ट्रम्प फिर बोले ग्रीनलैंड चाहिए, व्हाइट हाउस ने कहा- सैन्य विकल्प भी खुला है,  यूरोप ने दी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को हासिल करने का मुद्दा वाशिंगटन के एजेंडे पर ला दिया है। व्हाइट हाउस ने कन्फर्म किया है कि ट्रम्प प्रशासन इस आर्कटिक द्वीप को हासिल करने के विकल्पों पर सक्रिय रूप से चर्चा कर रहा है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस मकसद को पूरा करने के लिए अमेरिकी सेना का इस्तेमाल “हमेशा एक विकल्प” बना हुआ है।

 

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए बयान में व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रम्प ग्रीनलैंड को हासिल करना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता मानते हैं। इसकी वजह आर्कटिक में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बताई गई है।

 

ग्रीनलैंड, जो करीब 57,000 की आबादी वाला एक स्वायत्त डेनिश क्षेत्र है, ने बार-बार अमेरिका का हिस्सा बनने के आइडिया को खारिज किया है। डेनमार्क ने भी पहले साफ कर दिया है कि यह द्वीप बिकाऊ नहीं है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी इस मांग से पीछे नहीं हट रहे हैं।

trump wants greenland

ग्रीनलैंड ने मांगी अमेरिका से मीटिंग
इस बीच, ग्रीनलैंड ने कहा है कि उसने डेनमार्क के साथ मिलकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मीटिंग की मांग की है। यह मीटिंग ट्रम्प द्वारा इस आर्कटिक द्वीप पर दोबारा दावा किए जाने के बाद मांगी गई है।


विदेश मंत्री विवियन मोट्ज़फेल्ड ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “इस मीटिंग का मकसद अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड के बारे में किए गए महत्वपूर्ण बयानों पर चर्चा करना है।” उन्होंने आगे कहा, “अब तक अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के लिए ग्रीनलैंड सरकार से मिलना संभव नहीं हो पाया है, हालांकि ग्रीनलैंड और डेनिश सरकारों ने 2025 के दौरान मंत्रिस्तरीय लेवल पर मीटिंग की मांग की है।”


ग्रीनलैंड हासिल करने के क्या विकल्प हैं?
व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रम्प और उनके सलाहकार इस लक्ष्य को हासिल करने के कई संभावित रास्तों की समीक्षा कर रहे हैं। व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति और उनकी टीम इस महत्वपूर्ण विदेश नीति लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई विकल्पों पर चर्चा कर रही है। और निश्चित रूप से, अमेरिकी सेना का इस्तेमाल हमेशा कमांडर-इन-चीफ के पास मौजूद एक विकल्प है।”


एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ओवल ऑफिस के अंदर चर्चाएं सक्रिय हैं और सलाहकार कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इनमें ग्रीनलैंड को सीधे खरीदना या इस क्षेत्र के साथ कॉम्पैक्ट ऑफ फ्री एसोसिएशन (COFA) बनाना शामिल है।
हालांकि, ऐसा समझौता ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा नहीं बनाएगा, लेकिन वाशिंगटन को रक्षा और विदेश नीति के मामलों में काफी प्रभाव देगा। किसी संभावित खरीद कीमत का खुलासा नहीं किया गया है।


अधिकारी ने यह भी कहा कि नाटो नेताओं द्वारा ग्रीनलैंड के समर्थन में दिए गए मजबूत बयानों के बावजूद ट्रम्प की दिलचस्पी कम नहीं हुई है। अधिकारी ने कहा, “यह खत्म होने वाला नहीं है।” उनका मतलब था कि ट्रम्प अपने बाकी तीन साल के कार्यकाल में इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ हैं।


ट्रम्प को ग्रीनलैंड क्यों चाहिए?
अमेरिकी राष्ट्रपति इसे एक रणनीतिक चौकी के रूप में देखते हैं, खासकर जब रूस और चीन इस क्षेत्र में अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि ग्रीनलैंड की लोकेशन इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बनाती है, ताकि आर्कटिक क्षेत्र में विरोधियों को रोका जा सके।


ट्रम्प ने कहा, “ग्रीनलैंड हर जगह रूसी और चीनी जहाजों से भरा हुआ है।” उन्होंने आगे कहा, “हमें राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से ग्रीनलैंड की जरूरत है और डेनमार्क इसे करने में सक्षम नहीं होगा।”


द अटलांटिक को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “हमें ग्रीनलैंड की जरूरत है, बिल्कुल। हमें इसकी रक्षा के लिए जरूरत है।”


अमेरिका को ग्रीनलैंड से क्या फायदे हैं?

