क्या ट्रम्प का फेड चेयर अमेरिका ही नहीं, दुनिया की अर्थव्यवस्था बदलेगा?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा फेडरल रिज़र्व के नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की मौद्रिक नीति, संस्थागत संतुलन और लोकतांत्रिक व्यवस्था की परीक्षा भी है। ऐसे समय में, जब महंगाई ऊँची है, ब्याज दरें राजनीतिक बहस का विषय बनी हुई हैं और राष्ट्रपति खुले तौर पर केंद्रीय बैंक पर दबाव बना रहे हैं, फेड चेयर की नियुक्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी दूरगामी असर रखती है।

 

फेडरल रिज़र्व की भूमिका और स्वतंत्रता का महत्व

Federal Reserve (फेड) अमेरिका का केंद्रीय बैंक है, जिसका मुख्य काम महंगाई को नियंत्रित करना, आर्थिक स्थिरता बनाए रखना और रोजगार के अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना है। फेड की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्वतंत्रता मानी जाती है-यानी वह सरकार या राष्ट्रपति के सीधे राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर फैसले ले सके।

 

इतिहास बताता है कि जब भी केंद्रीय बैंक राजनीतिक प्रभाव में आया है, तो उसका नतीजा अक्सर अधिक महंगाई, वित्तीय अस्थिरता और बाजारों में भरोसे की कमी के रूप में सामने आया है। इसी कारण अमेरिका में यह परंपरा रही है कि फेड चेयर को आलोचना झेलनी पड़ सकती है, लेकिन सीधे आदेश नहीं दिए जाते।

ट्रम्प बनाम पॉवेल: टकराव की पृष्ठभूमि

वर्तमान फेड चेयर Jerome Powell का कार्यकाल मई में समाप्त हो रहा है। बीते एक वर्ष से राष्ट्रपति ट्रम्प लगातार उन पर ब्याज दरें तेज़ी से घटाने का दबाव बना रहे हैं। ट्रम्प का तर्क है कि कम ब्याज दरों से आर्थिक विकास तेज़ होगा और नौकरियाँ बढ़ेंगी।

 

इसके विपरीत, पॉवेल का रुख अधिक सतर्क रहा है। ट्रम्प प्रशासन की टैरिफ नीतियों के कारण महंगाई पहले से ऊँची है और ऐसे में जल्दबाज़ी में दरें घटाने से स्थिति और बिगड़ सकती है। यही मतभेद धीरे-धीरे एक बड़े संस्थागत टकराव में बदल गया।

 

स्थिति तब और गंभीर हुई जब फेड मुख्यालय के नवीनीकरण खर्च को लेकर राष्ट्रपति के हमलों के बाद न्याय विभाग की ओर से फेड को समन जारी हुए। यह अमेरिकी इतिहास में दुर्लभ घटनाओं में से एक माना गया, क्योंकि इससे फेड की स्वायत्तता पर सीधा सवाल खड़ा हुआ।

 

नया फेड चेयर कौन? संभावित नाम और सियासी गणित

राष्ट्रपति ट्रम्प ने संकेत दिया है कि उनका चयन ऐसा व्यक्ति होगा जो वित्तीय जगत में जाना-पहचाना और “सम्मानित” हो। संभावित नामों में शामिल हैं-

  • Kevin Warsh (पूर्व फेड गवर्नर)
  • Christopher Waller (वर्तमान फेड गवर्नर)
  • Rick Rieder
  • Kevin Hassett (व्हाइट हाउस नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के निदेशक)

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ट्रम्प ऐसा चेयर चुनते हैं जो खुले तौर पर ब्याज दरों में आक्रामक कटौती के पक्ष में हो, तो इससे यह संदेश जाएगा कि फेड की नीति अब राजनीतिक प्राथमिकताओं से संचालित हो रही है।

 

एक अहम संवैधानिक और प्रक्रियागत पहलू यह है कि पॉवेल चाहें तो चेयर का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी फेड के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में 2028 तक बने रह सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो राष्ट्रपति के लिए बोर्ड में अपने समर्थक बहुमत बनाना आसान नहीं होगा।

 

यह स्थिति फेड की स्वतंत्रता के लिए एक प्रकार का सुरक्षा कवच बन सकती है, लेकिन साथ ही यह राष्ट्रपति और केंद्रीय बैंक के बीच तनाव को और बढ़ा सकती है।

 

वैश्विक असर और भारत जैसे देशों के लिए संकेत

अमेरिका की मौद्रिक नीति का असर केवल उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहता। ब्याज दरों में बदलाव से डॉलर मजबूत या कमजोर होता है, जिसका प्रभाव उभरती अर्थव्यवस्थाओं-जैसे भारत-पर पूंजी प्रवाह, मुद्रा विनिमय दर और महंगाई के रूप में पड़ता है।

 

यदि फेड राजनीतिक दबाव में आकर नीतियाँ बदलता है, तो इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ सकती है। इसलिए यह नियुक्ति पूरी दुनिया के नीति-निर्माताओं और निवेशकों की निगाह में है।

 

निष्कर्ष:

फेड चेयर की यह नियुक्ति केवल किसी एक व्यक्ति के चयन की कहानी नहीं है। यह सवाल है कि क्या दुनिया की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था का केंद्रीय बैंक राजनीतिक दबावों से ऊपर रह पाएगा। यदि फेड की स्वतंत्रता कमजोर होती है, तो उसका असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा।

 

आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि अमेरिका संस्थागत संतुलन की अपनी परंपरा को बचा पाता है या नहीं-और यही इस पूरे घटनाक्रम का असली महत्व है।

 

UPSC अभ्यास प्रश्न

 

प्रीलिम्स प्रश्न

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. फेडरल रिज़र्व अमेरिका का केंद्रीय बैंक है।
  2. फेड चेयर की नियुक्ति का वैश्विक वित्तीय बाजारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 न ही 2

 

मेन्स प्रश्न (GS-II / GS-III)

“केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक शासन में आर्थिक स्थिरता का आधार होती है।”
इस कथन के आलोक में, अमेरिका में फेड चेयर की नियुक्ति से जुड़े हालिया घटनाक्रमों का विश्लेषण कीजिए और इसके वैश्विक प्रभावों की चर्चा कीजिए।