रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को अब पूरे चार साल हो चुके हैं। 24 फरवरी 2022 को मॉस्को ने जिस कार्रवाई को “स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन” कहा था, उस समय दुनिया भर के कई जानकारों का मानना था कि यह टकराव ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा था कि यह लड़ाई दो हफ्ते से ज्यादा नहीं टिकेगी। लेकिन आज 1460 दिन बीत जाने के बाद भी यह संघर्ष जारी है। साफ है कि शुरुआती अनुमान पूरी तरह गलत साबित हुए।
जब रूस ने यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई शुरू की, तब माना जा रहा था कि रूसी सेना तेजी से बढ़त बनाकर कीव पर कब्जा कर लेगी और यूक्रेन की सरकार गिर जाएगी। रूस की सेना को लंबे समय से बेहद ताकतवर और लगभग अजेय माना जाता रहा है। लेकिन कीव पर कब्जा नहीं हो सका और युद्ध एक लंबी और थकाऊ लड़ाई में बदल गया।
यूक्रेन ने उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूत प्रतिरोध दिखाया। पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और यूरोप से मिले सैन्य और आर्थिक समर्थन ने भी उसे टिके रहने में मदद की। इससे यह धारणा टूट गई कि रूस कुछ ही दिनों में अपने लक्ष्य हासिल कर लेगा।
सीमित बढ़त, भारी नुकसान
रूस 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के बाद से अब तक यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण रखता है। हालांकि 2022 के बड़े हमले के बाद से उसकी प्रगति बेहद धीमी रही है। पिछले दो वर्षों में रूसी सेना पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में करीब 30 मील ही आगे बढ़ सकी है। नाटो महासचिव मार्क रुटे ने इस रफ्तार को “बगीचे के घोंघे” जैसी धीमी बताया था।
अमेरिका स्थित सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के अनुमान के मुताबिक रूस के लगभग 12 लाख सैनिक हताहत हुए हैं, जिनमें करीब 3.25 लाख मारे गए हो सकते हैं। वहीं यूक्रेन के भी करीब 6 लाख सैनिक हताहत हुए, जिनमें 1 से 1.4 लाख के बीच मौतें होने का अनुमान है। कुल मिलाकर दोनों पक्षों में मृत, घायल या लापता सैनिकों की संख्या करीब 20 लाख तक मानी जा रही है। यह यूरोप में दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे विनाशकारी संघर्ष बन चुका है।
शुरुआती तेज हमले से खाई युद्ध तक
युद्ध की शुरुआत में रूस ने तेजी से कीव की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन वह राजधानी पर कब्जा नहीं कर सका। इसके बाद संघर्ष लंबी खाई युद्ध जैसी स्थिति में बदल गया। करीब 750 मील लंबी अग्रिम पंक्ति पर छोटे-छोटे इलाकों के लिए भीषण लड़ाई चल रही है।
आज स्थिति यह है कि छोटे-छोटे सैनिक दल, अक्सर दो या तीन जवानों के समूह में, बमबारी से तबाह हो चुके शहरों में आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। रसद पहुंचाना और घायलों को निकालना बेहद मुश्किल हो गया है, क्योंकि ड्रोन सप्लाई रूट को निशाना बनाते हैं।
ड्रोन का नया दौर
इस युद्ध की सबसे खास बात है ड्रोन का व्यापक इस्तेमाल। पहली बार किसी बड़े युद्ध में ड्रोन निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। यूक्रेन ने शुरू से ड्रोन का सहारा लेकर रूस की भारी तोपखाने और मिसाइल क्षमता का मुकाबला किया। बाद में रूस ने भी बड़े पैमाने पर ड्रोन ऑपरेशन शुरू किए।
अब दोनों पक्ष लंबी दूरी तक मार करने वाले ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। रूस ने ऑप्टिकल फाइबर से जुड़े ड्रोन तैनात किए हैं, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से रोकना मुश्किल है। इससे अग्रिम मोर्चे के आसपास लगभग 30 मील तक का इलाका बेहद खतरनाक हो गया है।
लंबी दूरी के हमले और ऊर्जा संकट
पिछली सर्दियों को यूक्रेनी अधिकारियों ने अब तक की सबसे कठिन सर्दी बताया। रूस ने यूक्रेन की ऊर्जा संरचना पर बड़े पैमाने पर हमले किए। बिजली घरों और ट्रांसमिशन लाइनों को निशाना बनाया गया, जिससे कीव समेत कई शहरों में लोगों को कड़ाके की ठंड में कुछ घंटों की ही बिजली मिल सकी।
इसके जवाब में यूक्रेन ने रूस के अंदर तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले किए, ताकि मॉस्को की निर्यात आय कम की जा सके। यूक्रेन ने काला सागर में रूस के कई युद्धपोतों को भी नुकसान पहुंचाया, जिससे रूस को अपने जहाजों को क्रीमिया से हटाकर नोवोरोसिस्क ले जाना पड़ा। जून में “स्पाइडरवेब” नाम के ऑपरेशन के तहत यूक्रेन ने ट्रकों से ड्रोन लॉन्च कर रूस के कई एयरबेस पर हमला किया, जिसे क्रेमलिन के लिए बड़ा झटका माना गया।

शांति वार्ता में गतिरोध
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध खत्म कराने की कोशिशें तेज की हैं और जून तक समझौता कराने की समयसीमा बताई है। लेकिन शांति वार्ता में दोनों पक्षों की मांगें टकरा रही हैं।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन डोनेट्स्क समेत चार क्षेत्रों से अपनी सेना हटा ले, नाटो में शामिल होने की कोशिश छोड़े, अपनी सैन्य क्षमता सीमित करे और रूसी भाषा को आधिकारिक दर्जा दे। यूक्रेन इन शर्तों को मानने से इनकार कर रहा है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की मौजूदा संपर्क रेखा पर युद्धविराम चाहते हैं, लेकिन पुतिन केवल व्यापक शांति समझौते पर ही सहमत होने की बात करते हैं। रूस ने यूक्रेन की संभावित यूरोपीय संघ सदस्यता पर दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन किसी भी यूरोपीय शांति सेना की तैनाती का सख्त विरोध किया है।
युद्ध का असली मकसद?
विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल जमीन का विवाद नहीं है। कार्नेगी रूस यूरेशिया सेंटर की तातियाना स्तानोवाया के मुताबिक, क्रेमलिन का बड़ा लक्ष्य ऐसा यूक्रेन बनाना है जो पूरी तरह रूस के प्रभाव क्षेत्र में हो और जिसे “एंटी-रूस” न माना जाए।
यूक्रेन और उसके सहयोगियों का आरोप है कि पुतिन बातचीत को लंबा खींचते हुए जमीन पर बढ़त लेने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं रूस का कहना है कि कीव और उसके यूरोपीय समर्थक वार्ता को कमजोर कर रहे हैं।
आर्थिक दबाव
युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों ने रूस की अर्थव्यवस्था पर असर डाला है। पिछले साल आर्थिक वृद्धि लगभग 1 प्रतिशत रही। तेल और गैस से होने वाली आय पांच साल के निचले स्तर पर पहुंच गई। फिर भी रूस ने रक्षा उत्पादन बढ़ाया है और सेना तथा औद्योगिक श्रमिकों जैसे वर्गों को आर्थिक कठिनाई से बचाने की कोशिश की है।
दूसरी ओर, यूक्रेन की अर्थव्यवस्था युद्ध के पहले साल में लगभग एक तिहाई सिकुड़ गई थी। अब भी वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और अन्य विदेशी कर्जदाताओं की मदद पर निर्भर है।
भारी तबाही और मानवीय संकट
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2022 से अब तक 15,000 से अधिक नागरिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, हालांकि वास्तविक संख्या इससे ज्यादा हो सकती है। पूर्व और दक्षिणी यूक्रेन के कई शहर मलबे में बदल चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2,800 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर हमलों की पुष्टि की है।
करीब 59 लाख यूक्रेनी शरणार्थी विदेशों में रह रहे हैं और 37 लाख देश के भीतर विस्थापित हैं। यूक्रेन का कहना है कि लगभग 20,000 बच्चों को रूसी कब्जे वाले इलाकों से जबरन ले जाया गया।
विश्व बैंक के अनुसार अगले दस वर्षों में यूक्रेन के पुनर्निर्माण पर लगभग 588 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं।
सहयोगी और वैश्विक असर
यूक्रेन को यूरोप से 201 अरब यूरो की सहायता मिल चुकी है, जबकि अमेरिका ने करीब 115 अरब डॉलर की मदद दी है। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने कुछ हथियार आपूर्ति पर रोक लगाई है और यूरोप से अधिक जिम्मेदारी लेने को कहा है।
रूस को उत्तर कोरिया से सैनिक और गोला-बारूद मिलने की खबरें हैं। ईरान ने ड्रोन तकनीक उपलब्ध कराई है और चीन रूस का प्रमुख आर्थिक साझेदार बना हुआ है।
क्या जल्द खत्म होगा युद्ध?
ट्रंप प्रशासन जून की समयसीमा पर जोर दे रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में त्वरित समझौते की संभावना कम दिखती है। पुतिन डोनेट्स्क से यूक्रेन की पूरी वापसी पर अड़े हैं और जेलेंस्की इसे अस्वीकार्य मानते हैं। यूक्रेन को उम्मीद है कि यदि पश्चिमी दबाव बढ़ा तो रूस नरम पड़ेगा। वहीं रूस को भरोसा है कि लंबी लड़ाई अंततः कीव को झुकने पर मजबूर कर देगी।

