हिमाचल के CRI कसौली में लॉन्च हुई नई Td वैक्सीन, क्या टीटनेस और डिफ्थीरिया पर लगेगा पूरा ब्रेक?

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (CRI) कसौली में नई Td वैक्सीन की शुरुआत की। यह वैक्सीन टीटनेस और एडल्ट डिफ्थीरिया से बचाव के लिए तैयार की गई है। खास बात यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी है और इसे CRI के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है।

 

कार्यक्रम के दौरान जेपी नड्डा ने कहा कि यह वैक्सीन देश के लिए एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि यह किशोरों, वयस्कों और गर्भवती महिलाओं को टीटनेस और डिफ्थीरिया से सुरक्षा देगी। अभी तक टीटनेस से बचाव के लिए टीटनेस टॉक्सॉइड (TT) वैक्सीन दी जाती थी, लेकिन नई Td वैक्सीन उसे धीरे-धीरे रिप्लेस करेगी। Td वैक्सीन की खासियत यह है कि यह टीटनेस के साथ-साथ डिफ्थीरिया से भी सुरक्षा देती है।

 

नड्डा ने यह भी कहा कि भारत दवाओं और वैक्सीन के क्षेत्र में दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। इसमें CRI कसौली की बड़ी भूमिका रही है। इस संस्थान का इतिहास करीब 120 साल पुराना है और यह लंबे समय से देश के लिए जरूरी टीकों का निर्माण करता रहा है। अब Td वैक्सीन को भी यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के तहत उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे इसे बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सके।

Td vaccine launch India

टीटनेस क्या है और कितना खतरनाक है?

टीटनेस एक बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। यह क्लॉस्ट्रिडियम टेटानी नामक बैक्टीरिया के कारण फैलता है। यह बैक्टीरिया आमतौर पर मिट्टी, धूल और जानवरों की गंदगी में पाया जाता है। जब किसी व्यक्ति को गहरा घाव, कट या चोट लगती है और उस जगह से यह बैक्टीरिया शरीर में चला जाता है, तो संक्रमण शुरू हो सकता है।

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शरीर में जाने के बाद यह बैक्टीरिया एक जहरीला पदार्थ बनाता है, जो नसों को प्रभावित करता है। इसके कारण मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं और दर्दनाक ऐंठन होने लगती है। सबसे पहले जबड़े और गर्दन की मांसपेशियों में जकड़न महसूस होती है। गंभीर स्थिति में मरीज को निगलने और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। तेज बुखार, पसीना और मांसपेशियों में खिंचाव इसके आम लक्षण हैं।

 

डिफ्थीरिया कैसे फैलता है?

डिफ्थीरिया एक और खतरनाक संक्रमण है, जो कोराइनेबैक्टीरियम डिफ्थीरिए नाम के बैक्टीरिया से होता है। यह मुख्य रूप से गले, सांस की नली और कभी-कभी त्वचा को प्रभावित करता है। यह बैक्टीरिया भी शरीर में एक जहरीला टॉक्सिन बनाता है, जो खून के जरिए शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकता है।

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डिफ्थीरिया होने पर गले में मोटी सफेद या ग्रे रंग की परत बन जाती है। गले में दर्द, सूजन, सांस लेने में परेशानी और तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। अगर संक्रमण बढ़ जाए तो यह दिल, नसों और किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है। गंभीर मामलों में मरीज को लकवा या मृत्यु का खतरा भी हो सकता है।

 

Td वैक्सीन क्यों है खास?

Td वैक्सीन इन दोनों बीमारियों से बचाव के लिए बनाई गई है। इसका मकसद केवल संक्रमण को रोकना ही नहीं, बल्कि इससे होने वाली गंभीर जटिलताओं और मौत के खतरे को भी कम करना है। CRI कसौली ने इस वैक्सीन के निर्माण और परीक्षण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

 

सरकार के अनुसार, यह वैक्सीन अब यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के तहत दी जाएगी। इससे देशभर में इसे बड़े स्तर पर उपलब्ध कराया जा सकेगा। दावा किया गया है कि लॉन्च के बाद अप्रैल 2026 तक करीब 55 लाख खुराकें UIP को उपलब्ध कराई जाएंगी। आगे चलकर इसकी आपूर्ति और बढ़ाई जाएगी, ताकि जरूरत के अनुसार राज्यों को डोज मिलती रहे।

 

देश के लिए क्या मायने?

स्वदेशी Td वैक्सीन का लॉन्च होना स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देश में टीकों की उपलब्धता भी मजबूत होगी। खासतौर पर किशोरों, वयस्कों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह अतिरिक्त सुरक्षा कवच साबित हो सकती है।

 

सरकार का कहना है कि नियमित टीकाकरण से टीटनेस और डिफ्थीरिया जैसी बीमारियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे में Td वैक्सीन का शामिल होना इम्युनाइजेशन प्रोग्राम को और मजबूत करेगा।