Sonam Wangchuk Hunger Strike: 18 दिन से भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक, अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला- क्या खतरे में है वांगचुक की जान?

Sonam Wangchuk Hunger Strike

Sonam Wangchuk Hunger Strike: जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। जंतर-मंतर पर चल रहे उनके अनशन के 18वें दिन एक जनहित याचिका दायर कर तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि वांगचुक की सेहत तेजी से बिगड़ रही है और यदि अनशन जारी रहा तो उनके जीवन को गंभीर खतरा हो सकता है। याचिका में उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाने, आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर तरल आहार के माध्यम से फोर्स-फीडिंग कराने का निर्देश देने की मांग की गई है।

सोनम वांगचुक 28 जून 2026 से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। वह कथित NEET-UG परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ Cockroach Janta Party के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और परीक्षा विवाद से प्रभावित छात्रों के लिए जवाबदेही तय करना शामिल है। 14 जुलाई को वांगचुक के अनशन का 17वां दिन था और 15 जुलाई को यह 18वें दिन में प्रवेश कर गया।

Sonam Wangchuk Hunger Strike

सोनम वांगचुक अनशन क्यों कर रहे हैं?

सोनम वांगचुक का अनशन Cockroach Janta Party के उस आंदोलन के समर्थन में है, जिसमें कथित परीक्षा अनियमितताओं, NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग उठाई जा रही है। आंदोलन के आयोजकों का आरोप है कि परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया।

CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा उन विद्यार्थियों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग भी की है, जिनके बारे में संगठन का दावा है कि उन्होंने कथित परीक्षा विवाद के बाद आत्महत्या कर ली। इन आरोपों और मौतों के बीच सीधा संबंध आधिकारिक जांच से स्थापित होना अभी बाकी है, इसलिए इन्हें आंदोलनकारियों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

मेडिकल प्रवेश परीक्षा को विवाद के बाद दोबारा आयोजित किया गया था। Reuters के अनुसार इस परीक्षा से करीब 23 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए, जिससे छात्र समुदाय में व्यापक नाराजगी पैदा हुई।

वांगचुक की सेहत को लेकर क्या जानकारी सामने आई?

आंदोलन से जुड़े लोगों द्वारा जारी स्वास्थ्य अपडेट के अनुसार सोनम वांगचुक का वजन अनशन शुरू होने के बाद करीब 8.4 से 8.5 किलोग्राम घटा है। उनके समर्थकों का दावा है कि उनकी मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं, शरीर में दर्द बढ़ा है और रक्तचाप गिरकर लगभग 109/70 तक पहुंच गया है। इससे पहले रक्त शर्करा का स्तर 67 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक गिरने का दावा भी किया गया था।

हालांकि ये स्वास्थ्य आंकड़े आंदोलन के आयोजकों और समर्थकों द्वारा साझा किए गए हैं। किसी सरकारी मेडिकल बोर्ड की विस्तृत स्वतंत्र रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसी कारण हाईकोर्ट में दायर याचिका में औपचारिक चिकित्सा जांच और अस्पताल में निगरानी की मांग की गई है।

वांगचुक के करीबी लोगों के अनुसार उनसे कई बार अनशन समाप्त करने की अपील की गई, लेकिन उन्होंने कहा कि उनसे अनशन छोड़ने को कहने के बजाय सरकार से बातचीत शुरू करने के लिए कहा जाना चाहिए। उन्होंने अपनी स्थिति को “बाहर से कमजोर, भीतर से मजबूत” बताया है।

दिल्ली हाईकोर्ट में किसने दायर की याचिका?

यह जनहित याचिका अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी ने दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों पर वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के प्रति पर्याप्त संवेदनशीलता न दिखाने का आरोप लगाया गया है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक एवं लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राज्य की जिम्मेदारी यह भी है कि किसी प्रदर्शनकारी की जान खतरे में न पड़े। याचिका में यह तर्क दिया गया कि यदि सरकार समय रहते चिकित्सा हस्तक्षेप नहीं करती और वांगचुक की जान चली जाती है, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता होगी।

 

याचिका में क्या मांग की गई है?

याचिका में सोनम वांगचुक को तत्काल किसी सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही डॉक्टरों की निगरानी में जरूरी पोषक तत्व, विटामिन और खनिज उपलब्ध कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर तरल आहार के जरिए फोर्स-फीडिंग कराने का निर्देश देने की अपील की गई है।

फोर्स-फीडिंग का अर्थ किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध भोजन देना भर नहीं है। ऐसे मामलों में अदालत को व्यक्ति की सहमति, स्वास्थ्य की गंभीरता, जीवन के अधिकार और चिकित्सा नैतिकता के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। फिलहाल हाईकोर्ट ने इस मांग पर कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है। याचिका में लगाए गए ‘दो दिन से अधिक जीवित न रह पाने’ जैसे दावे याचिकाकर्ता के कथन हैं, स्वतंत्र चिकित्सकीय निष्कर्ष नहीं।

 

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?

