देश के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर 26 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों, पुलिस और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के 982 कर्मियों को वीरता एवं विशिष्ट सेवा पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस वर्ष कुल 125 वीरता पदक प्रदान किए गए, जो राष्ट्र रक्षा में अतुलनीय साहस और बलिदान का प्रतीक हैं।
अंतरिक्ष यात्री को मिला देश का दूसरा सर्वोच्च वीरता सम्मान
इस बार की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि वायुसेना में ग्रुप कैप्टन और भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को प्रतिष्ठित अशोक चक्र से सम्मानित किया जाना रहा। अशोक चक्र शत्रु के समक्ष न होने की परिस्थिति में प्रदान किया जाने वाला देश का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है, जो वीरता पुरस्कारों की प्राथमिकता सूची में परमवीर चक्र के बाद दूसरे स्थान पर आता है।
चक्र श्रेणी के पुरस्कार
भारतीय सेना के अधिकारियों और जवानों को इस गणतंत्र दिवस पर चक्र श्रेणी में विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है। राष्ट्रपति ने तीन कीर्ति चक्र और 13 शौर्य चक्र प्रदान किए हैं। इनमें से एक शौर्य चक्र मरणोपरांत दिया गया है, जो शहीद जवान के सर्वोच्च बलिदान को सम्मानित करता है।
इसके अतिरिक्त एक बार टू सेना मेडल (वीरता) और 44 सेना मेडल (वीरता) भी प्रदान किए गए हैं। इन 44 पदकों में से पांच मरणोपरांत दिए गए हैं, जो उन वीर शहीदों को श्रद्धांजलि हैं जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
विभिन्न सेवाओं को मिले पुरस्कार
इस वर्ष पुलिस बल, अग्निशमन सेवा, होमगार्ड, सिविल डिफेंस और सुधार सेवा विभाग के कर्मियों को उनकी असाधारण सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया है।
वीरता पदक की श्रेणी: कुल 125 गैलेंट्री मेडल वितरित किए गए, जिनमें 121 पुलिसकर्मियों और 4 फायर ब्रिगेड के बहादुर जवानों को सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति पदक श्रेणी: 101 प्रेसिडेंट मेडल फॉर सर्विस (PSM) प्रदान किए गए। इनमें 89 पुलिस कर्मी, 5 अग्निशमन विभाग के जवान, 3 सिविल डिफेंस या होमगार्ड के सदस्य और 4 सुधार सेवा से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
मेरिटोरियस सर्विस मेडल: योग्यता सेवा की श्रेणी में कुल 756 पदक दिए गए। इनमें 664 पुलिस कर्मी, 34 अग्निशमन विभाग, 33 सिविल डिफेंस या होमगार्ड के जवान और 25 सुधार सेवा के कर्मचारी सम्मिलित हैं।
जम्मू-कश्मीर को सर्वाधिक सम्मान
जम्मू-कश्मीर ऑपरेशन थिएटर में तैनात सुरक्षा बलों के कर्मियों को सबसे अधिक 45 वीरता पदक मिले हैं। यह क्षेत्र लगातार आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों और सीमा पार घुसपैठ रोकने के अभियानों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस को अकेले 33 वीरता पदक प्राप्त हुए हैं, जो किसी भी राज्य पुलिस बल के लिए सर्वाधिक संख्या है। यह आंकड़ा घाटी में कानून व्यवस्था बनाए रखने और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में राज्य पुलिस की भूमिका को रेखांकित करता है।
नक्सल हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में सेवारत 35 सुरक्षा कर्मियों को भी वीरता पदकों से नवाजा गया है। पूर्वोत्तर राज्यों में तैनात 5 जवानों और अग्निशमन विभाग के 4 बचावकर्मियों ने भी यह प्रतिष्ठित सम्मान हासिल किया है।
राज्यों में पुरस्कारों का वितरण
जम्मू-कश्मीर के बाद महाराष्ट्र पुलिस को दूसरे स्थान पर 31 वीरता पदक मिले हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने 18 पुरस्कार प्राप्त किए हैं, जबकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की पुलिस को 14 अवॉर्ड दिए गए हैं।
