पाकिस्तान की ड्रोन घुसपैठ फिर तेज़: कश्मीर सीमा पर बढ़ती चुनौती और इसके रणनीतिक कारण

संदर्भ :

लगभग आठ महीने पहले ऑपरेशन सिंदूर में करारी सैन्य कार्रवाई झेलने के बाद अब पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर ड्रोन उकसावे सामने आ रहे हैं। 9 जनवरी 2026 से जम्मू-कश्मीर के विभिन्न सीमा क्षेत्रों में लगातार पाकिस्तानी ड्रोन देखे जा रहे हैं। इसके बाद भारत ने औपचारिक रूप से इस्लामाबाद से इन घुसपैठों को रोकने को कहा, लेकिन इसके बावजूद ड्रोन गतिविधियाँ जारी रहीं।


गौरतलब है कि ये घटनाएँ आर्मी डे (15 जनवरी) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय अवसरों से पहले सामने आई हैं, जिससे इनकी गंभीरता और बढ़ जाती है।

Pakistan drone intrusions on the rise again

ड्रोन कैसे हैं और क्या नहीं हैं?

सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी के अनुसार, हाल में देखे गए ड्रोन आत्मघाती (कामीकाज़े) श्रेणी के नहीं हैं। ये ड्रोन आकार में बहुत छोटे हैं, कम ऊँचाई पर उड़ते हैं और कई बार लाइट जलाकर उड़ते हुए देखे गए हैं।


यह संकेत देता है कि इनका तत्काल हमला करने का उद्देश्य नहीं, बल्कि निगरानी, टोही और परीक्षण अधिक हो सकता है।

 

मई 2025 की झड़पों के दौरान पाकिस्तान ने कामीकाज़े ड्रोन का इस्तेमाल किया था, जिनका उद्देश्य सीधे लक्ष्य पर हमला करना होता है। मौजूदा ड्रोन उससे अलग प्रकृति के हैं।

 

किन-किन इलाकों में ड्रोन दिखे?

9 जनवरी से अब तक पाकिस्तान की ओर से 10–12 ड्रोन भारत की सीमा में भेजे जा चुके हैं। इनमें शामिल क्षेत्र हैं-

  • पुंछ
  • रामगढ़ सेक्टर, सांबा
  • नौशेरा
  • राजौरी
  • जैसलमेर

 

एक गंभीर घटना में सांबा जिले में एक ड्रोन द्वारा दो पिस्तौल, तीन मैगज़ीन, 16 गोलियाँ और एक ग्रेनेड गिराए जाने का संदेह है, जिन्हें सुरक्षा बलों ने बरामद किया।

 

भारत की प्रतिक्रिया और सुरक्षा तंत्र

इन घटनाओं के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने तुरंत एंटी-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (Anti-UAS) सक्रिय कर दिए। कई जगहों पर ड्रोन पर फायरिंग की गई और चौकसी बढ़ा दी गई।


विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है।

 

भारत का रुख स्पष्ट है-सीमा पार से किसी भी प्रकार की घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाएगा।

 

पाकिस्तान ड्रोन क्यों भेज रहा है? मुख्य कारण

  1. भारतीय रक्षा व्यवस्था की परीक्षा

 

विश्लेषकों के अनुसार, इन ड्रोन घुसपैठों का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत की वायु-निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता को परखना है।

  • ड्रोन कहाँ तक पकड़ में आते हैं?
  • प्रतिक्रिया में कितना समय लगता है?
  • किन इलाकों में निगरानी कमजोर है?

इन सवालों के जवाब जुटाने की कोशिश की जा रही है।

 

  1. कठिन भू-भाग का फायदा उठाना

LoC के आसपास का इलाका पहाड़ी, जंगलों से भरा और कई जगहों पर तकनीकी निगरानी के लिए चुनौतीपूर्ण है।
छोटे ड्रोन इन क्षेत्रों में आसानी से उड़ सकते हैं और न्यूनतम जोखिम के साथ जानकारी जुटा सकते हैं

 

  1. हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी

पिछले वर्षों में ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद और मादक पदार्थ गिराने की कई घटनाएँ सामने आई हैं।
सांबा की घटना इस पैटर्न की पुष्टि करती है। यह आतंकवादी नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने की कोशिश हो सकती है।

 

  1. मनोवैज्ञानिक दबाव और उकसावा

राष्ट्रीय पर्वों से पहले ड्रोन भेजना एक मनोवैज्ञानिक रणनीति भी हो सकती है-

  • सुरक्षा बलों पर दबाव
  • स्थानीय आबादी में डर
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव का संकेत

 

  1. आंतरिक संकट से ध्यान हटाना

पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में सीमा पर तनाव बढ़ाकर आंतरिक असंतोष से ध्यान हटाना उसकी पुरानी रणनीति रही है।

 

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदला परिदृश्य

ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद सीधे सैन्य टकराव से बचते हुए वह अब कम-तीव्रता वाले साधनों-जैसे ड्रोन-का इस्तेमाल कर रहा है।
यह रणनीति उसे इनकार की गुंजाइश (plausible deniability) भी देती है।

 

भारत के लिए सुरक्षा चुनौतियाँ

ड्रोन तकनीक सस्ती, सुलभ और प्रभावी होती जा रही है। इससे सीमावर्ती सुरक्षा के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हो रही हैं-

  • हर ड्रोन को पहचानना आसान नहीं
  • छोटे ड्रोन रडार से बच सकते हैं
  • एक साथ कई ड्रोन भेजे जा सकते हैं

इसलिए भारत को तकनीकी, खुफिया और कूटनीतिक-तीनों स्तरों पर तैयारी करनी होगी।

 

आगे की राह

भारत पहले ही ड्रोन रोधी तकनीक, लेज़र सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और बेहतर रडार नेटवर्क पर काम कर रहा है।
इसके साथ-साथ सीमा प्रबंधन, स्थानीय खुफिया तंत्र और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की गतिविधियों को उजागर करना भी आवश्यक है।

 

निष्कर्ष :

पाकिस्तान की हालिया ड्रोन घुसपैठ कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य भारत की सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा लेना, हथियार तस्करी को बढ़ावा देना और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना है।
हालाँकि, भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि देश इन नई चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्क और तैयार है। आने वाले समय में ड्रोन युद्ध और सीमा सुरक्षा भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में और ऊपर आएँगे।

 

UPSC प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न

प्रश्न :
पाकिस्तान द्वारा भारत में हालिया ड्रोन घुसपैठ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. हाल में देखे गए सभी ड्रोन आत्मघाती (कामीकाज़े) श्रेणी के थे।
  2. ड्रोन के माध्यम से हथियार गिराए जाने की घटनाएँ सामने आई हैं।
  3. ड्रोन घुसपैठ मुख्यतः अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा के आसपास हुई है।

सही कथनों का चयन कीजिए:
(a) केवल 2 और 3
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

 

UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न (सामान्य अध्ययन – III / आंतरिक सुरक्षा)

प्रश्न :
सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन घुसपैठ भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरी है। पाकिस्तान द्वारा ड्रोन के बढ़ते उपयोग के उद्देश्यों का विश्लेषण करते हुए भारत के लिए इससे निपटने की रणनीति पर चर्चा कीजिए।