हाल ही में, महाराष्ट्र सरकार ने इस वर्ष चार वर्षीय सैन्य कार्यकाल पूरा करने वाले अग्निवीरों के पुनर्वास उपायों की सिफारिश करने के लिए कर्नल (सेवानिवृत्त) दीपक थोंगे के नेतृत्व में एक अध्ययन समूह का गठन किया है। यह पहल सेवा समाप्ति के बाद सुचारू संक्रमण सुनिश्चित करने और प्रशिक्षित युवाओं को सार्थक अवसर प्रदान करने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
महाराष्ट्र सरकार का अग्निवीर पुनर्वास अध्ययन समूह
- महाराष्ट्र सरकार ने जनवरी 2026 में एक विशेष अध्ययन समूह का गठन किया है, जिसका उद्देश्य अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के पुनर्वास के लिए व्यवस्थित समाधान तैयार करना है। यह पहल किसी भी राज्य सरकार द्वारा की गई पहली और संरचित कोशिश है।
- अग्निपथ मॉडल के अनुसार, चार वर्ष की सेवा के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित कैडर में स्थान मिलता है, जबकि शेष 75 प्रतिशत युवाओं को सेवा से मुक्त कर दिया जाता है। इस संदर्भ में पुनर्वास रणनीति अत्यावश्यक हो जाती है। महाराष्ट्र से संबंधित पहला बैच जिसमें 2,839 अग्निवीर शामिल हैं, वे अक्टूबर–नवंबर 2026 में अपनी सेवा अवधि पूरी करेंगे। सेवा के बाद इन युवाओं के रोजगार, कौशल उन्नयन और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए राज्य-स्तरीय तैयारी आवश्यक थी, जिसे यह अध्ययन समूह पूरा करेगा।
- अध्ययन समूह को तीन मुख्य लक्ष्यों के साथ स्थापित किया गया है। पहला उद्देश्य, सरकारी और अर्ध-सरकारी क्षेत्रों में अग्निवीरों के लिए नई रोजगार संभावनाओं की पहचान करना है। इसमें पुलिस बल, राज्य राखीव पोलीस, वन विभाग, अग्निशमन सेवाएँ और अन्य सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों को शामिल किया गया है। दूसरा उद्देश्य, निजी क्षेत्र में ऐसे अवसर ढूँढना है जहाँ सैन्य अनुशासन और तकनीकी प्रशिक्षण उन्हें बेहतर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकते हैं, जैसे लॉजिस्टिक्स, एविएशन सपोर्ट, औद्योगिक सुरक्षा, तकनीकी सेवाएँ और प्रबंधन भूमिकाएँ। तीसरा उद्देश्य, अग्निवीरों को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रशिक्षित करना है, ताकि वे छोटे व्यवसाय शुरू कर सकें और इसके लिए आवश्यक वित्तीय सहायता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम मिल सके।
- इस पैनल में अनुभवी और वरिष्ठ पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल किए गए हैं, ताकि पुनर्वास मॉडल यथार्थपरक और व्यावहारिक हो। समिति की अध्यक्षता कर्नल (सेवानिवृत्त) दीपक थोन्गे कर रहे हैं, जो सैनिक कल्याण विभाग के निदेशक भी हैं। इसके अलावा स्क्वॉड्रन लीडर (सेवानिवृत्त) विद्यसागर कोरडे, मेजर (सेवानिवृत्त) सईदा फिरासत, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) आर. आर. निम्भोरकर, एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) नितिन शंकर वैद्य और रियर एडमिरल (सेवानिवृत्त) आशीष कुलकर्णी जैसे कई अनुभवी अधिकारी इस पैनल का हिस्सा हैं। लेफ्टिनेंट कमांडर (सेवानिवृत्त) ओंकार कपले इस समिति के सदस्य-सचिव के रूप में कार्य कर रहे हैं।
- महाराष्ट्र सरकार ने इस अध्ययन समूह को तीन महीने की निश्चित समयसीमा दी है, जिसके अनुसार समिति को अप्रैल 2026 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
अग्निपथ योजना क्या है?
