ग्रीनलैंड से लेकर NATO तक: दावोस में ट्रम्प का विवादास्पद भाषण, जानें क्या-क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति ?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) को संबोधित करते हुए कई विवादास्पद बयान दिए। 6 साल बाद इस मंच पर लौटे ट्रम्प ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर डेनमार्क को ‘एहसान फरामोश’ कहा, यूरोप की नीतियों की आलोचना की और अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को सही ठहराया। 45 मिनट के लिए निर्धारित भाषण को ट्रम्प ने 75 मिनट तक खींचा और इस दौरान उन्होंने कई देशों और नेताओं पर निशाना साधा।

 

विमान की तकनीकी खराबी से हुई देरी

ट्रम्प की यह यात्रा शुरुआत से ही चर्चा में रही। सुबह उनका विमान तकनीकी समस्या के कारण वापस लौटना पड़ा था। व्हाइट हाउस के अनुसार, टेकऑफ के बाद क्रू को एक छोटी इलेक्ट्रिकल खराबी का पता चला। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा बताता है कि विमान ने न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर उड़ान भरने के करीब एक घंटे बाद वापसी का निर्णय लिया। एयर फोर्स वन सुबह 9:30 बजे के आसपास मैरीलैंड में सुरक्षित उतरा। लगभग एक घंटे बाद ट्रम्प दूसरे एयर फोर्स वन विमान से दावोस के लिए रवाना हुए।

Trump controversial speech in Davos

ग्रीनलैंड पर ट्रम्प का रुख:

 

पहली बार स्पष्ट किया सैन्य कार्रवाई का इरादा नहीं

ट्रम्प ने पहली बार खुलकर कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए वे सैन्य बल का उपयोग नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “अमेरिका सामान्यतः किसी से कुछ मांगता नहीं है और इसीलिए उसे कुछ मिलता भी नहीं। यदि मैं चाहूं तो बहुत अधिक ताकत और सैन्य शक्ति का प्रयोग कर सकता हूं, तब हमें कोई रोक नहीं सकता। परंतु मैं ऐसा नहीं करना चाहता। मैं बल प्रयोग नहीं करूंगा।”

 

ग्रीनलैंड को बताया अमेरिका का इलाका

ट्रम्प ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक महत्ता अत्यधिक है। यह विशाल क्षेत्र लगभग खाली है और वहां न्यूनतम विकास हुआ है। उनके अनुसार, ग्रीनलैंड अमेरिका, रूस और चीन के मध्य एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान पर है और इसकी उचित सुरक्षा नहीं हो रही है।

 

ट्रम्प ने कहा कि जैसे-जैसे दुर्लभ धातुओं का महत्व बढ़ा है, वैसे-वैसे ग्रीनलैंड की अहमियत भी बढ़ी है। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रीनलैंड उत्तरी अमेरिका का भाग है और इसलिए यह अमेरिका का क्षेत्र है।

 

अमेरिका के अलावा कोई नहीं कर सकता रक्षा”

ट्रम्प ने दावा किया कि नाटो के प्रत्येक सहयोगी देश की जिम्मेदारी है कि वह अपने क्षेत्र की रक्षा स्वयं कर सके। उनके अनुसार वास्तविकता यह है कि अमेरिका के अतिरिक्त कोई भी देश या देशों का समूह ग्रीनलैंड की सुरक्षा नहीं कर सकता।

 

उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि जब जर्मनी ने डेनमार्क पर कब्जा किया था, तब अमेरिका को ग्रीनलैंड की रक्षा करनी पड़ी थी। बाद में अमेरिका ने ग्रीनलैंड वापस कर दिया, जिसे ट्रम्प ने अमेरिका की बड़ी भूल बताया।

 

डेनमार्क को लगाई फटकार

ट्रम्प ने डेनमार्क की कठोर आलोचना करते हुए उसे ‘एहसान फरामोश’ कहा। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में डेनमार्क मात्र छह घंटे में जर्मनी से पराजित हो गया था। उस समय वह न तो स्वयं की रक्षा कर सका और न ही ग्रीनलैंड की। इसके पश्चात अमेरिका को आगे आकर ग्रीनलैंड की सुरक्षा करनी पड़ी।

 

ट्रम्प ने शिकायती लहजे में कहा, “हम बस एक बर्फ का टुकड़ा चाहते हैं जिसे यूरोप देने को तैयार नहीं है। अमेरिका इसे हमेशा याद रखेगा।” उन्होंने कहा कि यदि यूरोप ‘हां’ कहता है तो अमेरिका आभारी होगा, और यदि ‘ना’ कहता है तो अमेरिका इसे स्मरण रखेगा।

 

हालांकि, डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने ट्रम्प के इस बयान को सकारात्मक बताया कि वे सैन्य बल का उपयोग नहीं करेंगे। रासमुसेन ने यह भी कहा कि डेनमार्क इस मुद्दे पर बातचीत और कूटनीति के मार्ग पर ही आगे बढ़ेगा।