रणनीतिक सैन्य महत्व: ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, जो अमेरिका, यूरोप और रूस के बीच सैन्य और मिसाइल निगरानी के लिए बेहद जरूरी है। यहां अमेरिका का थुले एयर बेस पहले से मौजूद है, जो मिसाइल चेतावनी और रूसी-चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण है।


चीन और रूस पर नजर: आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की गतिविधियां बढ़ रही हैं। ग्रीनलैंड पर प्रभाव होने से अमेरिका इस इलाके में अपनी भू-राजनीतिक पकड़ मजबूत रख सकता है।


प्राकृतिक संसाधन: ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज, तेल, गैस और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के बड़े भंडार माने जाते हैं। इनका भविष्य में आर्थिक और तकनीकी महत्व बहुत ज्यादा है। चीन इनका 70-90% उत्पादन कंट्रोल करता है, इसलिए अमेरिका अपनी निर्भरता कम करना चाहता है।


नई समुद्री व्यापारिक रास्ते: ग्लोबल वार्मिंग के कारण आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है, जिससे नई शिपिंग रूट्स खुल रही हैं। ग्रीनलैंड का कंट्रोल अमेरिका को इन रूटों पर प्रभुत्व और आर्कटिक क्षेत्र में रूस-चीन की बढ़त रोकने में मदद करेगा।


अमेरिकी सुरक्षा नीति: अमेरिका ग्रीनलैंड को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की “फ्रंट लाइन” मानता है। वहां प्रभाव बढ़ाकर वह भविष्य के संभावित खतरों को पहले ही रोकना चाहता है।


अमेरिका और डेनमार्क करीबी सहयोगी
एक्सपर्ट्स का मानना है कि वेनेजुएला की हालिया घटना के बाद ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर टिप्पणियां नाटो सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ा सकती हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड, डेनमार्क साम्राज्य का हिस्सा हैं और नाटो के सदस्य हैं, जिससे इसकी रक्षा की जिम्मेदारी नाटो की सामूहिक सुरक्षा के तहत आती है।


अमेरिका का डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ रिश्ता करीबी और सहयोगी का है। डेनमार्क नाटो का संस्थापक सदस्य है। 1951 के रक्षा समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य बेस रखने की अनुमति है। दोनों देश सुरक्षा, विज्ञान, पर्यावरण और व्यापार में सहयोग करते हैं।


डेनमार्क PM की सख्त प्रतिक्रिया
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सेन ने साफ शब्दों में कहा, “अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोई जरूरत नहीं है और न ही उसके पास डेनिश साम्राज्य के किसी भी हिस्से को हड़पने का कोई अधिकार है।”


फ्रेडरिक्सेन ने ट्रम्प से करीबी सहयोगी देश के खिलाफ धमकियां देना बंद करने की अपील की। उन्होंने याद दिलाया कि ग्रीनलैंड के लोग खुद स्पष्ट कह चुके हैं कि वे बिकाऊ नहीं हैं। डेनमार्क नाटो का सदस्य है और अमेरिका के साथ पहले से ही उसका रक्षा समझौता है, जिसके तहत ग्रीनलैंड में पहले से अमेरिकी पहुंच है।


ग्रीनलैंड PM ने कहा- हमारा देश बिकाऊ नहीं
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति ग्रीनलैंड को वेनेजुएला से जोड़कर सैन्य हस्तक्षेप की बात करते हैं, तो यह न केवल गलत है बल्कि हमारे लोगों के प्रति अनादर है।


नीलसन ने 4 जनवरी को बयान जारी कर कहा, “मैं शुरू से ही शांत और स्पष्ट रूप से यह कहना चाहता हूं कि घबराहट या चिंता का कोई कारण नहीं है। केटी मिलर के पोस्ट से, जिसमें ग्रीनलैंड को अमेरिकी झंडे में लिपटा हुआ दिखाया गया है, इससे कुछ भी नहीं बदलता।”