मामला मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के सामने सूचीबद्ध हुआ। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्य बहिष्कार के कारण संबंधित सरकारी पक्ष की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद अदालत ने मामले को अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए कहा कि याचिका पर विचार किया जाएगा और अधिकारियों से तत्काल निर्देश लेने को कहा जाएगा।

अदालत ने रजिस्ट्री को आदेश की सूचना उसी दिन संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का निर्देश भी दिया। बाद की रिपोर्टों के अनुसार हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति तथा अब तक उठाए गए कदमों पर जवाब मांगा है।

 

Cockroach Janta Party क्या है?

Cockroach Janta Party स्वयं को युवाओं द्वारा और युवाओं के लिए बनाया गया राजनीतिक एवं सामाजिक मंच बताती है। इसका नेतृत्व अभिजीत दीपके कर रहे हैं। संगठन बेरोजगारी, शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय है।

CJP का जंतर-मंतर आंदोलन वांगचुक के अनशन से पहले शुरू हुआ था। 15 जुलाई को संगठन का प्रदर्शन 25वें दिन में और वांगचुक का अनशन 18वें दिन में पहुंचा। संगठन ने 20 जुलाई, संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, ‘चलो संसद’ मार्च का भी ऐलान किया है। इसके अलावा 16 जुलाई को वांगचुक के समर्थन में एक दिवसीय सामूहिक भूख हड़ताल आयोजित करने की घोषणा की गई।

राजनीतिक समर्थन भी बढ़ा

वांगचुक के अनशन और CJP आंदोलन को कई विपक्षी नेताओं का समर्थन मिला है। उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं ने आंदोलन की मांगों को समर्थन दिया या वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है।

संगठन ने राहुल गांधी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और अन्य दलों के नेताओं को भी जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से संवाद करने का निमंत्रण दिया है। 1,800 से अधिक सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक हस्तियों ने वांगचुक से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की है।

 

फोर्स-फीडिंग की मांग पर क्यों उठ सकते हैं कानूनी सवाल?

याचिका का सबसे संवेदनशील हिस्सा वांगचुक को जबरन तरल आहार देने की मांग है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है। एक ओर राज्य की जिम्मेदारी नागरिक के जीवन को बचाना है, वहीं दूसरी ओर किसी सक्षम वयस्क की शारीरिक स्वायत्तता और चिकित्सा उपचार स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार भी महत्वपूर्ण होता है।

अदालत को यह देखना होगा कि वांगचुक निर्णय लेने की स्थिति में हैं या नहीं, उनकी जान पर कितना तत्काल खतरा है और क्या उनसे सहमति लेकर उपचार की कोई कम प्रतिबंधात्मक व्यवस्था संभव है। इसलिए अस्पताल में भर्ती और फोर्स-फीडिंग एक ही बात नहीं हैं। अदालत चिकित्सा जांच का आदेश दे सकती है, लेकिन जबरन भोजन देने का निर्णय अलग कानूनी और नैतिक कसौटियों पर परखा जाएगा।

 

सरकार के सामने अब क्या विकल्प हैं?

हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद केंद्र और दिल्ली सरकार को यह बताना पड़ सकता है कि वांगचुक की नियमित चिकित्सा जांच की जा रही है या नहीं, जंतर-मंतर पर किस तरह की आपात स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है और उनकी स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल पहुंचाने की क्या योजना है।

सरकार आंदोलनकारियों से संवाद शुरू करने, स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित करने और परिवार या प्रतिनिधियों की मौजूदगी में नियमित स्वास्थ्य रिपोर्ट तैयार कराने जैसे कदम भी उठा सकती है। इससे एक ओर जीवन की रक्षा की संवैधानिक जिम्मेदारी पूरी होगी और दूसरी ओर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचा जा सकेगा।

FAQs:

दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि लंबे समय से जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के कारण उनके जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

याचिका में मांग की गई है कि सोनम वांगचुक को तुरंत किसी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए, उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और यदि जरूरत पड़े तो तरल आहार, पोषक तत्व, विटामिन एवं खनिज देकर उनकी जान बचाने के लिए चिकित्सकीय कदम उठाए जाएं।

सोनम वांगचुक कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में Cockroach Janta Party (CJP) के आंदोलन के समर्थन में 28 जून 2026 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा विवाद में जवाबदेही तय करने की है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर सुनवाई स्वीकार की और केंद्र सरकार से आवश्यक निर्देश लेने को कहा। सरकारी पक्ष की अनुपस्थिति के कारण अदालत ने मामले की सुनवाई अगले दिन के लिए स्थगित कर दी तथा रजिस्ट्री को आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों तक तत्काल पहुंचाने का निर्देश दिया।

हाँ। याचिका में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि सोनम वांगचुक को सरकारी अस्पताल में भर्ती कर उनकी नियमित चिकित्सा निगरानी की जाए और उनकी जान बचाने के लिए आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाए।