1 जनवरी, 2026 को, सैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड और देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड ने लगभग 934 मिलियन डॉलर के ऑल-स्टॉक सौदे में अपने परिचालन को विलय करने के लिए एक समझौते की घोषणा की है।
सैफायर फूड्स और देवयानी इंटरनेशनल के विलय के प्रमुख बिंदु
- भारत के क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) क्षेत्र में एक बड़ा कॉरपोरेट घटनाक्रम सामने आया है। सैफायर फूड्स इंडिया और देवयानी इंटरनेशनल, जो देश की सबसे बड़ी QSR कंपनियों में शामिल हैं, ने आपसी विलय पर सहमति जताई है। यह समझौता लगभग 934 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब ₹8,400 करोड़ के मूल्य का है। दोनों कंपनियों के निदेशक मंडलों से मंजूरी मिलने के बाद इस विलय की औपचारिक घोषणा जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में की गई।
- यह विलय पूरी तरह से शेयर-स्वैप मॉडल पर आधारित है। समझौते के अनुसार, सैफायर फूड्स के शेयरधारकों को हर 100 शेयरों के बदले देवयानी इंटरनेशनल के 177 शेयर जारी किए जाएंगे। इस व्यवस्था से नकद लेन-देन का दबाव नहीं रहेगा और दोनों कंपनियों के निवेशक संयुक्त इकाई के दीर्घकालिक विकास में भागीदार बनेंगे।
- विलय के बाद बनने वाली संयुक्त कंपनी के पास 3,000 से अधिक QSR आउटलेट्स होंगे। ये रेस्टोरेंट केवल भारत तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि थाईलैंड, नाइजीरिया, श्रीलंका और नेपाल जैसे चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी संचालित होंगे। नेटवर्क में KFC, पिज़्ज़ा हट और टैको बेल जैसे वैश्विक ब्रांड शामिल हैं, जो Yum! Brands के साथ फ्रेंचाइज़ी समझौतों के तहत संचालित होते हैं।
- वित्त वर्ष 2024–25 के प्रो-फॉर्मा आंकड़ों के अनुसार, विलय के बाद संयुक्त कारोबार का कुल राजस्व ₹7,800 करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है। इस आकार के साथ नई कंपनी भारत के सबसे बड़े QSR खिलाड़ियों में शामिल हो जाएगी।
- इस विलय को लागू करने से पहले कई नियामकीय स्वीकृतियाँ आवश्यक होंगी। इसमें स्टॉक एक्सचेंज, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI), नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के साथ-साथ दोनों कंपनियों के शेयरधारकों और लेनदारों की मंजूरी शामिल है। सभी स्वीकृतियाँ मिलने के बाद यह सौदा 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है।
- विलय के बाद पूर्ण परिचालन एकीकरण और सिनर्जी लाभ हासिल करने में लगभग 12 से 15 महीने लग सकते हैं। इसका अर्थ है कि 2027 के अंत से 2028 की शुरुआत तक संयुक्त इकाई पूरी क्षमता से काम करने लगेगी।
विलय के पीछे रणनीतिक सोच
इस विलय का मूल उद्देश्य परिचालन दक्षता बढ़ाना और लागत संरचना को मजबूत करना है। बीते कुछ वर्षों में दोनों कंपनियों को बढ़ती इनपुट लागत, समान स्टोर बिक्री की धीमी रफ्तार और मैकडॉनल्ड्स, डोमिनोज़ और पोपायज़ जैसे प्रतिस्पर्धियों से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। अलग-अलग काम करने की स्थिति में लागत का दबाव अधिक था। अब संयुक्त इकाई बनने से रॉयल्टी शुल्क में संतुलन, कॉरपोरेट ओवरहेड्स में कमी और सप्लाई-चेन प्रक्रियाओं के सरलीकरण की संभावना बनेगी। एकीकृत नेटवर्क के कारण तकनीकी प्लेटफॉर्म साझा किए जा सकेंगे, जिससे संचालन अधिक सुचारु होगा। इसके साथ ही, साझा मार्केटिंग रणनीतियाँ अपनाने से ब्रांड की पहचान मजबूत होगी और ग्राहकों तक पहुंच बेहतर होगी।
आइए जानते हैं सैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड के बारे में
- सैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड भारतीय उपमहाद्वीप में Yum! Brands Inc. की प्रमुख फ्रेंचाइज़ी कंपनियों में शामिल है। यह कंपनी KFC, पिज़्ज़ा हट और टैको बेल जैसे वैश्विक फास्ट-फूड ब्रांड्स का संचालन करती है।
- इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय फूड ब्रांड्स को भारत और पड़ोसी देशों में विस्तार देना है। कंपनी की स्थापना 10 नवंबर 2009 को समरजीत एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से हुई थी, जिसे बाद में वर्तमान नाम दिया गया।
