अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल प्रतिबंधित तेल देंगी। ट्रम्प ने बताया कि यह तेल मार्केट रेट पर बेचा जाएगा और इससे मिलने वाली रकम पर उनका कंट्रोल रहेगा।
अगर वर्तमान कीमतों के हिसाब से देखें तो 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की कीमत करीब 25 हजार करोड़ रुपए बैठती है। अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल वेनेजुएला और अमेरिका दोनों देशों के लोगों के हित में किया जाएगा।
ट्रम्प ने दिए निर्देश
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को इस योजना को तुरंत लागू करने के निर्देश दे दिए हैं। तेल को स्टोरेज जहाजों के जरिए सीधे अमेरिका के बंदरगाहों तक लाया जाएगा।
याद रहे कि 2 जनवरी को अमेरिका ने वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई की थी। इस ऑपरेशन में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर अमेरिका लाया गया था। इसके बाद ट्रम्प ने वहां उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाने के लिए अपना समर्थन दिया था।
वेनेजुएला के तेल सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रम्प ने साफ कर दिया था कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला के खराब हो चुके तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश करेंगी। इससे वेनेजुएला को दोबारा तेल उत्पादन से कमाई शुरू करने में मदद मिलेगी।
फ्लोरिडा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका अब तेल बेचने के कारोबार में है और दूसरे देशों को भी तेल सप्लाई करेगा। उन्होंने बताया कि खराब इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से वेनेजुएला खुद ज्यादा तेल नहीं निकाल पा रहा था।
ट्रम्प की वेनेजुएला पर पूरी पहुंच की मांग
इससे पहले सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा था कि हमें डेल्सी रोड्रिग्ज के जरिए वेनेजुएला तक पूरी पहुंच चाहिए। ट्रम्प ने वेनेजुएला को मरा हुआ देश बताते हुए कहा कि उसे दोबारा खड़ा करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा था, “हमें तेल और देश की दूसरी चीजों तक पूरी पहुंच चाहिए, ताकि हम वेनेजुएला को दोबारा खड़ा कर सकें।”
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार
यह जानना दिलचस्प है कि वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है – करीब 303 बिलियन बैरल। यह सऊदी अरब (267 बिलियन बैरल) और ईरान (209 बिलियन बैरल) से भी ज्यादा है।
दुनिया के टॉप 10 तेल भंडार वाले देशों में कनाडा चौथे नंबर पर है (163 बिलियन बैरल), इराक पांचवें (145 बिलियन बैरल), UAE छठे (113 बिलियन बैरल), कुवैत सातवें (102 बिलियन बैरल), रूस आठवें (80 बिलियन बैरल), अमेरिका नौवें (74 बिलियन बैरल) और लीबिया दसवें नंबर (48 बिलियन बैरल) पर है।
तेल कंपनियों को लेकर विवाद की पुरानी कहानी
ट्रम्प का दावा है कि वेनेजुएला ने अमेरिकी कंपनियों के तेल अधिकार गैरकानूनी तरीके से छीन लिए थे। दरअसल, इसकी कहानी काफी पुरानी है।
1976 में वेनेजुएला की सरकार ने (राष्ट्रपति कार्लोस आंद्रेस पेरेज के समय) पूरे तेल इंडस्ट्री का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। इसका मतलब यह था कि विदेशी तेल कंपनियां, खासकर अमेरिकी कंपनियां जैसे एक्सॉन, गल्फ ऑयल, मोबिल वगैरह, जो दशकों से वहां तेल निकाल रही थीं, उनके सभी ऑपरेशन और संपत्तियां वेनेजुएला की नई सरकारी कंपनी पेट्रोलियोस डे वेनेजुएला (PDVSA) के पास चली गईं।
यह राष्ट्रीयकरण कानूनी तरीके से हुआ था और कंपनियों को मुआवजा भी दिया गया था, हालांकि कुछ कंपनियां इससे खुश नहीं थीं। उस समय अमेरिकी कंपनियों ने वेनेजुएला में तेल इंडस्ट्री को डेवलप करने में बड़ी भूमिका निभाई थी, इसलिए कुछ लोग इसे अभी भी अमेरिकी संपत्ति मानते हैं।
मादुरो को कैसे सत्ता से हटाया गया
अमेरिका ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटा दिया है। 2 जनवरी की रात अमेरिकी कमांडो सैनिकों ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाकर मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया था। इसके साथ ही वेनेजुएला में मादुरो का लंबा शासन खत्म हो गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस कार्रवाई को वेनेजुएला में “लोकतंत्र की बहाली की दिशा में जरूरी कदम” बताया था। ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन का दावा है कि मादुरो लंबे समय से ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के नेटवर्क से जुड़े हुए थे।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद मादुरो और उनकी पत्नी को न्यूयॉर्क लाया गया, जहां उन्हें एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। उन पर अमेरिका में हथियारों और ड्रग्स की तस्करी से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मादुरो की पत्नी पर भी आरोप
इस मामले में मादुरो की पत्नी सीलिया फ्लोरेस को भी आरोपी बनाया गया है। अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि फ्लोरेस पर अपहरण और हत्याओं के आदेश देने के गंभीर आरोप हैं। इस पूरी कार्रवाई के बाद लैटिन अमेरिकी देशों में तनाव भी काफी बढ़ गया है।
निष्कर्ष:
ट्रम्प का यह नया ऐलान बताता है कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। 3 से 5 करोड़ बैरल तेल की डील सिर्फ शुरुआत हो सकती है। अमेरिकी कंपनियों का वेनेजुएला के तेल सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश प्लान इस बात की ओर इशारा करता है कि अमेरिका वहां लंबे समय के लिए अपनी मजबूत उपस्थिति चाहता है।
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रबंधन की वजह से वह इसका पूरा फायदा नहीं उठा पा रहा था। अब अमेरिकी निवेश और टेक्नोलॉजी से यह स्थिति बदल सकती है। हालांकि, यह पूरा मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी विवादास्पद बना हुआ है और कई देशों ने अमेरिका की इस कार्रवाई की निंदा की है।