 

यूरोप पर तीखा प्रहार

 

यूरोप को अमेरिका जैसा बनना चाहिए”

ट्रम्प ने यूरोपीय नेताओं पर व्यंग्य करते हुए कहा कि यूरोप के अनेक हिस्से अब ‘पहचाने जाने योग्य भी नहीं रहे हैं’। उन्होंने कहा कि यूरोप की इमिग्रेशन पॉलिसी और आर्थिक नीतियों ने विनाशकारी परिणाम दिए हैं, जबकि इसके विपरीत अमेरिका में ‘आर्थिक चमत्कार’ देखने को मिला है।

 

ट्रम्प ने कहा, “मुझे यूरोप से प्रेम है और मैं चाहता हूं कि यूरोप आगे बढ़े, परंतु वह सही दिशा में नहीं जा रहा है।” उन्होंने “लगातार बढ़ता सरकारी खर्च, बिना नियंत्रण का बड़े पैमाने पर प्रवासन और अंतहीन विदेशी आयात” को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।

 

यूक्रेन युद्ध की जिम्मेदारी यूरोप पर

ट्रम्प ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की जिम्मेदारी यूरोप की होनी चाहिए क्योंकि अमेरिका वहां से बहुत दूर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन को अरबों डॉलर दिए। उनके अनुसार, दुनिया में युद्ध समाप्त कराने के लिए उन्होंने बहुत काम किया और अमेरिका को इसमें भारी नुकसान उठाना पड़ा।

 

ट्रम्प ने यह भी बताया कि वे आज दावोस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि जेलेंस्की और पुतिन दोनों ही लगभग चार साल से चल रहे युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं।

 

NATO पर उठाए सवाल

ट्रम्प ने कहा कि उन्हें संदेह है कि यदि कभी अमेरिका को आवश्यकता पड़ी तो NATO उसकी सहायता करेगा या नहीं। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के लिए पूरी तरह खड़ा रहता है, परंतु उन्हें विश्वास नहीं है कि वही देश अमेरिका के लिए भी ऐसा करेंगे।

 

उन्होंने NATO के आर्टिकल 5 का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि NATO के किसी एक देश पर हमला सभी देशों पर हमला माना जाएगा। ट्रम्प ने बताया कि इस नियम का उपयोग अब तक केवल एक बार हुआ है और वह भी 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद, जब अमेरिका की रक्षा के लिए इसे लागू किया गया था।

 

हालांकि, NATO के महासचिव मार्क रुट ने दावोस में ट्रम्प का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ट्रम्प की वजह से ही यूरोप ने अपने रक्षा खर्च को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। रुट ने कहा कि ट्रम्प के बिना कई यूरोपीय देश अपनी GDP का 2% रक्षा पर खर्च करने का निर्णय कभी नहीं करते।

 

कनाडा और फ्रांस पर भी निशाना

 

कनाडा को बताया अमेरिका पर निर्भर

ट्रम्प ने कनाडा पर भी प्रहार करते हुए कहा कि कनाडा को अमेरिका से बहुत कुछ मुफ्त में मिलता है। उन्हें इसके लिए आभारी होना चाहिए, परंतु वे नहीं हैं। ट्रम्प ने कहा कि कनाडा अमेरिका की वजह से ही टिका हुआ है और कनाडाई प्रधानमंत्री को अगली बार बयान देते समय यह बात स्मरण रखनी चाहिए।

 

मैक्रों को दी टैरिफ की धमकी

ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को दवाओं की कीमतों को लेकर टैरिफ लगाने की धमकी देने का खुलासा किया। ट्रम्प के अनुसार, फ्रांस में जो दवा 10 डॉलर में मिलती है, वही अमेरिका में 130 डॉलर की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने मैक्रों से कहा था कि यदि दवाओं की कीमतें दोगुनी या तिगुनी नहीं की गईं, तो फ्रांस की हर चीज पर 25% और उनकी वाइन और शैंपेन पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है।

 

ट्रम्प ने मजाक में मैक्रों के सनग्लासेज का भी जिक्र किया। मंगलवार को दावोस में भाषण देते समय मैक्रों ने नीले रंग के मिरर वाले एविएटर स्टाइल के सनग्लासेस पहने थे क्योंकि उनकी आंख में संक्रमण था।

 

वेनेजुएला पर सकारात्मक बयान

ट्रम्प ने वेनेजुएला का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद उसे आगे चलकर बड़ा लाभ होने वाला है। उन्होंने दावा किया कि वेनेजुएला काफी समय के बाद बहुत अधिक पैसा कमाने वाला है।

 

ट्रम्प ने बताया कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच 5 करोड़ बैरल तेल को लेकर समझौता हुआ है। इस समझौते के अंतर्गत अमेरिका बड़ी तेल कंपनियों को वेनेजुएला में लाएगा और दोनों देश मिलकर तेल से होने वाली कमाई साझा करेंगे।

 