केंद्रीय बलों और जांच एजेंसियों के सम्मान
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में CRPF एकमात्र ऐसा बल है जिसे इस बार 12 वीरता पदक प्राप्त हुए हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के 31 अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक और मेरिटोरियस मेडल से सम्मानित किया गया है।
CBI के पुरस्कृत अधिकारियों में जॉइंट डायरेक्टर वी चंद्रशेखर का नाम विशेष उल्लेखनीय है। वर्तमान में दिल्ली जोन में CBI प्रमुख के पद पर कार्यरत चंद्रशेखर ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुए चिकित्सक के रेप-मर्डर केस की जांच का कुशलतापूर्वक नेतृत्व किया था।
सेना के वीर योद्धाओं की शौर्य गाथा
कीर्ति चक्र से सम्मानित वीर: पहला असम राइफल्स के मेजर अरशदीप सिंह को 14 मई 2025 को भारत-म्यांमार सीमा पर विशेष गश्ती दल का नेतृत्व करते समय दिखाए गए असाधारण साहस के लिए कीर्ति चक्र प्रदान किया गया। जब उनकी टुकड़ी पर अचानक ऊंचाई से गोलीबारी शुरू हुई, तो उन्होंने घने जंगल से होते हुए दुश्मन के ठिकाने पर धावा बोल दिया और आरपीजी लांचर से लैस सहित अनेक सशस्त्र उग्रवादियों को मार गिराया।
द्वितीय पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) के नायब सूबेदार डोलेश्वर सुब्बा को 11 अप्रैल 2025 को किश्तवाड़ जिले के वनों में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान प्रदर्शित अदम्य वीरता के लिए कीर्ति चक्र से नवाजा गया।
शौर्य चक्र विजेता: 21 पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) के लेफ्टिनेंट कर्नल घाटगे आदित्य श्रीकुमार ने 11 से 13 जुलाई 2025 के मध्य भारत-म्यांमार सीमा पर एक सुदृढ़ उग्रवादी शिविर पर सटीक हमले की योजना बनाई और स्वयं नेतृत्व करते हुए उसे पूर्णतः नष्ट कर दिया। इस कार्रवाई में नौ सशस्त्र उग्रवादियों को मार गिराया गया।
32 असम राइफल्स के मेजर अंशुल बल्टू ने 29 अप्रैल 2025 को दीमा हसाओ जिले में तलाशी अभियान के दौरान एक भीषण मुठभेड़ में अकेले ही तीन उग्रवादियों का सफाया कर दिया।
5वीं पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) के मेजर शिवकांत यादव ने 12-13 मई 2025 की रात शोपियां जिले में कठिन भूभाग में अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए कैटेगरी ‘ए’ आतंकवादी को निकट युद्ध में ढेर कर दिया।
42 राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर विवेक ने 15 मई 2025 को पुलवामा जिले में घेराबंदी और तलाशी अभियान के दौरान नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कैटेगरी ‘ए+’ आतंकवादी को साहसिक मुठभेड़ में समाप्त कर दिया।
11वीं पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्सेज) के मेजर लेइशांगथेम दीपक सिंह ने अपहृत नागरिकों के बचाव के उच्च जोखिम वाले अभियान का नेतृत्व किया। भारी गोलाबारी के बीच उन्होंने आतंकवादियों को निकट से मार गिराया और एक निर्दोष नागरिक को सफलतापूर्वक मुक्त कराया।
विशिष्ट सेवा के लिए पदक
प्रतिष्ठित सेवा और सैन्य संचालन में नेतृत्व क्षमता के लिए 19 परम विशिष्ट सेवा मेडल, 4 उत्तम युद्ध सेवा मेडल, 35 अति विशिष्ट सेवा मेडल और 7 युद्ध सेवा मेडल प्रदान किए गए हैं। इनके साथ ही 2 बार टू सेना मेडल (विशिष्ट) और 43 सेना मेडल (विशिष्ट) भी दिए गए हैं।
इसके अलावा 85 विशिष्ट सेवा मेडल और 81 मेंशन-इन-डिस्पैचेज़ भी प्रदान किए गए हैं। ये सम्मान ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन स्नो लेपर्ड, ऑपरेशन हिफाजत, ऑपरेशन ऑर्किड और ऑपरेशन मेघदूत जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों के अलावा बचाव कार्यों और घायल सैनिकों को सुरक्षित स्थानांतरित करने के कार्यों के लिए दिए गए हैं।
