पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच एक नई और गंभीर चिंता सामने आई है। अमेरिकी खुफिया सूत्रों के मुताबिक ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री बारूदी सुरंगें (नेवल माइंस) बिछानी शुरू कर दी हैं।
खुफिया रिपोर्ट से जुड़े दो लोगों के अनुसार, फिलहाल इस क्षेत्र में कुछ दर्जन माइंस ही लगाई गई हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास ऐसे जहाजों और छोटी नावों का बड़ा बेड़ा मौजूद है, जिनकी मदद से वह बहुत कम समय में सैकड़ों माइंस समुद्र में तैनात कर सकता है।
अगर ऐसा होता है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। यह पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और समुद्री यातायात को प्रभावित कर सकता है।
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग माना जाता है। इस रास्ते से दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या खतरा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) क्यों है इतना महत्वपूर्ण
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) ईरान के दक्षिणी तट और ओमान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
यह रास्ता लगभग 160 किलोमीटर लंबा है और सबसे संकरे हिस्से में इसकी चौड़ाई करीब 34 किलोमीटर रह जाती है। यही वजह है कि इसे रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील “चोक पॉइंट” कहा जाता है।
दुनिया के बड़े-बड़े तेल टैंकर इसी मार्ग से होकर पश्चिम एशिया से एशिया, यूरोप और अमेरिका तक तेल और गैस पहुंचाते हैं।
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, इराक और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का ज्यादातर कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के बाजारों तक जाता है।
यही कारण है कि यदि यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
ईरान की सैन्य भूमिका और रणनीति
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बड़े हिस्से पर ईरान की सैन्य मौजूदगी है। यहां ईरान की नियमित नौसेना के साथ-साथ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) भी सक्रिय है।
यह बल छोटे जहाजों, तेज नावों, मिसाइल सिस्टम और बारूदी सुरंगों के जरिए समुद्री युद्ध की रणनीति अपनाने के लिए जाना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास ऐसी कई छोटी नावें हैं, जिनकी मदद से वह गुप्त तरीके से माइंस समुद्र में बिछा सकता है। कई बार ये नावें दो या तीन माइंस लेकर निकलती हैं और उन्हें जहाजों के रास्ते में छोड़ देती हैं।
इसी वजह से पश्चिमी देशों को आशंका है कि अगर तनाव बढ़ता है तो ईरान इस जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश कर सकता है।
अमेरिका की चेतावनी
इस बीच अमेरिका ने ईरान की संभावित गतिविधियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर ईरान ने वास्तव में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में माइंस बिछाई हैं तो उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी देते हुए लिखा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो ईरान को गंभीर सैन्य परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
ट्रंप ने कहा कि अगर माइंस नहीं हटाई गईं तो अमेरिका की प्रतिक्रिया पहले से कहीं ज्यादा कठोर हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान इन्हें हटा देता है तो यह तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम होगा।
अमेरिकी कार्रवाई: कई जहाज नष्ट
तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने भी कार्रवाई की है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार 10 मार्च को अमेरिकी सैन्य बलों ने ऐसे 16 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया जो माइंस बिछाने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते थे।

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि इनमें से 10 जहाज ऐसे थे जो फिलहाल सक्रिय नहीं थे लेकिन माइंस बिछाने की क्षमता रखते थे।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई “पहले से बचाव” के तौर पर की गई ताकि समुद्री मार्ग सुरक्षित रखा जा सके।
नेवल माइंस क्या होती हैं
समुद्री बारूदी सुरंगें यानी नेवल माइंस पानी के भीतर रखे जाने वाले विस्फोटक उपकरण होते हैं। इन्हें इस तरह डिजाइन किया जाता है कि जब कोई जहाज या पनडुब्बी इनके पास से गुजरती है तो ये फट जाती हैं।
इनका इस्तेमाल दुश्मन जहाजों को नुकसान पहुंचाने या किसी समुद्री क्षेत्र को बंद करने के लिए किया जाता है।
नेवल माइंस का इस्तेमाल कई युद्धों में हुआ है और इन्हें समुद्र में सबसे प्रभावी लेकिन कम लागत वाले हथियारों में माना जाता है।
समुद्री माइंस का इतिहास
समुद्र में विस्फोटक लगाने का विचार बहुत पुराना है। इसका शुरुआती प्रयोग अमेरिकी स्वतंत्रता युद्ध के समय हुआ था।
उस दौर में येल विश्वविद्यालय के छात्र David Bushnell ने यह खोज की थी कि बारूद को पानी के भीतर भी विस्फोट कराया जा सकता है।