सोमालिया के लोगों के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी

ट्रम्प ने एक बार फिर सोमालिया और सोमाली लोगों को बुरा-भला कहा। उन्होंने सोमाली मूल के लोगों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया और उन्हें ‘कम बुद्धि वाला’ और ‘समुद्री डाकू’ कहा। ट्रम्प हाल के हफ्तों में बार-बार सोमालिया और वहां से आने वाले प्रवासियों को लेकर इसी प्रकार की टिप्पणियां करते रहे हैं।

 

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की तारीफ

ट्रम्प ने अमेरिका की आर्थिक स्थिति की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश में आय और महंगाई जैसे मामलों में बड़ी आर्थिक सफलता हासिल हुई है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।

 

ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था का इंजन है। जब अमेरिका प्रगति करता है, तो पूरी दुनिया प्रगति करती है। उन्होंने यह भी कहा कि जब अमेरिका की स्थिति खराब होती है, तो बाकी देश भी उसके साथ नीचे चले जाते हैं।

 

उन्होंने बाइडेन की आलोचना करते हुए कहा कि उनके शासनकाल के दौरान महंगाई उच्च थी। ट्रम्प ने दावा किया कि उनके आने के एक वर्ष बाद ही अर्थव्यवस्था में सुधार आना प्रारंभ हो गया।

 

आवास नीति पर कार्यकारी आदेश

ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अंतर्गत बड़ी कंपनियों को सिंगल-फैमिली घर खरीदने से रोका गया है। उन्होंने कहा कि यह सामान्य लोगों के साथ न्याय का प्रश्न है क्योंकि कंपनियों की वजह से लोग स्वयं का घर खरीद नहीं पा रहे हैं। ट्रम्प ने कहा, “अमेरिका किराएदारों का देश नहीं बनेगा।”

 

भारत-पाकिस्तान विवाद सुलझाने का दावा

ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव सुलझाया। उन्होंने यह भी कहा कि आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच 35 साल से चल रहे संघर्ष को मात्र एक दिन में समाप्त कर दिया।

 

ट्रम्प के अनुसार, इस पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें फोन किया और कहा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि ट्रम्प ने वह युद्ध सुलझा दिया, क्योंकि वे स्वयं 10 वर्ष तक प्रयास करते रहे परंतु सफल नहीं हो पाए।

 

मोदी की प्रशंसा

भाषण के बाद ट्रम्प ने भारतीय मीडिया से बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की और उन्हें अपना मित्र बताया। ट्रम्प ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच शीघ्र एक अच्छा व्यापार समझौता होने वाला है।

 

भाषण का प्रभाव: यूरोप-अमेरिका व्यापार समझौते पर रोक

ट्रम्प के भाषण के तुरंत बाद यूरोपीय संसद की व्यापार समिति ने अमेरिका-यूरोप व्यापार समझौते को मंजूरी देने पर होने वाली मतदान प्रक्रिया रोक दी। यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लैंगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी दी।

 

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच होने वाला संपूर्ण व्यापार समझौता रद्द हो गया है या फिर जो भाग पहले से लागू हो चुके हैं, वे वैसे ही चलते रहेंगे। यूरोपीय यूनियन और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर व्यापार समझौते पर जुलाई में सहमति बनी थी।

 

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 की खासियत

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 का आयोजन 19 से 23 जनवरी तक स्विट्जरलैंड के दावोस में हो रहा है। इस वर्ष की बैठक का विषय है ‘A Spirit of Dialogue’ यानी ‘संवाद की भावना’।

 

इस बैठक में 130 से अधिक देशों के करीब 3,000 प्रतिनिधि सम्मिलित हो रहे हैं। इनमें 60 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, G7 देशों के नेता, लगभग 850 बड़े CEOs और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख शामिल हैं।

 

भारत की मजबूत उपस्थिति

भारत से चार केंद्रीय मंत्री और छह राज्यों के मुख्यमंत्री भी बैठक में भाग ले रहे हैं। 100 से अधिक भारतीय उद्योगपति भी दावोस में उपस्थित हैं। भारत निवेश, विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और डिजिटल विकास पर जोर दे रहा है।

 

विदेशी कंपनियों और निवेशकों के साथ भारत साझेदारी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। भारत अपनी तीव्र आर्थिक वृद्धि और भविष्य की योजनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है।

 

निष्कर्ष:

ट्रम्प का यह भाषण उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का एक और उदाहरण था। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि अमेरिका अपने हितों को सर्वोपरि रखेगा और सहयोगी देशों से अपेक्षा करता है कि वे अमेरिका के योगदान को स्वीकार करें। ग्रीनलैंड के मुद्दे पर उनका रुख नरम होने के बावजूद, उनकी मंशा स्पष्ट है। यूरोप, NATO और अन्य सहयोगियों के साथ उनके संबंधों में तनाव जारी रहने की संभावना है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वैश्विक समुदाय ट्रम्प के इस दृष्टिकोण पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।