ब्रिटेन की अदालत से भगोड़े हीरा कारोबारी Nirav Modi को बड़ा झटका लगा है। लंदन की हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने भारत प्रत्यर्पण (एक्स्ट्राडिशन) के खिलाफ अपने केस को दोबारा खोलने की मांग की थी। अदालत ने साफ कहा कि भारत सरकार की ओर से दिए गए भरोसे इतने मजबूत और स्पष्ट हैं कि किसी तरह के अत्याचार का खतरा नहीं माना जा सकता।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब नीरव मोदी पिछले कई सालों से अपने प्रत्यर्पण को टालने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन अब कोर्ट के इस फैसले के बाद उनका भारत लाया जाना और भी संभव नजर आ रहा है।
अदालत ने क्या कहा?
इस मामले की सुनवाई दो जजों की बेंच ने की, जिसमें लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस जे शामिल थे। अदालत ने कहा कि भारत सरकार ने सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच जो आश्वासन दिए हैं, वे “विस्तृत, भरोसेमंद और स्पष्ट” हैं।
कोर्ट ने यह भी माना कि ये आश्वासन इतने मजबूत हैं कि इससे किसी तरह के टॉर्चर (यातना) की आशंका खत्म हो जाती है। इसलिए नीरव मोदी की अपील को दोबारा खोलने का कोई आधार नहीं बनता।
नीरव मोदी ने क्या दलील दी थी?
नीरव मोदी की तरफ से दलील दी गई थी कि भारत में जांच एजेंसियों द्वारा पूछताछ के दौरान अत्याचार हो सकता है। इसके लिए उन्होंने एक दूसरे केस का हवाला दिया था, जिसमें अदालत ने भारत में कथित तौर पर यातना के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई थी।
लेकिन कोर्ट ने कहा कि उस केस और नीरव मोदी के केस में फर्क है। नीरव मोदी के मामले में भारत सरकार ने लिखित और स्पष्ट भरोसे दिए हैं, जो पहले के मामलों में नहीं थे।

भारत सरकार ने क्या भरोसे दिए?
इस केस का सबसे अहम मोड़ तब आया, जब भारत सरकार ने ब्रिटेन को एक आधिकारिक दस्तावेज (नोट वर्बेल) भेजा। इसमें कई अहम बातें शामिल थीं:
- नीरव मोदी से पूछताछ कुछ खास एजेंसियां नहीं करेंगी, जैसे
- Central Bureau of Investigation
- Enforcement Directorate
- उन्हें मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा जाएगा
- जेल में उन्हें जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी
- उन्हें कानूनी मदद भी उपलब्ध कराई जाएगी
इसके अलावा भारत ने यह भी कहा कि ये सभी आश्वासन कानूनन लागू होंगे और अगर उनका पालन नहीं हुआ तो अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
कोर्ट ने क्यों भरोसा किया?
अदालत ने कहा कि भारत सरकार की ओर से दिए गए ये आश्वासन किसी सामान्य बयान की तरह नहीं हैं, बल्कि बहुत ही स्पष्ट और लागू करने योग्य हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर ये आश्वासन नहीं दिए गए होते, तो शायद वह इस मामले को फिर से खोलने पर विचार करता। लेकिन अब ऐसा करने की जरूरत नहीं है।
नीरव मोदी का मामला क्या है?
नीरव मोदी पर Punjab National Bank (PNB) से जुड़े करीब 13,000 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बैंक से फर्जी तरीके से लोन लिया और पैसे विदेश भेज दिए।
इस घोटाले में उनके मामा Mehul Choksi का नाम भी सामने आया था।
घोटाला कैसे हुआ?
- यह घोटाला 2011 में मुंबई की एक बैंक शाखा से शुरू हुआ
- फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के जरिए पैसे निकाले गए
- 2018 में इस पूरे मामले का खुलासा हुआ
- शुरुआत में करीब 11,000 करोड़ का घोटाला सामने आया, बाद में और रकम जुड़ती गई
जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation के अनुसार, अकेले नीरव मोदी ने ही करीब 6,498 करोड़ रुपए की हेराफेरी की।
अभी नीरव मोदी कहां हैं?
नीरव मोदी 2019 से लंदन की Wandsworth Prison में बंद हैं। उन्हें 19 मार्च 2019 को गिरफ्तार किया गया था। तब से लेकर अब तक वे लगातार अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
पहले क्या फैसला हुआ था?
ब्रिटेन की सरकार पहले ही उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे चुकी है। 2021 में तत्कालीन गृह सचिव Priti Patel ने उनके भारत भेजे जाने का आदेश दिया था।
इसके बाद 2022 में भी अदालत ने इस फैसले को सही ठहराया था। अब 2026 में उनकी नई अपील भी खारिज हो गई है।
क्या अब भारत आना तय है?
इस फैसले के बाद नीरव मोदी के पास कानूनी विकल्प काफी कम हो गए हैं। हालांकि वे अभी भी कुछ अंतिम अपील कर सकते हैं, लेकिन उनकी राह अब पहले से ज्यादा कठिन हो गई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर आगे कोई बड़ी कानूनी बाधा नहीं आती, तो आने वाले समय में उन्हें भारत लाया जा सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
यह केस सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और कानूनी व्यवस्था से जुड़ा है। अगर नीरव मोदी को भारत लाया जाता है, तो:
- बड़े आर्थिक अपराधों पर सख्त संदेश जाएगा
- विदेश भागे अपराधियों को वापस लाने की प्रक्रिया मजबूत होगी
- बैंकिंग सिस्टम में भरोसा बढ़ेगा
निष्कर्ष:
नीरव मोदी के मामले में ब्रिटेन की अदालत का यह फैसला भारत के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि भारत के आश्वासन भरोसेमंद हैं और अब प्रत्यर्पण में कोई बड़ी रुकावट नहीं है।

