प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘सेवा तीर्थ’ से संभालेंगे कामकाज, जानिए क्या है कारण?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा तीर्थ परिसर से आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कर्तव्य भवन 1 और 2 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने एक विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया। इससे पहले वे ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन कर चुके थे। यह कार्यक्रम देश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक नए बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

 

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद देश के कई बड़े फैसले साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक में लिए गए, लेकिन ये इमारतें अंग्रेजों के समय में बनी थीं। उनका उद्देश्य भारत पर लंबे समय तक शासन करना था। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय कोलकाता देश की राजधानी हुआ करता था। वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के बाद वहां अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन तेज हो गया था। इसी कारण 1911 में ब्रिटिश सरकार ने राजधानी को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया। इसके बाद नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक जैसी इमारतों का निर्माण अंग्रेजी सोच के अनुसार किया गया।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि रायसीना हिल्स पर इन भवनों को इसलिए बनाया गया ताकि वे बाकी इमारतों से ऊंचे दिखें। इसके विपरीत सेवा तीर्थ परिसर जमीन से जुड़ा हुआ है और यह जनता से नजदीकी का प्रतीक है। अब इसी नए परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय काम करेंगे। आज से PMO साउथ ब्लॉक से यहां स्थानांतरित हो गया है।

 

उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ की पट्टिका का अनावरण किया। परिसर की दीवार पर देवनागरी में ‘सेवा तीर्थ’ लिखा गया है और उसके नीचे ‘नागरिक देवो भव’ का संदेश अंकित है, जिसका अर्थ है कि नागरिक भगवान के समान हैं। उन्होंने नए कार्यालय में भगवान गणेश की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया और सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि सेवा तीर्थ कर्तव्य, करुणा और ‘भारत सर्वोपरि’ की भावना का प्रतीक है।

 

यह ब्रिटिश काल की पुरानी सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग में अंतिम कैबिनेट बैठक भी रही। प्रधानमंत्री का कार्यालय वर्ष 1947 से साउथ ब्लॉक में स्थित था और लगभग 78 वर्षों तक वही देश की सत्ता का केंद्र रहा। वर्ष 2014 के बाद से सरकार ने औपनिवेशिक प्रतीकों से दूरी बनाने के कई कदम उठाए हैं।

 

नए परिसर में प्रधानमंत्री ने महिलाओं, युवाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की फाइलों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देने का निर्णय लिया गया है। लखपति दीदी योजना का लक्ष्य भी 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ किया गया है। इसके अलावा कृषि अवसंरचना कोष को 1 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये किया गया और 10,000 करोड़ रुपये के स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी दी गई।

78 साल पुरानी व्यवस्था में बदलाव

अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और कई अहम मंत्रालय नई दिल्ली के रायसीना हिल्स स्थित नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से संचालित होते रहे हैं। करीब 78 वर्षों से ये इमारतें देश की सत्ता का केंद्र रही हैं। आजादी के बाद से यहीं से प्रशासनिक फैसले लिए जाते रहे।

 

अब सरकार इन ऐतिहासिक इमारतों से नए आधुनिक परिसर में शिफ्ट हो रही है। यह बदलाव सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसके तहत कई नई इमारतें बनाई गई हैं और पुराने ढांचे को नए रूप में विकसित किया जा रहा है।

 

₹1189 करोड़ की लागत से बना ‘सेवा तीर्थ’

प्रधानमंत्री का नया कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ नाम से जाना जाएगा। पहले इसका नाम ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ रखा गया था, लेकिन 2 दिसंबर 2025 को इसका नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया गया। सेवा तीर्थ का अर्थ है – सेवा का स्थान।

 

यह परिसर नई दिल्ली में दारा शिकोह रोड पर स्थित है। लगभग 2.26 लाख वर्ग फीट (करीब 5 एकड़) क्षेत्र में फैले इस कॉम्पलेक्स का निर्माण एल एंड टी कंपनी ने ₹1189 करोड़ की लागत से किया है।

 

सेवा तीर्थ कॉम्पलेक्स में तीन इमारतें हैं:

  • सेवा तीर्थ-1
  • सेवा तीर्थ-2
  • सेवा तीर्थ-3

सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय स्थित है। सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय है, जबकि सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यालय है। ये सभी विभाग पहले अलग-अलग स्थानों पर कार्यरत थे। कैबिनेट सचिवालय सितंबर 2025 में ही सेवा तीर्थ-2 में स्थानांतरित हो चुका है।

 

प्रधानमंत्री का नया आवास भी इसी परिसर के पास बन रहा है। इसके तैयार होने के बाद वे 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित मौजूदा आवास से नए घर में शिफ्ट होंगे, हालांकि इसकी तारीख अभी तय नहीं है।

 

कर्तव्य भवन-1 और 2 में कई प्रमुख मंत्रालय

सेवा तीर्थ के साथ कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 भी तैयार किए गए हैं। इन इमारतों में केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों को जगह दी गई है। इनमें शामिल हैं:

  • वित्त मंत्रालय
  • रक्षा मंत्रालय
  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
  • कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय
  • शिक्षा मंत्रालय
  • संस्कृति मंत्रालय
  • विधि एवं न्याय मंत्रालय
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
  • रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
  • जनजातीय कार्य मंत्रालय

