ऑपरेशन ब्लू स्टार पर पी. चिदंबरम की बड़ी टिप्पणी: कहा इस गलती की कीमत इंदिरा गांधी ने अपनी जान देकर चुकाई, वही कांग्रेस ने चिदंबरम की आलोचना की..  

शनिवार को हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुए खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव 2025 में बोलते हुए पूर्व गृह और वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 1984 के ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ को एक “गलती” बताते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। उनकी यह टिप्पणी कांग्रेस पार्टी के भीतर हलचल का कारण बन गई है।

 

उन्होंने आगे कहा कि जून 1984 का ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ सेना, पुलिस, खुफिया एजेंसियों और सिविल सेवाओं का संयुक्त निर्णय था, लेकिन यह “गलत तरीका” था। उन्होंने बताया कि बाद में सिख धर्मस्थल से सेना को बाहर रखकर ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ के जरिए स्वर्ण मंदिर को वापस पाना सही तरीका साबित हुआ। ANI के अनुसार, चिदंबरम लेखक हरिंदर बावेजा की किताब ‘They Will Shoot You, Madam’ की चर्चा के दौरान यह बातें कह रहे थे।

P. Chidambaram's big comment on Operation Blue Star

कश्मीर और पंजाब के वर्तमान स्थिति पर भी हुई चर्चा:

पुस्तक विमोचन के दौरान कश्मीर पर भी बात हुई। बावेजा ने कहा कि कश्मीरियों को पहले ही समझ आ गया था कि पाकिस्तान उनका इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन नई दिल्ली ने घाटी के लोगों के साथ विश्वास कायम करने का मौका नहीं लिया। साथ ही पंजाब की वर्तमान स्थिति के बारे में बताते हुए कहा की अब खालिस्तान की मांग लगभग खत्म हो गई है और आज की मुख्य समस्या आर्थिक स्थिति है।

 

आइये जानते है ऑपरेशन ब्लू स्टार के बारे में:

ऑपरेशन ब्लू स्टार 1 से 10 जून 1984 के बीच भारतीय सेना द्वारा चलाया गया एक बड़ा और विवादास्पद अभियान था। इसका उद्देश्य सिख उग्रवादी नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाले और उनके समर्थकों को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से बाहर निकालना था। इंटरव्यू के दौरान चिदंबरम ने इस बात पर आपत्ति भी जताई कि भिंडरावाले को गांधी ने “बनाया” था। स्वर्ण मंदिर सिख धर्म का सबसे पवित्र स्थल है, इसलिए यह कार्रवाई बहुत संवेदनशील साबित हुई।

इस अभियान का आदेश तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया था। इस ऑपरेशन में सेना ने मंदिर परिसर में घुसकर कार्रवाई की। जिसकी अगुवाई मेजर जनरल कुलदीप सिंह बरार को सौंपी गई थी। इसमें दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ और कई निर्दोष लोगों की भी जान गई। यह घटना आज भी भारत के राजनीतिक और धार्मिक इतिहास का एक बेहद संवेदनशील अध्याय मानी जाती है।

इस ऑपरेशन के दो हिस्से थे:

  1. ऑपरेशन मेटल, जिसमें मंदिर परिसर पर सीधा हमला किया गया।
  2. ऑपरेशन शॉप, जो पंजाब के ग्रामीण इलाकों में अलगाववादियों को पकड़ने के लिए चलाया गया।

 

ऑपरेशन ब्लू स्टार की पृष्ठभूमि:

सिख कट्टरपंथी नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाले चाहते थे कि भारत सरकार आनंदपुर साहिब प्रस्ताव को मान ले, जिसमें सिखों के लिए एक अलग खालिस्तान राज्य बनाने की मांग शामिल थी। 1982 तक भिंडरांवाले को काफी समर्थन मिल चुका था और उन्होंने अपने अनुयायियों और हथियारों के साथ स्वर्ण मंदिर परिसर में डेरा जमा लिया था।

सेना के लिए यह बहुत कठिन स्थिति थी, क्योंकि उन्हें सशस्त्र उग्रवादियों से मंदिर को मुक्त कराना था, लेकिन साथ ही उसकी पवित्रता को भी बनाए रखना था। करीब एक साल तक बातचीत और विचार-विमर्श के बाद, इंदिरा गांधी ने फैसला किया कि अब केवल सैन्य कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प बचा है।

इस निर्णय के बाद ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया। इस अभियान के दौरान जरनैल सिंह भिंडरांवाले की मौत 6 जून 1984 को हो गई।

 

ऑपरेशन ब्लू स्टार टाइमलाइन:

  • 1-3 जून 1984: सेना ने स्वर्ण मंदिर के चारों ओर घेराबंदी की, गोलीबारी शुरू हुई।
  • 3-6 जून 1984: सेना ने टैंकों और तोपों से बड़ा हमला किया, मंदिर परिसर को भारी नुकसान पहुँचा।
  • 6 जून 1984: भिंडरांवाले की मौत, ऑपरेशन समाप्त हुआ।

 

ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद:

ऑपरेशन ब्लू स्टार के कुछ महीनों बाद, 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद देशभर में, खासकर दिल्ली में, भयंकर सिख विरोधी दंगे भड़क उठे, जिनमें हजारों निर्दोष(करीब 3,000) लोगों की जान चली गई। यह भारत के इतिहास की सबसे दुखद और संवेदनशील घटनाओं में से एक मानी जाती है।

 

ऑपरेशन ब्लैक थंडर से बहाल हुई शांति व्यवस्था:

मई 1986 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन ब्लैक थंडर चलाया ताकि स्वर्ण मंदिर पर कब्जा किए हुए आतंकवादियों को हटाया जा सके। यह अभियान दो दिन चला, जिसमें 80 से ज्यादा आतंकवादी और 12 सैनिक मारे गए।

हालांकि यह कार्रवाई भी विवादास्पद थी क्योंकि यह पवित्र स्थल पर हुई और कुछ नागरिक भी घायल हुए। फिर भी, यह ऑपरेशन भारत सरकार के लिए सफल रहा और इससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बहाल हुई तथा खालिस्तान आंदोलन कमजोर हुआ।

 

खालिस्तान आंदोलन के बारे में:

खालिस्तान आंदोलन एक अलगाववादी आंदोलन है। इसका उद्देश्य पंजाब क्षेत्र में “खालिस्तान” नामक एक अलग सिख राज्य बनाना है। खालिस्तान का मतलब है “खालसा की भूमि”। इस आंदोलन में सिखों के लिए एक अलग मातृभूमि की मांग की जाती है।

इसकी प्रस्तावित सीमाएँ अलग-अलग समूहों के अनुसार बदलती हैं। कुछ लोग सिर्फ भारतीय पंजाब को खालिस्तान का हिस्सा मानते हैं, जबकि कुछ लोग इसमें पाकिस्तान का पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश भी शामिल करना चाहते हैं। बब्बर खालसा और खालिस्तान कमांडो फोर्स जैसे समूह सशस्त्र उग्र गतिविधियों में शामिल थे।

 

खालिस्तान आंदोलन का इतिहास:

  • शुरुआत: अलग सिख राज्य की मांग 1930 के दशक में शुरू हुई, जब भारत में ब्रिटिश शासन खत्म होने वाला था।
  • पहला आह्वान: 1940 में “खालिस्तान” नामक एक पुस्तिका में पहली बार स्पष्ट रूप से खालिस्तान बनाने की बात की गई। उसी दशक में ‘सिखिस्तान’ नामक सिख देश की मांग भी उठी।
  • विकास: सिख प्रवासियों से मिलने वाले वित्तीय और राजनीतिक समर्थन की वजह से यह आंदोलन पंजाब में फला-फूला। यह 1970 और 1980 के दशकों तक जारी रहा और 1980 के अंत में अपने चरम पर पहुंचा।
  • राजनीतिक समर्थन: सिख नेता जगजीत सिंह चौहान ने बताया कि उन्होंने पाकिस्तान के जुल्फिकार अली भुट्टो से बातचीत में खालिस्तान आंदोलन के लिए समर्थन लिया।
  • उग्रवाद की शुरुआत: पंजाब में उग्रवाद 1978 के सिख-निरंकारी संघर्ष के बाद 1980 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ।
  • हत्याएँ और हिंसा: 1986 में खालिस्तान कमांडो फोर्स ने जनरल अरुण वैद्य की हत्या की जिम्मेदारी ली। 1990 के दशक के मध्य तक उग्रवाद लगभग खत्म हो गया, जिसमें अंतिम बड़ी घटना मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या थी।

 

कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया: 

पी. चिदंबरम की टिप्पणी पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने उन पर भाजपा की सोच दोहराने का आरोप लगाया और कहा कि शायद उन पर कोई दबाव है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार सही था या गलत, यह बहस का विषय है, लेकिन 50 साल बाद कांग्रेस पर निशाना साधना ठीक नहीं है।

कांग्रेस के एक अन्य सूत्र ने भी कहा कि एक वरिष्ठ नेता को जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए और बार-बार ऐसे बयान देकर पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।

 

पी चिदंबरम के बयान का भाजपा ने किया समर्थन:

भाजपा ने पी. चिदंबरम की ताज़ा टिप्पणी का समर्थन किया। पार्टी प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने एक्स पर लिखा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार को टाला जा सकता था और ऑपरेशन ब्लैक थंडर जैसा रणनीतिक तरीका अपनाकर श्री हरमंदिर साहिब की पवित्रता को नुकसान पहुंचाए बिना काम पूरा किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि चिदंबरम ने बिल्कुल सही बात कही है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चिदंबरम का यह कबूलनामा “बहुत देर से” आया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2023 में संसद में ऑपरेशन ब्लू स्टार को “अकाल तख्त पर हमला” बताया था।

 

चिदंबरम ने कई मुद्दों पर कांग्रेस के रुख़ का किया है विरोध:

चिदंबरम का पार्टी की सोच से अलग रुख़ अपनाना नया नहीं है। पिछले कुछ सालों में उन्होंने कई मुद्दों—जैसे आर्थिक सुधार, आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद—पर कांग्रेस के विचारों का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। उन्होंने यह भी कहा था कि 26/11 मुंबई हमलों के बाद UPA सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण पाकिस्तान पर कार्रवाई नहीं की।

 

चरणजीत सिंह चन्नी ने भी ऑपरेशन ब्लू स्टार को गलत बताया था:

कांग्रेस में बहुत कम नेताओं ने अब तक ऑपरेशन ब्लू स्टार पर खुलकर सवाल उठाए हैं। करीब एक साल पहले पंजाब के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इसे दरबार साहिब पर “हमला” बताया था और कहा था कि यह कार्रवाई “गलत” थी। हालांकि, किसी भी केंद्रीय कांग्रेस नेता ने न उनका समर्थन किया और न ही विरोध। पार्टी ने अब तक इस ऑपरेशन के लिए औपचारिक रूप से माफ़ी भी नहीं मांगी है।

 

निष्कर्ष:

पी. चिदंबरम का बयान 1984 के ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ पर नई दृष्टि पेश करता है और दर्शाता है कि संवेदनशील घटनाओं पर संतुलित और रणनीतिक निर्णय लेना कितना महत्वपूर्ण है, जैसा बाद में ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ में किया गया।

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