Shahid Rajaee Port: ईरान के सबसे बड़े बंदरगाह पर कजाकिस्तान बनाएगा लॉजिस्टिक्स टर्मिनल, जानिए भारत के लिए भी क्यों है अहम? 

Shahid Rajaee Port

Shahid Rajaee Port: ईरान और कजाकिस्तान ने क्षेत्रीय व्यापार और परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के शाहिद राजाई पोर्ट (Shahid Rajaee Port) पर कजाकिस्तान के पहले परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स टर्मिनल के निर्माण के लिए बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (Build-Operate-Transfer – BOT) समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत ईरान ने बंदर अब्बास स्थित शाहिद राजाई पोर्ट में कजाकिस्तान को जमीन उपलब्ध कराई है, जहां वह अपना आधुनिक लॉजिस्टिक्स टर्मिनल विकसित करेगा।

यह परियोजना केवल दो देशों के बीच व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) को मजबूत करने, मध्य एशिया को समुद्री मार्गों से जोड़ने और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ईरान-कजाकिस्तान के बीच हुआ बड़ा लॉजिस्टिक्स समझौता

कजाकिस्तान के व्यापार एवं एकीकरण मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के बीच हुआ BOT समझौता 27 वर्षों के लिए होगा। इसमें पहले 2 वर्ष निर्माण कार्य के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि अगले 25 वर्ष तक कजाकिस्तान इस टर्मिनल का संचालन करेगा। योजना के अनुसार परियोजना के तीसरे वर्ष से टर्मिनल व्यावसायिक रूप से काम करना शुरू कर देगा।

इस परियोजना के जरिए कजाकिस्तान को फारस की खाड़ी तक स्थायी लॉजिस्टिक्स पहुंच मिलेगी और ईरान को मध्य एशिया के साथ अपने व्यापारिक संबंध और मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

शाहिद राजाई पोर्ट की रणनीतिक अहमियत

शाहिद राजाई पोर्ट ईरान के दक्षिणी शहर बंदर अब्बास में स्थित है। यह ईरान का सबसे बड़ा कंटेनर और वाणिज्यिक बंदरगाह है, जहां से देश के अधिकांश समुद्री आयात-निर्यात का संचालन होता है।

यह बंदरगाह हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बेहद करीब स्थित है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और समुद्री व्यापार इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। यही कारण है कि यह केवल ईरान के लिए ही नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

कजाकिस्तान की नई व्यापारिक रणनीति

कजाकिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा भू-आवेष्ठित (Landlocked) देश है, जिसकी अपनी कोई समुद्री सीमा नहीं है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए उसे दूसरे देशों के बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ता है।

पिछले एक दशक में कजाकिस्तान ने अपनी परिवहन नीति में बड़ा बदलाव किया है। उसने केवल रूस पर निर्भर रहने के बजाय चीन, कैस्पियन सागर, तुर्कमेनिस्तान और ईरान के जरिए वैकल्पिक व्यापारिक मार्ग विकसित करने शुरू किए हैं।

शाहिद राजाई पोर्ट पर बनने वाला नया टर्मिनल इसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिससे कजाकिस्तान सीधे फारस की खाड़ी, दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी अफ्रीका के बाजारों तक पहुंच बना सकेगा।

INSTC कॉरिडोर को मिलेगी नई गति

यह परियोजना इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

INSTC भारत, ईरान, रूस और मध्य एशियाई देशों के बीच विकसित किया जा रहा बहु-माध्यम परिवहन नेटवर्क है, जिसमें रेल, सड़क और समुद्री मार्ग शामिल हैं। इसका उद्देश्य भारत से रूस और यूरोप तक माल ढुलाई का समय और लागत कम करना है।

कजाकिस्तान वर्ष 2003 से इस परियोजना का सदस्य है और इसकी पूर्वी शाखा में उसकी भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। नया लॉजिस्टिक्स टर्मिनल इस पूरे नेटवर्क को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।

 

मध्य एशिया से फारस की खाड़ी तक मजबूत होगी कनेक्टिविटी

जून 2026 में अस्ताना में कजाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री सेरिक झुमंगारिन और ईरान की सड़क एवं शहरी विकास मंत्री फरजानेह सादेघ के बीच हुई बैठक में इस परियोजना की रूपरेखा तय हुई थी।

बैठक में ईरान ने शाहिद राजाई पोर्ट में भूमि उपलब्ध कराने पर सहमति दी, जबकि कजाकिस्तान ने अपने अक्ताउ (Aktau) और कुरिक (Kuryk) बंदरगाहों पर ईरान को सुविधाएं देने की पेशकश की। दोनों देशों ने INSTC के माध्यम से प्रतिवर्ष 2 करोड़ टन माल परिवहन का लक्ष्य भी दोहराया।