यह पुरस्कार भारतीय सशस्त्र बलों और सुरक्षा एजेंसियों के अटूट साहस, समर्पण और राष्ट्र सेवा के प्रति अडिग संकल्प को दर्शाते हैं।
वीरता पुरस्कारों का परिचय
वीरता पुरस्कार उन सैनिकों, अर्धसैनिक बलों और नागरिकों को प्रदान किए जाते हैं जो कर्तव्य पालन के दौरान अपार साहस, बेजोड़ वीरता और अपनी जान की परवाह किए बिना राष्ट्र सेवा करते हैं। ये सम्मान प्रतिवर्ष दो अवसरों पर घोषित किए जाते हैं – पहली बार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर और दूसरी बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर।
वीरता पुरस्कारों की श्रेणियां
भारतीय वीरता पुरस्कारों को दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया है:
शत्रु के सामने वीरता के लिए पुरस्कार
परमवीर चक्र (PVC): यह भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। इस पदक के अग्रभाग पर “इंद्र के वज्र” की चार प्रतिकृतियां उभरी हुई होती हैं और केंद्र में राज्य चिह्न अंकित रहता है। यह सम्मान शत्रु की उपस्थिति में सर्वाधिक विशिष्ट वीरता, साहसिक कार्य या आत्म-बलिदान के लिए प्रदान किया जाता है।
महावीर चक्र (MVC): इस पदक के अग्रभाग पर पांच नोकों वाला हेराल्डिक तारा उभरा होता है, जिसके नोक पदक के किनारे को छूते हैं। तारे के मध्य में सुनहरा राज्य प्रतीक गुंबदाकार रूप में होता है। यह पुरस्कार शत्रु की उपस्थिति में वीरता के कार्यों के लिए दिया जाता है।
वीर चक्र: इस तारे के केंद्र में एक चक्र होता है, जिसके भीतर गुंबदाकार केंद्र में सुनहरा राज्य प्रतीक अंकित रहता है। यह सम्मान जमीन, समुद्र या आकाश में शत्रु की उपस्थिति में वीरता के कार्यों के लिए प्रदान किया जाता है। यह मरणोपरांत भी दिया जा सकता है।
शत्रु के सामने न होने की स्थिति में वीरता के लिए पुरस्कार
इस श्रेणी में तीन प्रमुख पदक शामिल हैं – अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र। इन सभी पदकों के अग्रभाग पर संबंधित चक्र की प्रतिकृति उभरी होती है, जो कमल की माला से घिरी रहती है। पदक के किनारे पर भीतरी तरफ कमल के पत्तों, फूलों और कलियों का डिजाइन होता है। पदक के पिछले हिस्से पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों में संबंधित शब्द अंकित होते हैं, जिन्हें दो कमल के फूलों द्वारा अलग किया जाता है।
पुरस्कारों की प्राथमिकता का क्रम
भारतीय वीरता पुरस्कारों की प्राथमिकता का क्रम इस प्रकार है:
- परमवीर चक्र
- अशोक चक्र
- महावीर चक्र
- कीर्ति चक्र
- वीर चक्र
- शौर्य चक्र
यह क्रम पुरस्कारों के महत्व और प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
पात्रता मानदंड
परमवीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र के लिए: नौसेना, थलसेना, वायुसेना, रिजर्व और प्रादेशिक बलों के सभी रैंक के जवान पात्र हैं। इसमें चिकित्सा और नर्सिंग स्टाफ तथा उनके निर्देशन में सेवारत नागरिक भी शामिल हैं।
अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र के लिए: सशस्त्र बलों, रिजर्व और प्रादेशिक बलों, नर्सिंग सेवाओं, पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, रेलवे सुरक्षा बल के सभी रैंक के सदस्य और नागरिक भी इन पुरस्कारों के लिए पात्र हैं।
बार टू चक्र की व्यवस्था
यदि कोई व्यक्ति पुनः समान प्रकार की वीरता प्रदर्शित करता है, तो उसे “बार टू चक्र” से सम्मानित किया जाता है। यह एक अतिरिक्त मान्यता है जो पहले से प्राप्त चक्र के साथ जुड़ती है।
मरणोपरांत सम्मान
भारतीय वीरता पुरस्कार प्रणाली में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि चक्र और बार टू चक्र दोनों ही मरणोपरांत प्रदान किए जा सकते हैं। यह उन वीर योद्धाओं को सम्मानित करने की व्यवस्था है जो राष्ट्र की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दे देते हैं।
