग को फिर से पटरी पर लाने की पहल
अब, नए घटनाक्रम में दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि वे अपने रिश्तों को सामान्य बनाने (Normalise Relations) के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं। भारत के विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs – MEA) द्वारा जारी बयान के अनुसार, बैठक में यह स्वीकार किया गया कि अब तक कई ऐसे प्रयास किए गए हैं जो दोनों देशों और उनके नागरिकों की सुरक्षा (Safety) सुनिश्चित करने की दिशा में हैं।
इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-प्रवर्तन से जुड़े मुद्दों पर सहयोग को दिशा देने के लिए एक साझा कार्ययोजना लागू की जाएगी। यह कार्ययोजना दोनों देशों की प्राथमिकताओं (Priorities) को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति से बढ़ेगा तालमेल
बैठक का एक अहम निर्णय यह रहा कि भारत और कनाडा दोनों सुरक्षा एवं कानून-प्रवर्तन संपर्क अधिकारी नियुक्त करेंगे। इन अधिकारियों का काम दोनों देशों की एजेंसियों के बीच संवाद को सुचारु (Streamline Communication) बनाना और समय पर जानकारी साझा करना होगा।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह कदम खासतौर पर नशीली दवाओं की अवैध तस्करी (Illegal Drug Trafficking), विशेष रूप से फेंटेनाइल प्रीकर्सर (Fentanyl Precursors), और सीमापार संगठित अपराध नेटवर्क (Transnational Organised Criminal Networks) से निपटने में मददगार साबित होगा।
सूचना साझा करने पर विशेष जोर
दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि आपसी चिंता के मुद्दों (Issues of Mutual Concern) पर समयबद्ध सूचना साझाकरण (Timely Information Sharing) किया जाएगा। इससे जांच एजेंसियों (Investigative Agencies) को त्वरित कार्रवाई (Prompt Action) करने में सहायता मिलेगी।
इसके अलावा, यह भी तय हुआ कि दोनों देशों की संबंधित एजेंसियां अपने पहले से मौजूद कार्य संबंधों (Working Relationships) को और मजबूत करेंगी।
साइबर सुरक्षा और आव्रजन पर भी सहयोग
भारत और कनाडा ने केवल पारंपरिक सुरक्षा मुद्दों तक ही सीमित न रहते हुए साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। दोनों पक्ष साइबर सुरक्षा नीति (Cybersecurity Policy) और इससे जुड़ी सूचनाओं के औपचारिक आदान-प्रदान (Formal Information Sharing) पर सहमत हुए।
साथ ही, धोखाधड़ी (Fraud) और आव्रजन प्रवर्तन (Immigration Enforcement) से जुड़े मामलों में सहयोग पर चर्चा जारी रखने का भी निर्णय लिया गया, बशर्ते यह सहयोग दोनों देशों के घरेलू कानूनों (Domestic Laws) और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों (International Obligations) के अनुरूप हो।
राजनीतिक बदलाव से रिश्तों में सुधार
विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा में मार्क कार्नी (Mark Carney) के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की प्रक्रिया को गति मिली है। उनकी जीत के बाद दोनों पक्षों ने सुरक्षा एजेंसियों के स्तर पर संपर्क बढ़ाया और एक-दूसरे की राजधानियों में फिर से उच्चायुक्त (High Commissioners) तैनात किए।
इसी कड़ी में अजीत डोभाल की ओटावा यात्रा को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने इस दौरान कनाडा के पब्लिक सेफ्टी मंत्री (Public Safety Minister) गैरी आनंदसंगरी (Gary Anandasangaree) से भी मुलाकात की।
आगे की राह
डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के अगले महीने भारत आने की संभावित यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, यह साझा कार्ययोजना दोनों देशों के बीच टूटे भरोसे (Trust Deficit) को धीरे-धीरे बहाल करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
कुल मिलाकर, भारत और कनाडा के बीच सुरक्षा सहयोग की यह नई पहल न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को स्थिरता देगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर आतंकवाद (Terrorism), नशीली दवाओं की तस्करी, और साइबर अपराध (Cyber Crime) जैसी चुनौतियों से निपटने में भी मददगार साबित हो सकती है।
