हाल ही में पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने अंकित अवस्थी सर के साथ एक विशेष बातचीत में वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत की आर्थिक रणनीति से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी राय साझा की। इस पॉडकास्ट में अमेरिका की व्यापार नीतियों, ‘फ्रीबी कल्चर’, वैश्विक सप्लाई चेन और निवेश से जुड़ी सलाह जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। आइए जानते हैं इस बातचीत के मुख्य बिंदु।
ट्रंप की टैरिफ नीति और वैश्विक व्यापार
चर्चा के दौरान डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और उनके वैश्विक व्यापार पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी बात हुई। रघुराम राजन के अनुसार, यदि अमेरिका आयात पर अधिक टैरिफ लगाता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। इससे कई देशों के बीच व्यापारिक संबंध और उत्पादन व्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
‘फ्रीबी कल्चर‘ पर क्या बोले रघुराम राजन?
सरकारों द्वारा दी जाने वाली मुफ्त योजनाओं यानी ‘फ्रीबी कल्चर’ के सवाल पर रघुराम राजन ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करना बेशक जरूरी है, लेकिन ऐसी योजनाओं को लक्षित और सुनियोजित तरीके से लागू किया जाना चाहिए ताकि सरकारी वित्त पर अनावश्यक बोझ न पड़े और संसाधनों का सही उपयोग हो सके।
अमेरिका-चीन तनाव और सप्लाई चेन का खतरा
बातचीत में अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती आर्थिक एवं तकनीकी प्रतिस्पर्धा पर भी विस्तार से चर्चा हुई। रघुराम राजन ने बताया कि तकनीकी उद्योग में उपयोग होने वाले रेयर अर्थ मटेरियल (दुर्लभ खनिज संसाधन) की वैश्विक सप्लाई पर चीन का बड़ा नियंत्रण है। यदि किसी भी कारण से इन संसाधनों की आपूर्ति बाधित होती है, तो इसका गहरा असर दुनियाभर के तकनीकी उद्योग पर पड़ सकता है।
बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की भूमिका
रघुराम राजन ने सुझाव दिया कि भारत को लोकतांत्रिक देशों के साथ अपने सहयोग और साझेदारी को और मजबूत करना चाहिए। उनका मानना है कि मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए भारत वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में अपनी भूमिका को और प्रभावशाली बना सकता है खासकर तब, जब दुनिया तेजी से नए आर्थिक और भू-राजनीतिक समीकरणों की ओर बढ़ रही है।
निवेशकों के लिए रघुराम राजन की सलाह
निवेश के विषय में रघुराम राजन ने कुछ व्यावहारिक और महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि निवेश करते समय डाइवर्सिफिकेशन यानी विविधता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साथ ही, उधार लेकर जोखिम भरे बाजारों में निवेश करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे वित्तीय नुकसान की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
क्यों जरूरी है यह चर्चा?
यह बातचीत वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और निवेश से जुड़े कई जटिल पहलुओं को सरल और स्पष्ट तरीके से समझने का एक दुर्लभ अवसर है। छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों और अर्थव्यवस्था में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति के लिए यह पॉडकास्ट अत्यंत उपयोगी है।
पूरी बातचीत और विस्तृत विश्लेषण हमारे YouTube चैनल ‘Ankit Inspires India‘ पर उपलब्ध है जहाँ आप पूरा पॉडकास्ट देख और सुन सकते हैं।

