Pakistan Protest Violence: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) एक बार फिर बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का केंद्र बन गया है। जम्मू कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने दावा किया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान की सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने अभी तक घायल लोगों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही इस घटना पर कोई विस्तृत बयान जारी किया है।
यह विरोध प्रदर्शन केवल एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि पिछले कई महीनों से चल रहे राजनीतिक विवाद, प्रशासनिक फैसलों, नेताओं की गिरफ्तारी और बुनियादी अधिकारों की मांग से जुड़ा हुआ है। हालिया घटनाओं ने PoJK में पहले से मौजूद असंतोष को और बढ़ा दिया है।

क्या हुआ था प्रदर्शन के दौरान
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, JAAC ने बताया कि करीब 40 हजार लोग अब्बासपुर स्थित सरदार गुलाम हुसैन खान स्पोर्ट्स स्टेडियम में एकत्र हुए थे। इसके बाद प्रदर्शनकारी डुडियाल के AMB क्षेत्र की ओर बढ़े, जहां संगठन का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी कर दी।

JAAC के मुताबिक कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि अब तक पाकिस्तान प्रशासन ने न तो घायल लोगों की संख्या बताई है और न ही गोलीबारी के आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।
संगठन का कहना है कि यह आंदोलन इस्लामाबाद सरकार के खिलाफ जारी अभियान का हिस्सा है, जिसमें उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी, प्रशासनिक विफलताओं तथा नागरिकों के मूल अधिकारों की मांग प्रमुख मुद्दे हैं। JAAC ने गिरफ्तार सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग दोहराई है।
आंदोलन लगातार क्यों फैलता जा रहा है
JAAC का दावा है कि PoJK के कई इलाकों से लोगों के काफिले लगातार प्रदर्शन स्थलों पर पहुंच रहे हैं। आंदोलन में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की भी बड़ी भागीदारी देखी जा रही है।
संगठन के अनुसार रावलकोट और चाक क्षेत्र की महिलाएं भी आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं। JAAC का कहना है कि प्रशासनिक दबाव के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
संगठन ने विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय से भी समर्थन मांगा है। इसी अपील पर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में कश्मीरी समुदाय ने प्रदर्शन कर JAAC के कोर कमेटी सदस्य शौकत नवाज मीर की रिहाई की मांग की।
सोशल मीडिया पर “Release Shaukat Mir” अभियान भी चलाया गया, जिसमें “Long Live Kashmir” और “Long Live the People” जैसे नारे लगाए गए।
JAAC क्या है और इसकी शुरुआत कैसे हुई
जम्मू कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का गठन वर्ष 2023 में हुआ था। संगठन की स्थापना उस समय की गई जब पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में संपत्ति कर (Property Tax) लगाए जाने के फैसले का विरोध शुरू हुआ।
संगठन के अध्यक्ष शौकत नवाज मीर हैं। पिछले कुछ वर्षों में JAAC ने महंगाई, बिजली दरों, गेहूं सब्सिडी, कर व्यवस्था और नागरिक अधिकारों जैसे मुद्दों पर कई बड़े आंदोलन किए हैं।
मई 2024 में भी संगठन ने गेहूं सब्सिडी को लेकर बड़ा आंदोलन चलाया था। उस समय व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन को कई मांगें स्वीकार करनी पड़ी थीं और लगभग 23 अरब पाकिस्तानी रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की गई थी।

