भारत आज वैश्विक निवेश मानचित्र पर एक ऐसे देश के रूप में उभर रहा है, जहां प्राइवेट क्रेडिट (निजी ऋण) बाजार और स्टार्टअप इकोसिस्टम दोनों एक साथ तेज़ी से विस्तार कर रहे हैं। अमेरिका और अन्य विकसित देशों के विपरीत, जहां निजी ऋण बाजार अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, भारत इस क्षेत्र में एक नए और मजबूत विकास चक्र में प्रवेश कर चुका है।
यही कारण है कि वैश्विक निवेशक अब अमेरिका से हटकर भारत को एक नए अवसर के रूप में देख रहे हैं।
अमेरिका में दबाव, भारत में अवसर
अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की शुरुआत के साथ वहां के निजी ऋण निवेशकों पर दबाव बढ़ गया है। अब तक ऊंची ब्याज दरों से लाभ उठाने वाले फ्लोटिंग-रेट पोर्टफोलियो को घटते रिटर्न का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा, अमेरिकी बाजार में अत्यधिक पूंजी की मौजूदगी ने प्रतिस्पर्धा को और तेज़ कर दिया है। नतीजतन,
- लोन पर मिलने वाले स्प्रेड कम हो रहे हैं
- अंडरराइटिंग के नियम नरम पड़ रहे हैं
- निवेश का जोखिम बढ़ता जा रहा है
इसके उलट, भारत में निजी ऋण बाजार अभी भी विस्तार के उस चरण में है जहां मांग मजबूत है, प्रतिस्पर्धा संतुलित है और रिटर्न आकर्षक बना हुआ है।
भारत का अलग और मजबूत क्रेडिट चक्र
भारत का निजी ऋण बाजार अब केवल एक वैकल्पिक निवेश विकल्प नहीं रहा, बल्कि यह घरेलू वित्तीय प्रणाली का एक संस्थागत और स्केल्ड हिस्सा बनता जा रहा है। भारतीय कंपनियां अब पारंपरिक बैंक लोन के साथ-साथ निजी ऋण को भी गंभीरता से अपना रही हैं।
इस बदलाव को तीन प्रमुख कारक मजबूती दे रहे हैं-
- मजबूत आर्थिक विकास
- कंपनियों की बढ़ती पूंजी जरूरत
- घरेलू एसेट मैनेजरों की सक्रिय भूमिका
आंकड़ों में भारत की बढ़ती ताकत
2025 की पहली छमाही में भारत के निजी ऋण बाजार में करीब 9 अरब डॉलर के सौदे हुए। वर्तमान में इस सेक्टर में 30 अरब डॉलर से अधिक की परिसंपत्तियां प्रबंधन के तहत हैं, जिससे भारत एशिया का सबसे बड़ा निजी ऋण बाजार बन चुका है।
हालांकि, भारत में निजी ऋण का आकार अभी भी GDP का केवल 0.6 प्रतिशत है, जबकि अमेरिका जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह 4 से 5 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
यह अंतर साफ संकेत देता है कि भारत के निजी ऋण बाजार के पास लंबे समय तक बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।
बड़े सौदे, बढ़ता संस्थागत भरोसा
भारत में अब 100 मिलियन डॉलर से अधिक के बड़े निजी ऋण सौदे तेजी से आम होते जा रहे हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि बाजार ज्यादा परिपक्व हो रहा है और निवेशकों का भरोसा मजबूत हो रहा है।
बड़े और दोहराए जाने वाले सौदे-
- बेहतर जोखिम मूल्यांकन
- मजबूत कॉर्पोरेट संबंध
- और स्पष्ट निकास रणनीति
को संभव बनाते हैं, जिससे निवेश केवल ऊंचे रिटर्न तक सीमित न रहकर निवेश योग्य गुणवत्ता की ओर बढ़ता है।
भारत और अमेरिका के रिटर्न में बड़ा अंतर
भारत के निजी ऋण बाजार की सबसे बड़ी खासियत इसका उच्च रिटर्न है।
यहां वरिष्ठ सुरक्षित और यूनिट्रैंच निजी ऋण सौदों पर निवेशकों को आज भी 15 से 18 प्रतिशत तक का रिटर्न मिल रहा है।
वहीं अमेरिका में निजी ऋण और बीडीसी (Business Development Companies) में यह रिटर्न घटकर 7 से 10 प्रतिशत के बीच सिमट गया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अंतर केवल अस्थायी नहीं है, बल्कि इसके पीछे संरचनात्मक कारण हैं-
- भारत की तेज़ नाममात्र आर्थिक वृद्धि
- निजी पूंजी की सीमित उपलब्धता
- कानूनी और निष्पादन जटिलताएं, जो जोखिम प्रीमियम को बनाए रखती हैं
जोखिम मौजूद हैं, लेकिन अब मापे जा सकते हैं
भारत के निजी ऋण बाजार में मुद्रा जोखिम, शासन से जुड़ी अनिश्चितता, कुछ क्षेत्रों में अधिक निर्भरता और लंबी कानूनी प्रक्रिया जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
लेकिन जैसे-जैसे बाजार परिपक्व हो रहा है, ये जोखिम अब अदृश्य नहीं रह गए हैं।
अब इन्हें सही ढंग से मापा, मूल्यांकित और प्रबंधित किया जा सकता है-
खासकर तब, जब निवेश रणनीति वरिष्ठ सुरक्षित लोन, मजबूत संपार्श्विक और सक्रिय पोर्टफोलियो प्रबंधन पर आधारित हो।
स्टार्टअप इंडिया: एक ऐतिहासिक बदलाव
16 जनवरी को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस भारत की स्टार्टअप क्रांति की सफलता को दर्शाता है। 2016 में जब स्टार्टअप इंडिया पहल शुरू हुई थी, तब देश में केवल 400 स्टार्टअप थे।
आज भारत में 2 लाख से अधिक सरकार-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं, जो करीब 21 लाख लोगों को रोजगार दे रहे हैं। इसके साथ ही भारत में 120 यूनिकॉर्न हैं, जिनका कुल मूल्य 350 अरब डॉलर से अधिक है।
सरकार की योजनाओं ने बदली तस्वीर
सरकार की 10,000 करोड़ रुपये की फंड ऑफ फंड्स योजना, जिसे सिडबी संचालित करता है, ने अब तक
- 90,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी
- और 1,200 से ज्यादा स्टार्टअप में 21,000 करोड़ रुपये के निवेश
को उत्प्रेरित किया है।
इसके अलावा टैक्स छूट, आसान अनुपालन, सीड फंड और क्रेडिट गारंटी जैसी योजनाओं ने स्टार्टअप्स को मजबूत आधार दिया।
अगला फोकस: डीप टेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
अब सरकार का ध्यान AI, डीप टेक, डिफेंस टेक, स्पेस टेक, बायोटेक, सेमीकंडक्टर और क्लाइमेट टेक जैसे क्षेत्रों पर है। कॉर्पोरेट कंपनियों को स्टार्टअप्स से जोड़कर उन्हें उद्योगों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
निष्कर्ष: भारत क्यों बन रहा है निवेश का पसंदीदा गंतव्य
आज भारत निवेशकों को वह संयोजन दे रहा है जो वैश्विक स्तर पर दुर्लभ होता जा रहा है-
- ऊंचा और स्थिर रिटर्न
- तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था
- मजबूत निजी ऋण बाजार
- और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम
इसी कारण वैश्विक पूंजी की नजर अब मजबूती से भारत पर टिकी हुई है।