इसके बाद समय के साथ समुद्री माइंस की तकनीक और भी उन्नत होती गई और आज यह आधुनिक नौसैनिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
समुद्री माइंस के प्रकार
समुद्री माइंस कई तरह की होती हैं। इन्हें अलग-अलग तकनीक और उद्देश्य के आधार पर बनाया जाता है।

- लिम्पेट माइंस
लिम्पेट माइंस छोटे आकार के विस्फोटक होते हैं। इन्हें गोताखोर किसी जहाज के ढांचे से चिपका देते हैं।
इनका नाम समुद्री जीव “लिम्पेट” के नाम पर रखा गया है जो चट्टानों से चिपक कर रहते हैं।
ये माइंस आमतौर पर जहाज को पूरी तरह डुबाने के बजाय उसे नुकसान पहुंचाने या रोकने के लिए इस्तेमाल होती हैं।
- इंफ्लुएंस माइंस
इन माइंस में सेंसर लगे होते हैं। ये जहाज के आसपास आने पर उसकी आवाज, चुंबकीय क्षेत्र या पानी के दबाव में बदलाव को पहचान लेती हैं और विस्फोट कर देती हैं।
कुछ माइंस जहाज के प्रोपेलर की आवाज पहचानती हैं जबकि कुछ धातु के बड़े ढांचे से बनने वाले चुंबकीय संकेतों को पकड़ती हैं।
- मूरड माइंस
ये माइंस समुद्र की तलहटी से एक केबल के जरिए बंधी होती हैं और पानी में एक निश्चित गहराई पर तैरती रहती हैं।
जब कोई जहाज उनसे टकराता है तो विस्फोट हो जाता है। इन्हें अक्सर संकरे समुद्री रास्तों को बंद करने के लिए लगाया जाता है।
- बॉटम माइंस
ये माइंस समुद्र की तलहटी पर ही पड़ी रहती हैं। इनमें सेंसर लगे होते हैं जो ऊपर से गुजरते जहाज के कंपन, आवाज या दबाव को पहचान लेते हैं।
जैसे ही जहाज ऊपर से गुजरता है, माइंस विस्फोट कर देती हैं।
इनमें आमतौर पर ज्यादा शक्तिशाली विस्फोटक होते हैं क्योंकि इनका धमाका पानी के नीचे से ऊपर की ओर होता है।
ईरान के पास कितनी माइंस हो सकती हैं
रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान के पास हजारों समुद्री माइंस मौजूद हैं।
एक अमेरिकी शोध संस्था Center for International Maritime Security के अनुसार महामारी से पहले ईरान के पास लगभग 2,000 से 5,000 माइंस होने का अनुमान था।
इनमें से कई माइंस ईरान ने खुद बनाई हैं, जबकि कुछ तकनीक रूस, चीन या उत्तर कोरिया से प्रेरित मानी जाती है।
समुद्री माइंस इतनी खतरनाक क्यों
समुद्री माइंस को “वेटिंग वेपन” यानी इंतजार करने वाला हथियार कहा जाता है।
ये पानी में लंबे समय तक छिपी रह सकती हैं और सही मौके पर विस्फोट करती हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से समुद्री माइंस ने नौसेना के जहाजों को जितना नुकसान पहुंचाया है, उतना किसी अन्य हथियार ने नहीं किया।
इतिहास का एक उदाहरण
1988 में ईरान-इराक युद्ध के दौरान एक ईरानी माइंस से अमेरिकी युद्धपोत USS Samuel B. Roberts गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था।
हालांकि जहाज डूबा नहीं, लेकिन उसकी मरम्मत में लगभग 96 मिलियन डॉलर खर्च हुए थे।
दिलचस्प बात यह है कि जिस माइंस से हमला हुआ उसकी कीमत केवल करीब 1,500 डॉलर थी।
समुद्र में माइंस हटाना क्यों मुश्किल
समुद्र में माइंस ढूंढना और हटाना बेहद कठिन काम होता है।
जमीन पर लैंडमाइंस खोजने का काम सीमित क्षेत्र में होता है, लेकिन समुद्र में माइंस कहीं भी बहकर जा सकती हैं।
इसके अलावा समुद्र की गहराई और पानी की धाराएं भी इस काम को और कठिन बना देती हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध में भी दिखा खतरा
हाल के वर्षों में समुद्री माइंस का खतरा Russia-Ukraine War के दौरान भी देखा गया है।
काला सागर में दोनों पक्षों ने बड़ी संख्या में माइंस बिछाई हैं, जिससे समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है।
अगर होरमुज़ में माइंस बिछी तो क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बड़ी संख्या में माइंस बिछा दी जाती हैं तो कई गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
सबसे पहले, तेल और गैस ले जाने वाले बड़े जहाजों के लिए रास्ता खतरनाक हो जाएगा।
इन जहाजों में ज्वलनशील ईंधन होता है, इसलिए किसी भी विस्फोट से बड़ी आग और पर्यावरणीय नुकसान हो सकता है।
इसके अलावा समुद्री व्यापार रुक सकता है और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
जहाजों की आवाजाही पहले ही कम
ईरान से जुड़ी मौजूदा लड़ाई शुरू होने के बाद इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में काफी गिरावट आई है।
संघर्ष से पहले यहां से हर दिन औसतन 150 से ज्यादा जहाज गुजरते थे।
लेकिन हाल के दिनों में यह संख्या घटकर लगभग 13 जहाज प्रतिदिन रह गई है।
क्या यह आखिरी रणनीति हो सकती है
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को माइंस से भर देना ईरान के लिए एक बड़ा और जोखिम भरा कदम होगा।
ऐसा कदम आमतौर पर तब उठाया जाता है जब किसी देश के पास विकल्प कम रह जाते हैं।
क्योंकि इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तेज हो सकती है बल्कि सीधे सैन्य टकराव की संभावना भी बढ़ सकती है।
आगे क्या हो सकता है
फिलहाल स्थिति बेहद तनावपूर्ण है और दुनिया की नजरें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर टिकी हुई हैं।
अगर ईरान माइंस हटाता है तो तनाव कम हो सकता है। लेकिन यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और सुरक्षा पर पड़ सकता है।

