वेस्ट एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के व्यापार पर भी गहराई से दिखाई देने लगा है। खासतौर पर निर्यात करने वाले कारोबारियों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने एक नई योजना शुरू की है, जिसका नाम है RELIEF (Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation)। इस योजना का मकसद उन निर्यातकों को राहत देना है, जिनकी शिपमेंट्स मौजूदा हालात के कारण प्रभावित हो रही हैं।
सरकार ने इस योजना के लिए 497 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि यह कदम खासतौर पर उन क्षेत्रों को ध्यान में रखकर उठाया गया है, जहां संघर्ष के कारण व्यापार पर सीधा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि कई भारतीय निर्यातकों की खेप अपने तय गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रही है, जिससे व्यापार का माहौल प्रभावित हो रहा है और लागत भी बढ़ रही है।
किन क्षेत्रों पर ज्यादा असर?
यह योजना उन निर्यातों को कवर करेगी जो वेस्ट एशिया के प्रमुख देशों में भेजे जा रहे हैं या वहां से होकर गुजरते हैं। इनमें यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान, इजराइल और यमन शामिल हैं। इन इलाकों में मौजूदा हालात के कारण समुद्री और हवाई रास्ते प्रभावित हुए हैं, जिससे सामान की डिलीवरी में देरी हो रही है।
दरअसल, हाल ही में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। इसका असर सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तेल की कीमतों, माल ढुलाई और बीमा लागत में भी तेजी आई है।

योजना के तीन हिस्से
सरकार ने RELIEF योजना को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटा है, ताकि हर तरह की समस्या का समाधान किया जा सके।
1. समय सीमा में राहत
इस हिस्से के तहत जिन निर्यातकों के एडवांस ऑथराइजेशन और EPCG की समय सीमा 1 मार्च से 31 मई 2026 के बीच खत्म हो रही थी, उसे अब बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दिया गया है। सबसे खास बात यह है कि इस पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।
इसके अलावा, 14 फरवरी से 15 मार्च के बीच जिन शिपमेंट्स का बीमा ECGC के तहत किया गया था, उन्हें भी सुरक्षा दी जाएगी।
2. नए निर्यात को सुरक्षित बनाना
योजना का दूसरा हिस्सा भविष्य के निर्यात को ध्यान में रखता है। 16 मार्च से 15 जून तक के तीन महीनों के लिए निर्यातकों को ECGC कवर लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे आने वाले समय में किसी भी नुकसान से बचाव हो सकेगा।
3. MSME के लिए खास मदद
तीसरा हिस्सा छोटे और मझोले उद्योगों यानी MSME के लिए है। इसमें 14 फरवरी से 15 मार्च के बीच बढ़े हुए माल भाड़ा और बीमा खर्च का कुछ हिस्सा सरकार द्वारा वापस किया जाएगा। यह सुविधा उन MSME निर्यातकों को दी जाएगी, जिन्होंने ECGC कवर नहीं लिया है। इससे छोटे व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
निर्यातकों की परेशानी क्या है?
मौजूदा हालात में निर्यातकों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनका सामान समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। कई बार शिपमेंट बीच रास्ते में ही अटक जाती है या वापस लौटानी पड़ती है। इससे कारोबारियों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा, समुद्री रास्तों में बाधा आने के कारण जहाजों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं। बीमा कंपनियों ने भी जोखिम बढ़ने के कारण प्रीमियम बढ़ा दिए हैं।
सूखे मेवे, फल और सब्जियों जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले निर्यातकों ने खासतौर पर देरी और संचालन से जुड़ी समस्याओं की शिकायत की है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का असर
इस पूरे संकट में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की भूमिका काफी अहम है। यह एक प्रमुख समुद्री मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और सामान का आवागमन होता है। अगर यहां रुकावट आती है, तो उसका असर पूरे वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।
वर्तमान स्थिति में इस मार्ग के प्रभावित होने से भारत जैसे देशों के लिए व्यापार करना और भी मुश्किल हो गया है।
सरकार की नजर
स्थिति पर नजर रखने के लिए सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है। इसमें वाणिज्य, पेट्रोलियम, पोर्ट्स, वित्तीय सेवाएं और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके साथ ही RBI और CBIC भी इस समूह का हिस्सा हैं।
यह टीम रोजाना बैठक कर हालात का आकलन करती है और कार्गो मूवमेंट पर नजर रखती है। सरकार का कहना है कि यह प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी, क्योंकि स्थिति तेजी से बदल रही है।
भारत का वेस्ट एशिया से व्यापार
भारत का वेस्ट एशिया के साथ व्यापार काफी बड़ा है। 2024-25 में भारत ने इस क्षेत्र में 58.8 अरब डॉलर का निर्यात किया। ऐसे में वहां किसी भी तरह की समस्या का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
क्या यह कदम पर्याप्त है?
RELIEF योजना निश्चित रूप से एक जरूरी और समय पर उठाया गया कदम है। इससे निर्यातकों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर छोटे कारोबारियों को।
हालांकि, जब तक वेस्ट एशिया में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक व्यापार पर दबाव बना रहेगा। ऐसे में यह योजना फिलहाल एक सहारा जरूर दे सकती है, लेकिन पूरी समस्या का समाधान नहीं है।
निष्कर्ष:
वेस्ट एशिया में जारी तनाव ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक घटनाएं किस तरह सीधे हमारे व्यापार को प्रभावित करती हैं। सरकार की RELIEF योजना इस चुनौती से निपटने की दिशा में एक अहम प्रयास है।