पांच लाख लोगों को जोड़ने का लक्ष्य
JAAC ने अपने मौजूदा आंदोलन को और बड़ा बनाने का लक्ष्य रखा है। संगठन ने सोशल मीडिया पर PoJK के दस जिलों की अनुमानित आबादी साझा करते हुए कहा है कि यदि प्रत्येक जिले से लगभग 50 हजार लोग आंदोलन में शामिल होते हैं तो कुल भागीदारी पांच लाख तक पहुंच सकती है।
संगठन ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने, सफेद झंडे लेकर आने और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है। JAAC का कहना है कि उसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देना है कि आंदोलन केवल बुनियादी अधिकारों की मांग के लिए है।
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर क्या है
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) वह क्षेत्र है जिस पर 1947 से पाकिस्तान का कब्जा है। इसकी सीमाएं पाकिस्तान के पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों से लगती हैं तथा भारत और पाकिस्तान की सेनाएं यहां नियंत्रण रेखा (LoC) पर आमने-सामने तैनात रहती हैं।
PoJK की राजधानी मुजफ्फराबाद है। यहां एक स्थानीय सरकार और विधानसभा मौजूद है, लेकिन प्रशासनिक और राजनीतिक नियंत्रण काफी हद तक पाकिस्तान की संघीय सरकार के हाथों में माना जाता है। पाकिस्तान ने इसके लिए अलग से “कश्मीर अफेयर्स एंड गिलगित-बाल्टिस्तान” मंत्रालय भी बनाया हुआ है।
पाकिस्तान में पीओके (PoK) को क्या कहा जाता है?
भारत जिसे ‘पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर’ (PoK) कहता है, पाकिस्तान उसे आधिकारिक तौर पर इस नाम से नहीं बुलाता। पाकिस्तान ने दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए इसे “आज़ाद जम्मू-ओ-कश्मीर” (AJK – Azad Jammu and Kashmir) का नाम दिया है। पाकिस्तान का दावा है कि यह एक स्वतंत्र क्षेत्र है, जिसका अपना एक अलग संविधान, अपना झंडा, अपना राष्ट्रपति और अपना प्रधानमंत्री है। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इस पूरे क्षेत्र का असली नियंत्रण इस्लामाबाद (पाकिस्तान सरकार) के पास होता है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली ‘कश्मीर काउंसिल’ ही पर्दे के पीछे से यहां के सारे बड़े फैसले लेती है और स्थानीय सरकार सिर्फ एक मुखौटा बनकर रह जाती है

पाकिस्तान ने इस क्षेत्र को दो भागों में कैसे बांटा है?
ऐतिहासिक और कानूनी रूप से (1947 के विलय पत्र के अनुसार) यह पूरा इलाका एक ही रियासत का हिस्सा था, जिसे भारत अपना अभिन्न अंग मानता है। लेकिन पाकिस्तान ने प्रशासनिक और कूटनीतिक चाल चलते हुए इस पूरे कब्जे वाले क्षेत्र को दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित (Divide) कर दिया है:
पहला भाग (AJK): इसे पाकिस्तान ‘आज़ाद कश्मीर’ कहता है। यह मुख्य रूप से मुजफ्फराबाद, मीरपुर और पुंछ वाला संकरा इलाका है, जिसकी सीमा भारत के जम्मू-कश्मीर से लगती है।
दूसरा भाग (गिलगित-बाल्टिस्तान – GB): पाकिस्तान ने बड़ी चालाकी से इस विशाल और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तरी इलाके को ‘आज़ाद कश्मीर’ से बिल्कुल अलग कर दिया। पहले इसे ‘उत्तरी क्षेत्र’ (Northern Areas) कहा जाता था, लेकिन अब पाकिस्तान इसे अपना 5वां ‘अस्थाई प्रांत’ बनाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के प्रशासन में ये दोनों क्षेत्र एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं।

