अमेरिका की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एंथ्रोपिक और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच टकराव ने टेक्नोलॉजी और राष्ट्रीय सुरक्षा की बहस को फिर तेज कर दिया है। सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रम्प ने सभी सरकारी एजेंसियों को एंथ्रोपिक के AI टूल्स का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दे दिया। इतना ही नहीं, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कंपनी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा तक घोषित कर दिया।

यह फैसला अचानक आया, क्योंकि करीब दो साल पहले एंथ्रोपिक अमेरिका की पहली बड़ी AI लैब बनी थी, जिसे गोपनीय सैन्य नेटवर्क पर काम करने की अनुमति मिली थी। जुलाई 2025 में कंपनी को पेंटागन से 200 मिलियन डॉलर का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट भी मिला था। लेकिन सात महीने बाद ही हालात पूरी तरह बदल गए और कंपनी ट्रम्प के निशाने पर आ गई।

एंथ्रोपिक है क्या?
अगर आसान भाषा में समझें तो जैसे ओपनएआई का चैटजीपीटी है, वैसे ही एंथ्रोपिक का AI असिस्टेंट “क्लॉड” है। यह कंपनी खुद को AI सुरक्षा और रिसर्च पर केंद्रित बताती है। यानी इसका जोर इस बात पर रहता है कि AI का इस्तेमाल सुरक्षित और जिम्मेदारी से हो।
2024 से क्लॉड का उपयोग अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील सैन्य योजना और ऑपरेशनों में कर रही थीं। यह टूल बड़ी मात्रा में गोपनीय डेटा को तेजी से समझने और जोड़ने में मदद करता है, जो काम इंसानों को करने में कई हफ्ते लग सकते हैं।
जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के ऑपरेशन की योजना में भी इस AI टूल की भूमिका बताई गई थी। यानी क्लॉड सिर्फ रिसर्च तक सीमित नहीं था, बल्कि सीधे सैन्य रणनीति में इस्तेमाल हो रहा था।
टकराव की असली वजह
एंथ्रोपिक और ट्रम्प प्रशासन के बीच विवाद की जड़ कंपनी की दो शर्तें थीं। कंपनी के CEO डारियो अमोदेई ने साफ किया था कि उनका AI टूल अमेरिकी नागरिकों की जासूसी के लिए इस्तेमाल नहीं होगा। साथ ही, वह ऐसे हथियारों के लिए तकनीक नहीं देगा जो बिना इंसानी निगरानी के खुद से हमला कर सकें।
दूसरी ओर, ट्रम्प प्रशासन चाहता था कि क्लॉड पर लगी सुरक्षा सीमाएं हटाई जाएं। उनका तर्क था कि देश की सुरक्षा के लिए AI की पूरी क्षमता का इस्तेमाल जरूरी है। खासकर उस समय जब ईरान के साथ संभावित टकराव की चर्चा चल रही है।
ट्रम्प ने एंथ्रोपिक को “वोक” और “कट्टरपंथी वामपंथी” कंपनी बताते हुए कहा कि अब सरकार उसका उपयोग नहीं करेगी। कंपनी को “सप्लाई-चेन रिस्क” भी घोषित किया गया, जो आमतौर पर विदेशी कंपनियों के लिए इस्तेमाल होता है। इसका मतलब है कि अमेरिकी सेना और उसके ठेकेदार अब एंथ्रोपिक के साथ काम नहीं कर पाएंगे।
कानूनी लड़ाई की तैयारी
एंथ्रोपिक ने ट्रम्प प्रशासन के फैसले को चुनौती देने का संकेत दिया है। कंपनी का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर उसे डराया नहीं जा सकता। CEO अमोदेई ने बयान दिया कि बड़े पैमाने पर घरेलू निगरानी या पूरी तरह स्वचालित हथियारों को लेकर उनकी स्थिति नहीं बदलेगी।
इस फैसले का असर सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं है। अगर “सप्लाई-चेन रिस्क” का टैग बना रहता है तो एनवीडिया, अमेजन और गूगल जैसी कंपनियों को भी एंथ्रोपिक से दूरी बनानी पड़ सकती है।
ओपनएआई की एंट्री
ट्रम्प के पोस्ट के कुछ ही घंटों बाद ओपनएआई ने प्रशासन के साथ AI मॉडल के उपयोग को लेकर एक नई डील की घोषणा की। हालांकि इस समझौते की शर्तें सार्वजनिक नहीं की गईं। दिलचस्प बात यह है कि ओपनएआई के CEO सैम ऑल्टमैन पहले कह चुके हैं कि उनकी कंपनी भी कुछ सीमाओं का पालन करती है, जैसा एंथ्रोपिक करता है।
IPO पर असर?
एंथ्रोपिक की वैल्यू करीब 380 अरब डॉलर बताई जा रही है और कंपनी इस साल शेयर बाजार में उतरने की तैयारी में है। ऐसे समय पर सरकार से टकराव निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकता है। बड़े टेक पार्टनर्स के साथ चल रहे सौदों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल छह महीने का ट्रांजिशन पीरियड तय किया गया है। इस दौरान एंथ्रोपिक रक्षा विभाग को अपनी सेवाएं देता रहेगा। लेकिन इसके बाद स्थिति साफ नहीं है।
ट्रम्प ने संकेत दिया है कि अगर कंपनी सहयोग नहीं करती तो वह कोल्ड वॉर के समय बने डिफेंस प्रोडक्शन एक्ट (DPA) का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह कानून राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में निजी कंपनियों को सरकारी काम को प्राथमिकता देने का आदेश दिया जा सके।
हालांकि DPA सरकार को किसी कंपनी पर कब्जा करने का अधिकार नहीं देता, लेकिन इसका उल्लंघन करने पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है। ऐसे किसी फैसले को अदालत में चुनौती भी दी जा सकती है।