- वर्ष 2015 में इसने QSR क्षेत्र में प्रवेश किया, जिसके साथ ही कंपनी ने भारत और श्रीलंका में लगभग 270 KFC और पिज़्ज़ा हट आउटलेट्स का अधिग्रहण किया। इसके बाद कंपनी ने तेज़ी से नेटवर्क बढ़ाया।
- साल 2025 के अंत तक सैफायर फूड्स लगभग 1,000 QSR आउटलेट्स का प्रबंधन कर रही है।
- Q2 FY26 में कंपनी का परिचालन राजस्व ₹742.4 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में 6.7% अधिक था। हालांकि, लागत दबाव और प्रतिस्पर्धा के कारण लाभप्रदता पर असर पड़ा और कंपनी का शुद्ध घाटा बढ़कर ₹12.78 करोड़ हो गया।
- वित्तीय संरचना की बात करें तो इसका Debt-to-Equity अनुपात 0.99 के आसपास है, जबकि ROCE मात्र 4.34% पर सीमित रहा, जो पूंजी उपयोग की दक्षता को दर्शाता है। जनवरी 2026 की शुरुआत में कंपनी का बाज़ार पूंजीकरण लगभग ₹8,442 करोड़ आंका गया, जिससे इसके आकार और निवेशक रुचि का अनुमान मिलता है।
आइए जानते हैं देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड के बारे में
- देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी QSR ऑपरेटर्स में से एक है और देश में Yum! Brands की सबसे बड़ी फ्रेंचाइज़ी मानी जाती है।
- इसकी स्थापना 13 दिसंबर 1991 को हुई थी। कंपनी का मुख्यालय गुरुग्राम में स्थित है और इसका नेतृत्व चेयरमैन रवि कांत जयपुरिया तथा CEO विराग जोशी करते हैं। देवयानी ने भारत के साथ-साथ नेपाल, नाइजीरिया और थाईलैंड में भी अपनी मजबूत उपस्थिति बनाई है।
- 2024–25 तक यह कंपनी 2,030 से अधिक स्टोर्स संचालित कर रही है। देवयानी का ब्रांड पोर्टफोलियो विविध है। इसमें KFC और पिज़्ज़ा हट जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ-साथ Costa Coffee के लिए भारत में विशेष लाइसेंस भी शामिल है।
- इसके अतिरिक्त, कंपनी ने अपने स्वयं के ब्रांड जैसे वांगो (दक्षिण भारतीय शाकाहारी व्यंजन) और द फूड स्ट्रीट (फूड कोर्ट मॉडल) विकसित किए हैं।
- Q2 FY26 में देवयानी का समेकित राजस्व ₹1,377 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 12.6% की वृद्धि दर्शाता है। हालांकि, बढ़ती इनपुट लागत के कारण कंपनी को ₹21.9 करोड़ का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा। 2 जनवरी 2026 को इसका बाज़ार पूंजीकरण लगभग ₹18,176 करोड़ दर्ज किया गया।
संभावित वित्तीय लाभ
कंपनी प्रबंधन का अनुमान है कि विलय के पूर्ण एकीकरण के बाद वार्षिक लागत बचत ₹210 करोड़ से ₹225 करोड़ के बीच हो सकती है। ये लाभ विलय के प्रभावी होने के बाद दूसरे पूर्ण वित्तीय वर्ष से दिखाई देने लगेंगे। यह बचत मुख्य रूप से केंद्रीकृत खरीद प्रणाली, साझा सप्लाई-चेन नेटवर्क और सामान्य प्रशासनिक ढांचे से प्राप्त होगी। जब दो बड़ी कंपनियों की प्रक्रियाएं एक होंगी, तो दोहराव खत्म होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। इसके परिणामस्वरूप लाभप्रदता में सुधार होगा। आंतरिक अनुमानों के अनुसार, यह विलय EBITDA मार्जिन में लगभग 2.5% की वृद्धि कर सकता है। साथ ही, संयुक्त कारोबार का कुल राजस्व और EBITDA स्तर, अलग-अलग संचालन की तुलना में 50–60% तक बड़ा हो सकता है।
QSR उद्योग पर व्यापक प्रभाव
यह विलय भारत के क्विक सर्विस रेस्टोरेंट उद्योग की संरचना को नया आकार देता है। अब KFC और पिज़्ज़ा हट जैसे बड़े वैश्विक ब्रांड एक ही ऑपरेटर के तहत संचालित होंगे, जबकि पहले अलग-अलग क्षेत्रों में अलग फ्रेंचाइज़ी मॉडल था। इससे ब्रांड संचालन में एकरूपता आएगी और ग्राहक अनुभव भी अधिक समान होगा। संयुक्त इकाई की बाजार में मौजूदगी जुबिलेंट फूडवर्क्स, जो डोमिनोज़ पिज़्ज़ा का मास्टर फ्रेंचाइज़ी है, को सीधे और प्रभावी रूप से चुनौती दे सकेगी। बढ़ती लागत, बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं और प्रतिस्पर्धा के दबाव को देखते हुए, यह कदम अन्य फूड सर्विस कंपनियों को भी रणनीतिक साझेदारी या विलय पर विचार करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