इन दोनों क्षेत्रों की अपनी अलग-अलग विधानसभाएँ व सरकारें हैं। पीओके (AJK) की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं (जिनमें 45 पर जनता सीधे वोट डालती है और 8 आरक्षित हैं), जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान (GB) की अपनी अलग विधानसभा है जिसमें कुल 33 सीटें हैं (जिनमें 24 पर सीधे चुनाव होते हैं और 9 सीटें महिलाओं व विशेषज्ञों के लिए आरक्षित हैं)। इस प्रकार, पाकिस्तान ने इन दोनों इलाकों को एक-दूसरे से बिल्कुल अलग व्यवस्था के तहत रखा हुआ है और दोनों के चुनाव भी अलग-अलग होते हैं।
जून में भी हुई थी बड़ी हिंसा
यह पहली बार नहीं है जब PoJK में हालात इतने तनावपूर्ण हुए हों। 8 जून को भी JAAC और प्रशासन के बीच टकराव हिंसक हो गया था।
रॉयटर्स के अनुसार उस हिंसा में 30 लोगों की मौत हुई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। मृतकों में चार पुलिसकर्मी भी शामिल थे, जबकि 23 सुरक्षा कर्मी और करीब 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। पुलिस ने इस मामले में लगभग 30 लोगों को गिरफ्तार भी किया था।
उस समय विवाद PoJK विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर था। ये सीटें जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में गए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। JAAC इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहा है।
JAAC पर प्रतिबंध के बाद बढ़ा तनाव
पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को आतंकवाद निरोधक कानूनों के तहत JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता गया।
रविवार को संगठन के कार्यकर्ता एक मृत सदस्य के शव को लेकर अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। JAAC का आरोप है कि उस सदस्य की मौत पहले हुई पुलिस फायरिंग में हुई थी।
जब पुलिस प्रदर्शन समाप्त कराने पहुंची तो दोनों पक्षों के बीच झड़प शुरू हो गई। इसके बाद हिंसा फैल गई।
रावलकोट के आयुक्त सरदार वहीद खान ने रॉयटर्स से कहा कि प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में चार पुलिसकर्मी और एक राहगीर की मौत हुई, जबकि जवाबी कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए।
दूसरी ओर पाकिस्तान के अखबार डॉन के अनुसार पुलिस का दावा है कि JAAC से जुड़े लोगों ने शॉटगन और अन्य हथियारों से सुरक्षा बलों पर हमला किया। प्रशासन ने इस घटना को आतंकवादी कार्रवाई बताते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा।
भारत ने क्या कहा
भारत ने पाकिस्तान पर PoJK से जुड़ी घटनाओं को लेकर दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान लगातार फर्जी खबरें और भ्रामक वीडियो प्रसारित कर रहा है ताकि अपने आंतरिक हालात और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाया जा सके।
उन्होंने कहा कि PoJK से आ रही रिपोर्टों में पुलिस कार्रवाई के दौरान कई लोगों के मारे जाने और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में पाकिस्तान की जवाबदेही तय करने की भी बात कही है।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
PoJK में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। यहां कुल 53 सीटों वाली विधानसभा है, जिनमें 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है, जबकि शेष सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं।
2021 के चुनाव में इमरान खान की पार्टी PTI ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। बाद के वर्षों में पाकिस्तान की राष्ट्रीय राजनीति में बदलाव का असर PoJK पर भी पड़ा।
पहले सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी मुख्यमंत्री बने, बाद में उनकी जगह सरदार तनवीर इलियास ने ली, लेकिन 2023 में उन्हें अदालत ने अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद चौधरी अनवारुल हक सत्ता में आए, जिन्हें 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के बाद हटाया गया। वर्तमान में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर प्रधानमंत्री हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले बढ़ता राजनीतिक तनाव, JAAC का आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई आने वाले दिनों में PoJK की राजनीति को और अधिक प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष
Pakistan Protest Violence का ताजा घटनाक्रम केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि PoJK में लंबे समय से चल रहे राजनीतिक असंतोष, प्रशासनिक फैसलों और प्रतिनिधित्व से जुड़े विवादों का परिणाम माना जा रहा है। एक ओर JAAC इसे नागरिक अधिकारों का आंदोलन बता रहा है, वहीं पाकिस्तान प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा मामला मान रहा है। चुनाव नजदीक आने के बीच यह टकराव क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति और अधिक संवेदनशील बना सकता है।

