भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में मतदाता सूची की शुद्धता और समावेशन (inclusion) अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसी संदर्भ में पश्चिम बंगाल में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विवाद अब देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था, Supreme Court of India के समक्ष है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई में अदालत ने कई अहम निर्देश दिए, जिनका सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों, प्रशासनिक संतुलन और संघीय ढांचे पर पड़ सकता है।
सुनवाई की पृष्ठभूमि
यह मामला पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा है, जिसे Election Commission of India द्वारा लागू किया जा रहा है। राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल का आरोप है कि यह प्रक्रिया बड़े पैमाने पर मतदाताओं को सूची से बाहर करने (mass disenfranchisement) का माध्यम बन सकती है। इस मुद्दे पर स्वयं मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने याचिकाकर्ता के रूप में अदालत का दरवाजा खटखटाया।
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
4 फरवरी को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूछा था कि वह SIR प्रक्रिया में सहायता के लिए कितने Group-B अधिकारी उपलब्ध करा सकती है। उस दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुईं और आरोप लगाया कि बंगाल को “टारगेट” किया जा रहा है। उनके अनुसार, SIR का उद्देश्य नए मतदाताओं को जोड़ना नहीं, बल्कि मौजूदा मतदाताओं के नाम हटाना है।
आज की सुनवाई और अदालत की पीठ
9 फरवरी को इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) Surya Kant, न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi और न्यायमूर्ति NV Anjaria की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, चुनाव आयोग और विभिन्न याचिकाकर्ताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
ममता बनर्जी की आपत्तियाँ
मुख्यमंत्री ने अदालत में कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव 2025 की मौजूदा मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएं, न कि SIR के बाद जारी होने वाली नई सूची पर। उन्होंने आरोप लगाया कि:
- “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी लिस्ट” के नाम पर मामूली वर्तनी की गलतियों पर नोटिस भेजे जा रहे हैं।
- माइक्रो-ऑब्जर्वर्स (Micro-Observers) की नियुक्ति भाजपा-शासित राज्यों से की गई है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
- यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रेरित है और आम लोगों के मताधिकार को कमजोर कर सकती है।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने पहले SIR प्रक्रिया में पर्याप्त सहयोग नहीं किया, जिसके कारण माइक्रो-ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति करनी पड़ी। आयोग के अनुसार, इन अधिकारियों की भूमिका केवल सहायक है और अंतिम निर्णय Electoral Registration Officer (ERO) या Assistant ERO (AERO) द्वारा ही लिया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के अहम निर्देश
सुनवाई के अंत में अदालत ने संतुलन बनाने की कोशिश करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए:
- 8505 Group-B अधिकारियों की तैनाती – राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि सूची में शामिल सभी अधिकारी अगले दिन शाम 5 बजे तक संबंधित ERO/DEO को रिपोर्ट करें।
- माइक्रो-ऑब्जर्वर्स की भूमिका सीमित – अदालत ने स्पष्ट किया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर्स या राज्य सरकार के अधिकारी केवल सहायता करेंगे, अंतिम निर्णय ERO/AERO का ही होगा।
- समय-सीमा में राहत – 14 फरवरी की समय-सीमा के बाद भी कम से कम एक सप्ताह अतिरिक्त समय दस्तावेजों की जांच के लिए दिया गया।
- प्रशिक्षण और समन्वय – नए तैनात अधिकारियों को एक-दो दिन का संक्षिप्त प्रशिक्षण देकर प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
लोकतंत्र और संघवाद की बड़ी बहस
यह मामला केवल बंगाल तक सीमित नहीं है। यह प्रश्न उठाता है कि:
- क्या चुनावी प्रक्रियाओं में केंद्र और राज्य के बीच संतुलन बना हुआ है?
- क्या तकनीकी प्रक्रियाएँ (डेटा, सॉफ्टवेयर, सूची) लोकतांत्रिक अधिकारों पर हावी हो सकती हैं?
- और सबसे अहम, क्या मतदाता सूची का पुनरीक्षण समावेशन (inclusion) के बजाय बहिष्करण (exclusion) का साधन बन रहा है?
निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई भारतीय लोकतंत्र के लिए एक निर्णायक क्षण है। अदालत ने न तो चुनाव आयोग को पूरी छूट दी और न ही राज्य सरकार के सभी आरोपों को स्वीकार किया। इसके बजाय, उसने एक मध्य मार्ग अपनाते हुए प्रक्रिया की पारदर्शिता, समय-सीमा और प्रशासनिक संतुलन सुनिश्चित करने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में इस मामले का प्रभाव न केवल पश्चिम बंगाल के चुनावों पर, बल्कि देशभर में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पर भी पड़ेगा।
UPSC प्रीलिम्स प्रश्न
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
- Special Intensive Revision (SIR) का उद्देश्य केवल नए मतदाताओं को जोड़ना है।
- माइक्रो-ऑब्जर्वर्स का अंतिम निर्णय मतदाता सूची में नाम शामिल या हटाने पर होता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया में राज्य सरकार के अधिकारियों की भागीदारी बढ़ाने का निर्देश दिया है।
(a) केवल 3
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
UPSC मेंस प्रश्न
“मतदाता सूची का पुनरीक्षण लोकतंत्र की शुद्धता के लिए आवश्यक है, लेकिन इसका दुरुपयोग मताधिकार को कमजोर कर सकता है।”
पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे विवाद के आलोक में इस कथन की विवेचना कीजिए।
