विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 30 जनवरी को स्पष्ट किया कि भारत से निपाह वायरस के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने का जोखिम कम है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में निपाह वायरस संक्रमण के दो मामले सामने आए हैं और एशिया के कई देशों ने एहतियातन हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ा दी है। WHO ने यह भी कहा कि फिलहाल यात्रा या व्यापार पर किसी तरह की पाबंदी की जरूरत नहीं है और भारत में ऐसे प्रकोपों से निपटने की पर्याप्त क्षमता मौजूद है।
निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसका प्राकृतिक स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ माने जाते हैं। यह वायरस संक्रमित चमगादड़ों के सीधे संपर्क में आने, उनके द्वारा दूषित किए गए फलों या खाद्य पदार्थों के सेवन से इंसानों में प्रवेश कर सकता है। कुछ मामलों में संक्रमित व्यक्ति के लंबे और निकट संपर्क से भी यह फैल सकता है, लेकिन WHO के अनुसार मानव-से-मानव संक्रमण आसान नहीं है और इसके लिए लंबे समय तक संपर्क की आवश्यकता होती है।
निपाह वायरस को खतरनाक इसलिए माना जाता है क्योंकि इसकी मृत्यु दर अधिक हो सकती है और फिलहाल इसके लिए कोई लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन या विशिष्ट इलाज उपलब्ध नहीं है। इसी कारण WHO ने इसे प्राथमिकता वाले रोगजनकों (Priority Pathogen) की सूची में रखा है।
भारत में हालिया मामले और WHO का आकलन
हालिया मामलों में भारत के पश्चिम बंगाल में दो स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित पाए गए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है। WHO ने बताया कि इन मामलों के आधार पर आगे बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने के कोई संकेत नहीं हैं। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि मानव-से-मानव संक्रमण में वृद्धि के प्रमाण नहीं मिले हैं।
WHO का मानना है कि भारत के पास निगरानी, परीक्षण और संपर्क-अनुसरण (Contact Tracing) जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, जिनके जरिए ऐसे सीमित प्रकोपों को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही, WHO भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ निरंतर समन्वय में है।
एशियाई देशों में बढ़ी सतर्कता
भारत में मामलों की पुष्टि के बाद हांगकांग, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों ने हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी है। यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है, न कि किसी आसन्न वैश्विक खतरे के कारण। WHO ने दोहराया कि मौजूदा स्थिति में अंतरराष्ट्रीय यात्रा या व्यापार प्रतिबंध की आवश्यकता नहीं है।
निपाह वायरस भारत में कोई नया रोग नहीं है। देश में अब तक सात बार इसके प्रकोप दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें सबसे अधिक मामले केरल में सामने आए हैं, जिसे निपाह वायरस के लिहाज से उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। वर्ष 2018 से अब तक केरल में इस वायरस से जुड़ी कई मौतें दर्ज की गई हैं।
पश्चिम बंगाल में यह तीसरा प्रलेखित प्रकोप है। इससे पहले 2001 और 2007 में निपाह के मामले सामने आए थे, खासतौर पर वे जिले प्रभावित हुए थे जो बांग्लादेश की सीमा से सटे हैं। बांग्लादेश में लगभग हर साल निपाह वायरस के छोटे प्रकोप दर्ज होते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह वायरस क्षेत्रीय पारिस्थितिकी से जुड़ा हुआ है।
संक्रमण का स्रोत और वैज्ञानिक अनिश्चितता
WHO के अनुसार, हालिया मामलों में संक्रमण का सटीक स्रोत अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है। चूंकि यह वायरस चमगादड़ों की आबादी में प्राकृतिक रूप से मौजूद रहता है, इसलिए आगे भी सीमित स्तर पर संक्रमण की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे छोटे और स्थानीय प्रकोप सामान्य हैं और सामान्य आबादी के लिए जोखिम कम बना रहता है।
वैश्विक चिंता: उत्परिवर्तन का खतरा
निपाह वायरस को लेकर वैश्विक स्तर पर एक बड़ी चिंता यह भी है कि भविष्य में यदि इसमें आनुवंशिक परिवर्तन (Mutation) हुआ और यह अधिक आसानी से मानव-से-मानव फैलने लगा, तो यह गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन सकता है। यही कारण है कि WHO और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य संस्थाएं इस वायरस पर विशेष निगरानी रखती हैं।
भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियां
भारत ने पिछले वर्षों में निपाह और अन्य उभरते संक्रामक रोगों से निपटने के लिए अपनी रोग निगरानी प्रणाली, प्रयोगशाला क्षमता और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत किया है। केरल जैसे राज्यों में स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्यकर्मी और समुदाय स्तर पर जागरूकता ने समय रहते प्रकोप को सीमित रखने में अहम भूमिका निभाई है।
निष्कर्ष:
निपाह वायरस गंभीर और संभावित रूप से जानलेवा रोग है, लेकिन वर्तमान में भारत से इसके वैश्विक स्तर पर फैलने का खतरा कम है। WHO के आकलन के अनुसार, न तो यात्रा प्रतिबंध की आवश्यकता है और न ही घबराने की। हालांकि, यह स्थिति निरंतर सतर्कता, वैज्ञानिक निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग करती है। भविष्य में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और पारदर्शी सूचना साझा करना सबसे प्रभावी उपाय बने रहेंगे।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न
निपाह वायरस के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- निपाह वायरस का प्राकृतिक भंडार मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ हैं।
- निपाह वायरस का मानव-से-मानव संचरण अत्यंत आसान और तीव्र होता है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन ने निपाह वायरस को प्राथमिकता वाले रोगजनकों की सूची में रखा है।
उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 3
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न
निपाह वायरस को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा ‘प्राथमिकता वाला रोगजनक’ क्यों माना गया है? भारत के अनुभव के आधार पर ऐसे ज़ूनोटिक रोगों से निपटने में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