 

चीन, रूस और मध्य एशिया के लिए बढ़ता महत्व

कजाकिस्तान आज चीन और मध्य एशिया के बीच सबसे महत्वपूर्ण रेल संपर्क बन चुका है। चीन से ईरान जाने वाली कई मालगाड़ियां कजाकिस्तान होकर गुजरती हैं।

2025 में चीन के शीआन (Xi’an) से ईरान के तेहरान तक सीधी मालगाड़ी सेवा शुरू हुई, जिसका मार्ग कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से होकर गुजरता है।

दूसरी ओर यूक्रेन युद्ध के बाद रूस भी पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण INSTC के पूर्वी मार्ग का पहले की तुलना में अधिक उपयोग कर रहा है। इससे कजाकिस्तान और ईरान दोनों का रणनीतिक महत्व बढ़ा है।

 

व्यापार के साथ रणनीतिक संतुलन पर भी नजर

हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीति ने वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों की आवश्यकता बढ़ा दी है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और यूरोप के पारंपरिक व्यापार मार्गों पर बढ़ते तनाव के बीच कई देश नए कॉरिडोर विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। कजाकिस्तान और ईरान का यह समझौता भी उसी व्यापक रणनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।

इससे क्षेत्रीय सप्लाई चेन अधिक विविध होगी और मध्य एशिया को समुद्री व्यापार के नए विकल्प मिलेंगे।

 

परियोजना के सामने मौजूद चुनौतियां

हालांकि इस परियोजना से बड़ी उम्मीदें जुड़ी हैं, लेकिन कई व्यावहारिक चुनौतियां भी मौजूद हैं।

कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और ईरान के बीच सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण अभी बाकी है। कुछ स्थानों पर रेलवे गेज अलग होने के कारण माल की दोबारा लोडिंग करनी पड़ती है, जिससे समय बढ़ जाता है।

इसके अलावा ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, बैंकिंग और बीमा संबंधी कठिनाइयां तथा क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति भी इस परियोजना की गति को प्रभावित कर सकती हैं।

 

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने

भारत लंबे समय से INSTC को अपनी सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं में शामिल करता रहा है।

यदि ईरान और कजाकिस्तान के बीच यह लॉजिस्टिक्स नेटवर्क सफल होता है, तो भारत को मध्य एशिया, रूस और यूरोप तक अधिक तेज और किफायती व्यापारिक मार्ग मिल सकते हैं। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नई संभावनाएं खुलेंगी और सप्लाई चेन भी अधिक मजबूत होगी।

यह परियोजना भारत की कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति, इंडो-पश्चिम एशिया व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने की रणनीति के अनुरूप भी मानी जा रही है।

 

बदलते वैश्विक व्यापार मार्गों में नई भूमिका

पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक व्यापारिक व्यवस्था तेजी से बदल रही है। यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिमों ने देशों को नए विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया है।

ऐसे समय में शाहिद राजाई पोर्ट पर बनने वाला कजाकिस्तान का लॉजिस्टिक्स टर्मिनल केवल एक बंदरगाह परियोजना नहीं बल्कि मध्य एशिया, ईरान, भारत और रूस के बीच उभरते नए व्यापारिक नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। यदि परियोजना तय समय पर पूरी होती है, तो यह पूरे क्षेत्र की आर्थिक और रणनीतिक कनेक्टिविटी को नई दिशा दे सकती है।

FAQs:

 यह ईरान के बंदर अब्बास शहर में फारस की खाड़ी के तट पर स्थित देश का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बंदरगाह है।

इससे कजाकिस्तान को समुद्री व्यापार का नया मार्ग मिलेगा और दोनों देशों के बीच व्यापार एवं परिवहन सहयोग मजबूत होगा।

माल के भंडारण, कंटेनर संचालन, ट्रांजिट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को अधिक कुशल बनाना।

व्यापार बढ़ेगा, सप्लाई चेन मजबूत होगी और नए निर्यात बाजारों तक पहुंच आसान होगी।

हां, इससे मध्य एशिया, फारस की खाड़ी और दक्षिण एशिया के बीच व्यापारिक संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।

यह टर्मिनल INSTC के जरिए माल ढुलाई को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।

यह हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है और ईरान के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक केंद्रों में शामिल है।

इससे मध्य एशिया, ईरान और हिंद महासागर क्षेत्र के बीच परिवहन नेटवर्क और मजबूत होगा।