टेलीग्राम पर सरकार का बड़ा एक्शन! 3000+ पायरेसी चैनल बंद करने का आदेश, क्या टेलीग्राम पर फ्री में मूवी देखना अब पड़ सकता है भारी?

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यह कार्रवाई शिकायत मिलने के बाद की गई है। कई फिल्म प्रोड्यूसर, कंटेंट कंपनियां, ओटीटी प्लेटफॉर्म और नागरिक संगठनों ने सरकार से शिकायत की थी कि टेलीग्राम पर बड़े पैमाने पर पायरेटेड कंटेंट फैलाया जा रहा है।

 

मंत्रालय ने इन शिकायतों की जांच की और पाया कि कई टेलीग्राम चैनल फिल्मों, वेब सीरीज और ऑडियो सामग्री को बिना अनुमति के उपलब्ध करा रहे थे। इसके बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए टेलीग्राम को आदेश जारी किया।

 

11 मार्च को जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि कई टेलीग्राम चैनल ऐसे कंटेंट को साझा कर रहे हैं जो फिल्म स्टूडियो, ओटीटी प्लेटफॉर्म और निर्माताओं के स्वामित्व में है। बिना अनुमति के ऐसा करना कॉपीराइट अधिनियम 1957 का उल्लंघन है।

 

3000 से ज्यादा चैनलों पर कार्रवाई

सरकार की जांच में कुल 3142 टेलीग्राम चैनलों को पायरेटेड कंटेंट साझा करते हुए पाया गया। इन चैनलों पर फिल्मों, वेब सीरीज और ऑडियोबुक के हजारों लिंक मौजूद थे।

 

मंत्रालय की ओर से जारी नोटिस के साथ एक लंबा दस्तावेज भी जोड़ा गया था जिसमें इन सभी चैनलों का विवरण दिया गया है। इसमें चैनल का नाम, उसका यूआरएल, वहां मौजूद पायरेटेड कंटेंट के लिंक और संबंधित फिल्मों या प्रोजेक्ट के नाम भी शामिल हैं।

 

सरकार ने टेलीग्राम से कहा है कि वह इन सभी चैनलों की पहुंच बंद करे और यह कार्रवाई तीन घंटे के भीतर पूरी की जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि ऐसा करते समय किसी भी तरह के डिजिटल सबूत नष्ट नहीं होने चाहिए।

Telegram piracy channels banned

किन फिल्मों और प्लेटफॉर्म का कंटेंट था शामिल

सरकार के दस्तावेज में कई लोकप्रिय फिल्मों और वेब सीरीज का जिक्र किया गया है जिनकी पायरेटेड कॉपी टेलीग्राम चैनलों पर उपलब्ध थी।

 

इनमें KGF Chapter 2, 120 बहादुर, टू मच, परम सुंदरी, कांतारा: ए लीजेंड चैप्टर 1 और भूल चूक माफ जैसी फिल्मों के नाम शामिल बताए गए हैं।

 

इसके अलावा कई ओटीटी प्लेटफॉर्म जैसे अमेजन प्राइम वीडियो, सोनीलिव, जियो हॉटस्टार और शेमारूमी के शो और फिल्मों की पायरेटेड कॉपी भी साझा की जा रही थी।

 

कुछ चैनल ऑडियोबुक की पायरेसी में भी शामिल पाए गए। इनमें ऑडियो प्लेटफॉर्म कुकू एफएम की सामग्री भी अवैध रूप से साझा की जा रही थी।

 

आईटी कानून के तहत दिया गया आदेश

सरकार ने यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 79(3)(b) और आईटी नियम 2021 के तहत की है।

 

इन नियमों के अनुसार अगर किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को सरकार या किसी सक्षम प्राधिकरण की ओर से अवैध सामग्री के बारे में सूचना दी जाती है, तो उसे तुरंत उस सामग्री को हटाना होता है।

 

अगर प्लेटफॉर्म ऐसा नहीं करता तो उसे मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा खत्म हो सकती है। यह सुरक्षा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कानूनी जिम्मेदारी से बचाती है।

 

अगर यह सुरक्षा खत्म हो जाती है तो प्लेटफॉर्म को उस सामग्री के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

 

हाल ही में सख्त किए गए नियम

सरकार ने हाल ही में आईटी नियमों में संशोधन करके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और बढ़ा दी है। 20 फरवरी 2026 से लागू हुए नए नियमों के बाद प्लेटफॉर्म को अवैध सामग्री हटाने के लिए कम समय दिया जा रहा है।

 

इसी वजह से टेलीग्राम को इस मामले में सिर्फ तीन घंटे का समय दिया गया है। पहले ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म को ज्यादा समय मिलता था।

 

सरकार का कहना है कि इन नए नियमों का उद्देश्य इंटरनेट पर फैल रही अवैध सामग्री और पायरेसी को रोकना है।

 

भारत में पायरेसी की बड़ी समस्या

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में ऑनलाइन पायरेसी एक बड़ी समस्या बन चुकी है। MUSO की Piracy Trends and Insight Report 2024 के मुताबिक दुनिया भर में होने वाली पायरेसी ट्रैफिक में भारत की हिस्सेदारी लगभग 8.12 प्रतिशत है।

 

रिपोर्ट के अनुसार भारत से पायरेटेड वेबसाइटों पर करीब 1756 करोड़ विजिट दर्ज किए गए। इस मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर अमेरिका है जिसकी हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत है।

 

यह आंकड़े बताते हैं कि पायरेसी से फिल्म और मनोरंजन उद्योग को बड़ा आर्थिक नुकसान होता है।

 

पायरेटेड कंटेंट देखना भी अपराध

कई लोग टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर मुफ्त में फिल्में और वेब सीरीज देख लेते हैं। उन्हें लगता है कि यह सिर्फ देखने की बात है और इससे कोई कानूनी परेशानी नहीं होगी। लेकिन कानून के अनुसार ऐसा करना भी अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

 

भारत में फिल्म या वेब सीरीज बनाने के बाद उसे दिखाने का अधिकार केवल उसके निर्माता या लाइसेंस प्राप्त प्लेटफॉर्म के पास होता है। अगर कोई व्यक्ति या प्लेटफॉर्म बिना अनुमति के उसे साझा करता है तो यह गैरकानूनी माना जाता है।

 

सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम 2023 के तहत पायरेसी से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल और दो लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

 

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पायरेटेड कंटेंट अपलोड करना ही नहीं बल्कि उसे देखना या साझा करना भी अपराध को बढ़ावा देना माना जा सकता है।

 

सरकार का सख्त संदेश

सरकार की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि ऑनलाइन पायरेसी को लेकर अब सख्त रवैया अपनाया जा रहा है। मनोरंजन उद्योग लंबे समय से इस समस्या को लेकर शिकायत करता रहा है।

 

फिल्म निर्माताओं और ओटीटी कंपनियों का कहना है कि पायरेसी की वजह से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसी कारण वे सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग करते रहे हैं।