दक्षिण कोरिया में लोकतंत्र की बड़ी परीक्षा: पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल को मार्शल लॉ मामले में 5 साल की जेल

संदर्भ :

पूर्व यून सुक-योल को दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने मार्शल लॉ लागू करने के असफल प्रयास से जुड़े मामले में 5 साल की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला देश की राजनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना के रूप में देखा जा रहा है।


यह पहली बार हुआ जब दक्षिण कोरिया के किसी कार्यरत राष्ट्रपति को गिरफ्तार किया गया, और बाद में दोषी ठहराया गया। यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सत्ता, संविधान और कानून के शासन के बीच संतुलन की सीमाओं को स्पष्ट करता है।

South Korea democracy faces a major test

मार्शल लॉ विवाद की पृष्ठभूमि

यून सुक-योल ने अपने कार्यकाल के दौरान एक समय मार्शल लॉ घोषित करने का प्रयास किया था। उनका तर्क था कि विपक्षी दल सरकार के कामकाज को बाधित कर रहे थे और प्रशासनिक व्यवस्था ठप हो रही थी।


हालाँकि, विपक्ष और कानूनी विशेषज्ञों ने इसे संविधान का दुरुपयोग बताया। दक्षिण कोरिया जैसे लोकतांत्रिक देश में, जहाँ सेना और कार्यपालिका पर कड़ा नागरिक नियंत्रण है, मार्शल लॉ को अंतिम विकल्प माना जाता है।

 

अदालत का फैसला और आरोप

शुक्रवार को सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने यून सुक-योल को दोषी ठहराते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति पद की शक्ति का दुरुपयोग किया।


अदालत ने पाया कि यून ने राष्ट्रपति सुरक्षा सेवा का इस्तेमाल करके वैध गिरफ्तारी वारंट के क्रियान्वयन को रोका। यह वारंट अदालत द्वारा विधिवत जारी किया गया था ताकि मार्शल लॉ की घोषणा से जुड़े मामलों की जाँच की जा सके।

 

तीन न्यायाधीशों की पीठ की ओर से फैसला पढ़ते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि- यून ने राष्ट्रपति के रूप में अपने प्रभाव का उपयोग व्यक्तिगत सुरक्षा और स्वार्थ के लिए किया, जिससे राज्य के अधिकारियों को निजी बल की तरह इस्तेमाल किया गया।

 

गिरफ्तारी की असाधारण घटना

यून सुक-योल को पिछले वर्ष 3,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में गिरफ्तार किया गया था। यह दक्षिण कोरिया के इतिहास में पहली बार था जब किसी मौजूदा राष्ट्रपति को इतनी बड़ी कार्रवाई के तहत हिरासत में लिया गया।

इस घटना ने पूरे देश में बहस छेड़ दी कि क्या लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति-चाहे वह राष्ट्रपति ही क्यों न हो-कानून से ऊपर हो सकता है।

 

संवैधानिक अदालत की भूमिका

इससे पहले, अप्रैल में संवैधानिक न्यायालय (दक्षिण कोरिया) ने यून सुक-योल को राष्ट्रपति पद से हटाने का आदेश दिया था।
अदालत ने कहा कि उन्होंने अपने पद के संवैधानिक दायित्वों का उल्लंघन किया और लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरे में डाला।

यह फैसला कार्यपालिका पर न्यायपालिका की सर्वोच्चता को रेखांकित करता है।

 

यून सुक-योल का पक्ष और अपील

यून सुक-योल ने अदालत में दलील दी कि राष्ट्रपति के रूप में उन्हें मार्शल लॉ घोषित करने का अधिकार है और उनका उद्देश्य देश को विपक्षी अवरोध से बचाना था। हालाँकि, अदालत ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया।

फैसले के तुरंत बाद यून की वकील यू जंग-ह्वा ने कहा कि यह निर्णय राजनीतिक रूप से प्रेरित है और वे इसके खिलाफ अपील करेंगे।

 

मौत की सजा की संभावना?

यह मामला यहीं समाप्त नहीं होता। यून सुक-योल के खिलाफ एक अलग मुकदमा भी चल रहा है, जिसमें उन पर बिना औचित्य मार्शल लॉ घोषित कर विद्रोह की साजिश रचने का आरोप है।
यदि वे इस मामले में दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें मृत्युदंड तक हो सकता है, जो इस संकट की गंभीरता को और बढ़ाता है।

 

दक्षिण कोरिया के लोकतंत्र पर प्रभाव

दक्षिण कोरिया को एशिया के सबसे मजबूत लोकतंत्रों में गिना जाता है। यह मामला दर्शाता है कि-

  • लोकतंत्र में सत्ता सीमित होती है
  • राष्ट्रपति भी कानून के अधीन होता है
  • न्यायपालिका स्वतंत्र और प्रभावी भूमिका निभा सकती है

यह फैसला भविष्य के नेताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन करने की कीमत चुकानी पड़ेगी

 

वैश्विक संदर्भ और तुलना

दुनिया भर में लोकतंत्रों में सत्ता के केंद्रीकरण और आपात शक्तियों के दुरुपयोग पर बहस चल रही है। दक्षिण कोरिया का यह उदाहरण बताता है कि मजबूत संस्थाएँ होने पर लोकतंत्र आत्म-सुधार की क्षमता रखता है।

यह मामला अन्य देशों के लिए भी एक नजीर बन सकता है, जहाँ कार्यपालिका की शक्ति को सीमित करने की जरूरत महसूस की जाती है।

 

निष्कर्ष :

पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल को मिली सजा केवल एक व्यक्ति का दंड नहीं है, बल्कि यह कानून के शासन और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत का प्रतीक है।

दक्षिण कोरिया ने यह दिखा दिया कि चाहे पद कितना ही बड़ा क्यों न हो, संविधान और अदालतों से ऊपर कोई नहीं। यह फैसला देश के लोकतांत्रिक भविष्य को मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।

 

 

 

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न


दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल के मामले के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. उन्हें मार्शल लॉ के असफल प्रयास से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया।
  2. दक्षिण कोरिया में पहली बार किसी कार्यरत राष्ट्रपति को गिरफ्तार किया गया।
  3. उन्हें केवल संवैधानिक अदालत ने सजा सुनाई।

सही कथनों का चयन कीजिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

 

 

मुख्य परीक्षा प्रश्न (सामान्य अध्ययन – II)

दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल को मार्शल लॉ से जुड़े मामले में सजा मिलना लोकतंत्र में सत्ता और कानून के शासन के संबंध को दर्शाता है। इस संदर्भ में कार्यपालिका की सीमाएँ और न्यायपालिका की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

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