पाकिस्तान-अफगानिस्तान में शुरू हुआ युद्ध, तालिबान का 55 सैनिक और जेट गिराने का दावा, पाकिस्तान ने शुरू किया ऑपरेशन ‘गजब लिल हक’

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर खुली सैन्य कार्रवाई तक पहुंच गया है। गुरुवार देर रात अफगानिस्तान की ओर से पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में हमला किया गया। अफगान मीडिया और तालिबान सरकार के प्रवक्ताओं ने दावा किया कि इस कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

 

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद के मुताबिक यह हमला 22 फरवरी को अफगानिस्तान के अंदर पाकिस्तान की ओर से की गई एयरस्ट्राइक के जवाब में किया गया। अफगान पक्ष का कहना है कि उनके पास 23 पाकिस्तानी सैनिकों के शव हैं और कई अन्य को जिंदा पकड़ा गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान के एक सैन्य मुख्यालय और 19 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया।

 

जेट गिराने का दावा, लेकिन पुष्टि नहीं

अफगान मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि अफगान सुरक्षा बलों ने एक पाकिस्तानी फाइटर जेट को मार गिराया। टोलो न्यूज और अमू रेडियो ने सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया कि एक पाकिस्तानी सैन्य विमान ने अफगान हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया था, जिसके बाद उसे निशाना बनाया गया।

 

सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसे उसी जेट से जोड़ा जा रहा है। लेकिन अभी तक उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं X के AI असिस्टेंट ग्रोक ने वायरल वीडियो को फर्जी बताया है।

Pakistan Afghanistan conflict 2026

पाकिस्तान का ‘ऑपरेशन गजब लिल हक’

अफगान हमले के बाद पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई की। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक सरकार ने ‘ऑपरेशन गजब लिल हक’ शुरू किया है। पाकिस्तान की वायुसेना ने काबुल, नंगरहार समेत कई इलाकों में एयरस्ट्राइक की।

 

पाकिस्तान का दावा है कि अब तक 133 अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए और 200 से ज्यादा घायल हुए हैं। 27 तालिबान चौकियां तबाह कर दी गईं और 9 पर कब्जा कर लिया गया।

 

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि “अब हमारे सब्र की सीमा खत्म हो चुकी है। यह खुला युद्ध है।” उन्होंने भारत पर भी आरोप लगाया कि नई दिल्ली और काबुल मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ ‘प्रॉक्सी वॉर’ चला रहे हैं। हालांकि उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।

 

दोनों देशों के अलग-अलग दावे

हमले के बाद हताहतों की संख्या को लेकर दोनों देशों के दावे अलग हैं। अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के हमलों में उनके 8 लोग मारे गए और 11 घायल हुए। उनका दावा है कि चार घंटे तक चली लड़ाई के बाद आधी रात को संघर्ष रुका।

 

वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मुशर्रफ अली जैदी ने 133 तालिबान लड़ाकों के मारे जाने की बात कही। दोनों पक्षों के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

 

सीमा पर अब भी जारी झड़पें

नंगरहार, नूरिस्तान, कुनार, खोस्त, पक्तिया और पक्तिका जैसे सीमावर्ती इलाकों में तनाव बना हुआ है। ये इलाके डूरंड लाइन के पास स्थित हैं, जो दोनों देशों के बीच विवाद की मुख्य रेखा है।

 

पाकिस्तान का कहना है कि 22 फरवरी को की गई एयरस्ट्राइक तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट से जुड़े ठिकानों पर थी। पाकिस्तानी सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा था कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई और जरूरत पड़ी तो आगे भी ऐसे ऑपरेशन किए जाएंगे।

 

नागरिकों पर असर

अफगानिस्तान का आरोप है कि पाकिस्तानी हमलों में आम नागरिक मारे गए। टोलो न्यूज के मुताबिक नंगरहार में एक घर पर हमले के बाद एक ही परिवार के 23 लोग मलबे में दब गए थे।

 

हमले के बाद अफगान सैनिक नंगरहार के बेहसूद जिले में उन परिवारों से मिले, जिनके सदस्य मारे गए थे। सैनिकों ने संवेदना जताई और कहा कि काउंटर-ऑपरेशन के जरिए जवाब दिया गया है।

 

तनाव के इस दौर में सीमा के दोनों ओर रहने वाले आम लोगों में डर और अनिश्चितता बढ़ गई है। दोनों देशों के दावों और जवाबी दावों के बीच सच्चाई की पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं है।

 

पाकिस्तान का आरोप: तालिबान के बाद बढ़े हमले

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान में आतंकी हमलों में बढ़ोतरी हुई है। मंत्रालय के मुताबिक पिछले 12 से 18 महीनों में हमलों की संख्या और तेज हुई है।

 

इस्लामाबाद लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि TTP अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले कर रहा है। तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।

 

हाल के बड़े हमले

22 फरवरी को अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक से कुछ घंटे पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में सुरक्षा काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें दो सैनिक, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी शामिल थे, मारे गए।

 

16 फरवरी को बाजौर में विस्फोटकों से भरी गाड़ी सुरक्षा चौकी से टकराई, जिसमें 11 सैनिक और एक बच्चे की मौत हुई।

 

6 फरवरी को इस्लामाबाद में जुमे की नमाज के दौरान एक शिया मस्जिद में आत्मघाती हमला हुआ। पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार इस हमले में 31 लोगों की मौत और 169 घायल हुए। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी।

 

अक्टूबर से बढ़ा तनाव

अक्टूबर में सीमा पर हुई झड़पों में दोनों ओर सैनिकों और नागरिकों की मौत के बाद तनाव और बढ़ गया। 19 अक्टूबर को कतर की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ, लेकिन इस्तांबुल में हुई वार्ता किसी औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंची।

 

9 अक्टूबर को काबुल में TTP के ठिकानों पर हवाई हमले हुए थे। तालिबान ने इन्हें पाकिस्तान की कार्रवाई बताया, जबकि पाकिस्तान ने सीधी जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन चेतावनी दी थी कि अफगान जमीन से TTP को पनाह न दी जाए।

 

ईरान की मध्यस्थता की पेशकश

तनाव बढ़ने के बीच ईरान ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में दोनों देशों को संवाद के जरिए मतभेद सुलझाने चाहिए। तेहरान ने बातचीत में मदद की पेशकश भी की है।

 

132 साल पुराना डूरंड लाइन विवाद

दोनों देशों के बीच 2,611 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसे डूरंड लाइन कहा जाता है। यह समझौता 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच हुआ था। इस रेखा ने पख्तून समुदाय को दो हिस्सों में बांट दिया।

 

अफगानिस्तान ने कभी इस सीमा को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया। तालिबान का कहना है कि यह समझौता अब खत्म माना जाना चाहिए। यही कारण है कि सीमा पर अक्सर झड़पें होती रहती हैं।

 

आरोपों की राजनीति

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत पर भी गंभीर आरोप लगाए कि नई दिल्ली और काबुल मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत काबुल के साथ मिलकर पाकिस्तान को अस्थिर कर रहा है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

 

आगे क्या?

दोनों देशों के बीच अविश्वास गहरा है। पाकिस्तान सुरक्षा चिंताओं का हवाला देता है, जबकि अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता के उल्लंघन की बात करता है। सीमा पर छोटे-छोटे टकराव बड़े संघर्ष में बदल सकते हैं।

 

ईरान की मध्यस्थता और क्षेत्रीय प्रयास शायद तनाव कम कर सकें, लेकिन जब तक डूरंड लाइन, TTP और आपसी आरोपों का समाधान नहीं निकलता, तब तक हालात अस्थिर बने रह सकते हैं।

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