इससे पहले गृह मंत्रालय नॉर्थ ब्लॉक से जनपथ स्थित कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) बिल्डिंग में स्थानांतरित हो चुका है। गृह मंत्रालय को नए कॉम्प्लेक्स में 347 कमरे आवंटित किए गए हैं। करीब 90 साल तक गृह मंत्रालय नॉर्थ ब्लॉक से संचालित होता रहा।

 

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा

सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत बनाए गए हैं। सेंट्रल विस्टा राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक फैला करीब 3.2 किलोमीटर लंबा केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र है। नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, राष्ट्रपति भवन और संसद भवन इसी क्षेत्र में स्थित हैं।

 

सितंबर 2019 में केंद्र सरकार ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। 10 दिसंबर 2020 को निर्माण कार्य शुरू हुआ। इसे 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

 

इस परियोजना के प्रमुख आर्किटेक्ट डॉ. बिमल पटेल हैं।

सेंट्रल विस्टा के प्रमुख प्रोजेक्ट और लागत

इस परियोजना के तहत कई बड़े निर्माण कार्य किए गए हैं:

  • नया संसद भवन – ₹971 करोड़
  • कर्तव्य पथ – ₹608 करोड़
  • कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CSS) – ₹3,690 करोड़
  • वाइस प्रेसिडेंट एन्क्लेव – ₹208 करोड़
  • सेवा तीर्थ – ₹1189 करोड़
  • युगे-युगेन भारत म्यूजियम – बजट तय नहीं

कुल अनुमानित लागत ₹20,000 करोड़ से अधिक बताई गई है।

 

परियोजना का उद्देश्य

सरकार का कहना है कि पहले 51 मंत्रालय अलग-अलग और कई पुराने भवनों में फैले हुए थे। इससे तालमेल की समस्या, काम में देरी और रखरखाव पर अधिक खर्च जैसी दिक्कतें आती थीं।

 

नए कॉम्प्लेक्स का उद्देश्य है:

  • सभी मंत्रालयों को एक स्थान पर लाना
  • किराया और रखरखाव खर्च कम करना
  • डिजिटल और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना
  • भविष्य की जरूरतों के अनुसार बुनियादी ढांचा तैयार करना

 

डिजिटल और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं

कर्तव्य भवन-1 और 2 को आधुनिक तकनीक से लैस बनाया गया है। यहां डिजिटल ऑफिस, पब्लिक एरिया और सेंट्रलाइज्ड रिसेप्शन की व्यवस्था है। सरकार का दावा है कि इससे मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल और काम की गति बढ़ेगी।

 

इन भवनों को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है। इनमें रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, जल संरक्षण प्रणाली, कचरा प्रबंधन व्यवस्था और ऊर्जा बचाने वाली तकनीकों का उपयोग किया गया है।

 

सुरक्षा के लिए स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, निगरानी नेटवर्क और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली भी लगाई गई है।

 

कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) की खास बातें

CCS परिसर में कुल 10 ऑफिस बिल्डिंग और एक कन्वेंशन सेंटर होगा। यहां करीब 54,000 कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था की गई है।

 

इसकी इमारतें आपस में जुड़ी हुई हैं और इनमें बेसमेंट के सात स्तर तक निर्माण किया गया है। परिसर में अंडरग्राउंड पैदल मार्ग और हरित तकनीक का उपयोग किया गया है।

 

6 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री मोदी ने कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन किया था। उसमें गृह, विदेश, ग्रामीण विकास, MSME, पेट्रोलियम और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय हैं।

 

नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का नया रूप

सरकार की योजना है कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे-युगेन भारत नेशनल म्यूजियम’ में बदला जाएगा। इसे विश्वस्तरीय संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा।

 

यहां 25 से 30 हजार कलाकृतियां प्रदर्शित करने की योजना है। इसे दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में शामिल करने का लक्ष्य है।

 

इतिहास से आधुनिकता की ओर

रायसीना हिल पर स्थित नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का निर्माण 1931 में हुआ था। इनके आर्किटेक्ट हर्बर्ट बेकर थे। इन इमारतों में ब्रिटिश शैली और भारतीय वास्तुकला का मिश्रण देखने को मिलता है। लाल और क्रीम रंग के पत्थरों से बनी ये इमारतें आजादी के बाद से प्रशासन का केंद्र रही हैं।

 

प्रधानमंत्री कार्यालय की शुरुआत 1947 में एक छोटे से प्रधानमंत्री सेक्रेटेरिएट के रूप में हुई थी। 1964 में लाल बहादुर शास्त्री के समय इसमें बड़ा बदलाव हुआ। इंदिरा गांधी के कार्यकाल में इसका दायरा और बढ़ा। 1977 में मोरारजी देसाई के समय इसका नाम बदलकर PMO रखा गया।

 

नया दौर, नई व्यवस्था

सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री कार्यालय का स्थानांतरण सिर्फ एक इमारत बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत है। सरकार का मानना है कि नई इमारतों से कामकाज तेज होगा, विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा।

 

अब देश की प्रशासनिक गतिविधियों का नया अध्याय सेवा तीर्थ से शुरू होगा। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि आधुनिक ढांचे और तकनीक से लैस यह नया परिसर शासन व्यवस्था को किस तरह प्रभावित करता है।

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