डॉनल्ड ट्रम्प का ‘एक्शन मोड’ जारी! एक के बाद एक बर्खास्तगी, अटॉर्नी जनरल के बाद क्या अब काश पटेल और तुलसी गबार्ड की बारी?

अमेरिका की राजनीति इन दिनों एक बार फिर हलचल से भरी हुई है। Donald Trump की सरकार में लगातार हो रहे बड़े फैसलों ने वॉशिंगटन के सियासी माहौल को गरमा दिया है। ताजा घटनाक्रम में ट्रम्प ने अपने अटॉर्नी जनरल Pam Bondi को पद से हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका ईरान के साथ तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहा है और सरकार के अंदर भी कई स्तरों पर मतभेद सामने आ रहे हैं।
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ट्रम्प प्रशासन में कई बड़े पदों पर बैठे लोगों को हटाया जा चुका है। हाल ही में Kristi Noem को भी उनके पद से हटा दिया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ट्रम्प कैबिनेट में यह लगातार बदलाव क्यों हो रहे हैं और क्या यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा?

Trump action mode decisions

पाम बॉन्डी की विदाई: अचानक या पहले से तय?
2 अप्रैल 2026 को ट्रम्प ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि पाम बॉन्डी अब अटॉर्नी जनरल के पद पर नहीं रहेंगी। उन्होंने बयान में कहा कि बॉन्डी ने देश की सेवा ईमानदारी से की है और अब वे निजी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालेंगी। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला अचानक नहीं था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बॉन्डी को हटाने के पीछे कई कारण रहे। सबसे बड़ा मुद्दा न्याय विभाग द्वारा कुछ संवेदनशील मामलों को ठीक से हैंडल न कर पाना बताया जा रहा है। खासकर जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामलों और ट्रम्प के राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई न होने से राष्ट्रपति नाराज बताए जा रहे थे।

Trump action mode decisions

यह भी कहा जा रहा है कि ट्रम्प को यह महसूस हो रहा था कि उनकी टीम अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है, जिससे उनकी राजनीतिक छवि पर असर पड़ रहा है।

 

नए अटॉर्नी जनरल कौन होंगे?

पाम बॉन्डी के जाने के बाद ट्रम्प ने अपने करीबी सहयोगी और पूर्व वकील Todd Blanche को अंतरिम अटॉर्नी जनरल की जिम्मेदारी सौंपी है। टॉड ब्लांश वही वकील हैं जिन्होंने ट्रम्प के खिलाफ चल रहे कई मामलों में उनका बचाव किया था।

इसके अलावा खबरें यह भी हैं कि भविष्य में इस पद के लिए Lee Zeldin का नाम सामने आ सकता है। हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

 

क्या और बड़े नेता भी हटाए जा सकते हैं?

ट्रम्प प्रशासन में उथल-पुथल यहीं खत्म नहीं होती। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प अब कुछ और बड़े अधिकारियों से भी नाराज हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम हैं:

  • Tulsi Gabbard
  • Kash Patel

खबरों के अनुसार, ट्रम्प ने अपने सहयोगियों से गुप्त रूप से चर्चा भी की है कि क्या इन अधिकारियों को हटाया जाना चाहिए। हालांकि अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

 

तुलसी गैबार्ड से नाराजगी क्यों?

तुलसी गैबार्ड के साथ ट्रम्प के मतभेद नए नहीं हैं। ईरान को लेकर दोनों के विचार अलग रहे हैं। गैबार्ड ने पहले कहा था कि ईरान ने अभी तक परमाणु हथियार बनाने का फैसला नहीं किया है, जबकि ट्रम्प का रुख इससे कहीं ज्यादा सख्त है।

इसके अलावा, गैबार्ड पर यह आरोप भी लगा कि उन्होंने अपने एक सहयोगी का बचाव किया, जिसने सरकार की नीति की आलोचना की थी। इससे ट्रम्प और नाराज हो गए।

हालांकि, हाल ही में ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में कहा कि मतभेद होना गलत नहीं है और उन्होंने गैबार्ड पर अभी भी भरोसा जताया। इससे यह साफ है कि फिलहाल उनका पद सुरक्षित है, लेकिन भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

 

एफबीआई डायरेक्टर काश पटेल पर भी खतरा

Kash Patel का नाम भी संभावित बर्खास्तगी की सूची में शामिल बताया जा रहा है। उनके कार्यकाल के दौरान कई विवाद सामने आए हैं, जिनमें एजेंसी के कुछ फैसलों को लेकर आलोचना भी हुई।

हाल ही में कुछ बर्खास्त एफबीआई अधिकारियों ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की है। इसके अलावा निजी जीवन से जुड़े कुछ विवादों ने भी उनकी छवि को प्रभावित किया है।

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ट्रम्प जल्द ही एफबीआई में बड़ा बदलाव कर सकते हैं।

 

अन्य मंत्री भी ट्रम्प के निशाने पर?

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प अपने कैबिनेट के अन्य सदस्यों से भी असंतुष्ट हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • Howard Lutnick
  • Lori Chavez-DeRemer

बताया जा रहा है कि ट्रम्प उन अधिकारियों को हटाने पर विचार कर रहे हैं जो उनके अनुसार अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं या जिनकी वजह से सरकार की छवि पर असर पड़ रहा है।

 

लगातार बदलाव के पीछे क्या वजह है?

ट्रम्प प्रशासन में हो रहे इन बदलावों के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं:

  1. राजनीतिक दबाव: ईरान के साथ चल रहे तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्थिति ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है।
  2. प्रदर्शन को लेकर असंतोष: ट्रम्प उन अधिकारियों से नाराज हैं जो उनके एजेंडे को सही तरीके से लागू नहीं कर पा रहे।
  3. व्यक्तिगत शैली: ट्रम्प अपने फैसलों के लिए जाने जाते हैं और वे अक्सर बड़े बदलाव करने से नहीं हिचकते।
  4. छवि सुधार की कोशिश: आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए ट्रम्प अपनी टीम को मजबूत बनाना चाहते हैं।

 

क्या यह रणनीति सफल होगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बर्खास्तगी से सरकार में अस्थिरता का माहौल बन सकता है। इससे न केवल नीतियों के क्रियान्वयन पर असर पड़ता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संदेश जाता है कि प्रशासन अंदर से मजबूत नहीं है।

हालांकि, ट्रम्प समर्थकों का कहना है कि यह कदम जरूरी हैं और इससे सरकार अधिक प्रभावी बनेगी।

 

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में और भी बड़े फैसले हो सकते हैं। खासकर अगर ईरान के साथ तनाव बढ़ता है, तो ट्रम्प अपनी टीम में और बदलाव कर सकते हैं।

वहीं, विपक्षी दल और मीडिया इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और इसे ट्रम्प प्रशासन की कमजोरी के तौर पर पेश कर रहे हैं।