- अग्निपथ योजना भारत सरकार द्वारा 14 जून 2022 को शुरू की गई एक आधुनिक और अल्पकालिक सैन्य भर्ती व्यवस्था है। इस मॉडल के माध्यम से सेना, नौसेना और वायुसेना में युवाओं को सीमित अवधि के लिए शामिल किया जाता है।
- योजना का मुख्य उद्देश्य सशस्त्र बलों में नई ऊर्जा, तकनीकी समझ और युवाशक्ति को शामिल करना है ताकि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में सेनाओं की तैयारी और दक्षता दोनों मजबूत हों।
- सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से जवानों की औसत आयु 32 वर्ष से घटाकर लगभग 26 वर्ष करना है, जिससे सेना अधिक युवा और चुस्त-दुरुस्त बने। हर वर्ष 45,000–50,000 युवाओं को भर्ती करने की रूपरेखा तय की गई है, ताकि देश के पास अनुशासित और प्रशिक्षित युवाओं का मजबूत समूह तैयार हो सके।
- अग्निपथ योजना में 17.5 वर्ष से 21 वर्ष तक के युवा आवेदन कर सकते हैं। 2022 के पहले बैच के लिए अधिकतम आयु सीमा में एक बार के लिए 23 वर्ष तक की छूट दी गई थी। उम्मीदवारों को निर्धारित चिकित्सा मानकों, शारीरिक दक्षता और मानसिक फिटनेस को पूरा करना आवश्यक है।
- इस योजना के तहत चयनित युवा चार वर्ष तक ‘अग्निवीर’ के रूप में सेवा करते हैं। इसमें लगभग छह महीने का सैन्य प्रशिक्षण और शेष अवधि सक्रिय सेवा की होती है। सेवा के अंत में, प्रत्येक बैच के केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में 15 वर्ष की अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलता है। बाकी अग्निवीर चार वर्ष पूरा होने पर सम्मानपूर्वक मुक्त किए जाते हैं।
- अग्निवीरों को ₹30,000 से बढ़ते हुए ₹40,000 प्रति माह का पैकेज मिलता है। इसमें से 30 प्रतिशत राशि “सेवा निधि” में जमा होती है, जिसे सरकार समान योगदान के साथ मिलाती है। चार वर्ष पूरे होने पर अग्निवीरों को लगभग ₹10.04 लाख का कर-मुक्त सेवा निधि भुगतान मिलता है। ड्रेस भत्ता, यात्रा भत्ता और अन्य सैन्य सुविधाएँ भी प्रदान की जाती हैं।
- कर्तव्य के दौरान मृत्यु की स्थिति में परिवार को ₹1 करोड़ से अधिक का सुरक्षा पैकेज, जबकि सेवा-जनित विकलांगता पर ₹44 लाख तक का मुआवज़ा दिया जाता है।
- अग्निवीर सेना में युद्धक, तकनीकी और सहयोगी भूमिकाओं में सेवा करते हैं। उनकी जिम्मेदारियाँ नियमित सैनिकों के समान होती हैं। केवल मेडिकल ब्रांच के तकनीकी कैडर को इस मॉडल से बाहर रखा गया है। चार वर्ष की सेवा उन्हें उच्च अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और आधुनिक सैन्य कौशल प्रदान करती है।
अग्निवीर पुनर्वास के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ
- महाराष्ट्र सरकार द्वारा अग्निवीरों को 10% क्षैतिज आरक्षण देने की पहल एक बड़े कानूनी परीक्षण से गुजर सकती है। राज्य में पहले से लागू सामाजिक श्रेणियों के कुल आरक्षण लगभग 50% की संवैधानिक सीमा तक पहुँच चुके हैं। ऐसे में अलग से अग्निवीर वर्ग जोड़ना न्यायालयों में चुनौती का कारण बन सकता है।
- राज्य स्तर पर अग्निवीरों को SRPF और महाराष्ट्र पुलिस में शामिल करने के लिए प्रशिक्षण मानकों का सामंजस्य अहम है। केंद्र सरकार ने CAPF भर्ती में कुछ नियम आसान किए हैं, लेकिन राज्य को यह तय करना होगा कि चार वर्ष की सैन्य ट्रेनिंग नागरिक कानून-व्यवस्था से जुड़े कार्यों—जैसे भीड़ प्रबंधन, कानूनी प्रक्रियाएँ और सामुदायिक संपर्क—के लिए पर्याप्त है या नहीं।
- अग्निवीरों को ESM (पूर्व सैनिक) का दर्जा न मिलने से वे ECHS स्वास्थ्य योजनाओं और CSD सुविधाओं से वंचित हैं। इससे सेवा पूर्ण होने के बाद “पुनर्वास” का अनुभव अधूरा महसूस हो सकता है। राज्य सरकार को अपने स्तर पर ऐसे स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सहायता कार्यक्रम तैयार करने होंगे जो इन युवाओं को सम्मानजनक समर्थन दे सकें।
- सरकार द्वारा मिलने वाले स्किल सर्टिफिकेट तभी उपयोगी होंगे जब महाराष्ट्र के औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्रों—जैसे पुणे, मुंबई और नासिक—उन्हें नागरिक डिग्री या तकनीकी योग्यताओं के तुल्य मानें। यह चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि सैन्य कौशल और निजी क्षेत्र की अपेक्षाओं में अंतर अक्सर नौकरी की स्थिरता को प्रभावित कर देता है।
- यदि राजनीतिक स्तर पर किए जा रहे वादों के अनुसार सभी अग्निवीरों के लिए स्थायी सरकारी नौकरियाँ सुनिश्चित की जाती हैं, तो यह राज्य के वेतन और पेंशन बजट पर भारी असर डाल सकता है। महाराष्ट्र पहले से राजकोषीय घाटे की चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे में नियमित भर्ती चक्रों को बनाए रखते हुए अग्निवीरों के लिए स्थायी पदों का प्रबंध करना एक जटिल प्रशासनिक निर्णय बन जाता है।
