पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात ने आम पाकिस्तानी नागरिकों को वीज़ा जारी करना रोक दिया है। सीनेट की समिति को दिए गए बयान में बताया गया कि यूएई और सऊदी अरब ने फिलहाल पासपोर्ट पर पूर्ण प्रतिबंध न लगाने का फैसला किया है, क्योंकि ऐसा कोई प्रतिबंध लगने पर उसे हटाना मुश्किल हो सकता है। फ़िलहाल यूएई केवल नीले और राजनयिक पासपोर्ट धारकों को ही वीज़ा दे रहा है, जबकि आम लोग हरे पासपोर्ट पर यात्रा करते हैं।
पासपोर्ट और वीज़ा में अंतर:
- पासपोर्ट: पासपोर्ट सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज़ है, जिसमें आपकी पहचान और आपकी राष्ट्रीयता दर्ज होती है। यह साबित करता है कि आप किस देश के नागरिक हैं और आपको विदेश यात्रा करने, वहाँ रहने और ज़रूरत पड़ने पर अपने देश वापस लौटने का अधिकार देता है।
- वीज़ा: वीज़ा वह अनुमति है जो किसी देश की सरकार विदेशी नागरिक को देती है, ताकि वह उस देश में प्रवेश कर सके, कुछ समय तक ठहर सके या उसे छोड़ सके। यह बताता है कि आपको सीमित अवधि के लिए उस देश में रहने की मंज़ूरी है। पासपोर्ट आपकी पहचान होता है, जबकि वीज़ा किसी दूसरे देश में प्रवेश की अनुमति।
वीज़ा सुविधा सुधारों के दिन ही वीज़ा प्रतिबन्ध की खबर:
वीज़ा प्रतिबंध की यह खबर उसी दिन सामने आई, जब पाकिस्तान में यूएई के राजदूत सलेम अल ज़ाबी ने वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब को पाकिस्तानी नागरिकों के लिए नई वीज़ा सुविधाओं की जानकारी दी थी।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, राजदूत ने बताया कि अब वीज़ा के लिए ऑनलाइन आवेदन, पासपोर्ट पर मुहर के बिना ई-वीज़ा, तेज़ डिजिटल प्रक्रिया और नया यूएई वीज़ा केंद्र जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। यह नया वीज़ा केंद्र रोज़ाना लगभग 500 आवेदन संसाधित कर रहा है।
पाकिस्तानी वीजा पर प्रतिबन्ध के मुख्य कारण:
पाकिस्तानी वीज़ा पर प्रतिबंध मुख्य रूप से इसलिए लगाए गए हैं क्योंकि कुछ पाकिस्तानी यात्रा वीज़ा पर जाकर वैध काम करने के बजाय भीख मांगने में लगे हैं। साथ ही यूएई में कुछ पाकिस्तानियों के आपराधिक गतिविधियों में शामिल, हत्याएं, ड्रग रैकेट और निर्धारित समय से अधिक समय तक रहने के मामले की खबर भी आई है।
पिछले कुछ महीनों में यात्रा वीज़ा बहुत कम दिए गए हैं और वे भी बड़ी मुश्किल से मिल रहे हैं। इसलिए आम पाकिस्तानी पासपोर्ट धारकों के लिए यात्रा वीज़ा लेना अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।
पाकिस्तानी वीज़ा पर पहले भी लगे है प्रतिबंध:
इस साल पाकिस्तानी यात्रियों को वीज़ा पाने में कई बार मुश्किलें आई हैं। साल की शुरुआत में, जनवरी में सीनेट की स्थायी समिति को बताया गया कि कुछ यूएई वीज़ा “अनौपचारिक रूप से बंद” कर दिए गए हैं। जिसके बाद पाकिस्तानी प्रवासियों के लिए वीज़ा मिलना मुश्किल हो गया था। हालांकि अप्रैल में, यूएई के राजदूत ने कहा था कि वीज़ा संबंधी समस्याएँ हल हो गई हैं और अब पाकिस्तानी नागरिक पांच साल के वीज़ा के लिए आवेदन कर सकते हैं।
लेकिन जुलाई में ही वीज़ा रिज़ेक्ट होने की संख्या बढ़ने लगी, उसके बाद पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी ने यूएई अधिकारियों से बात की। तब यूएई के लेफ्टिनेंट जनरल शेख सैफ बिन जायद अल नाहयान ने वीज़ा प्रक्रिया तेज़ करने में मदद का वादा किया।
यूएई के इस कदम का क्या असर पड़ेगा?
यूएई द्वारा वीज़ा जारी करने पर रोक का असर पाकिस्तान के लिए काफी नकारात्मक माना जा रहा है। पहले ही पाकिस्तान का पासपोर्ट दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्टों में गिना जाता है। 2025 हेनले पासपोर्ट इंडेक्स में, 199 पासपोर्टों की लिस्ट में यह सोमालिया और यमन के साथ 96वें स्थान पर है। पाकिस्तानी नागरिक केवल 32 देशों में ही बिना वीज़ा या आगमन पर वीज़ा की सुविधा पा सकते हैं, जो उनकी वैश्विक यात्रा क्षमता को काफी सीमित करती है।
अब यूएई जैसे बड़े देश द्वारा वीज़ा रोकने से पाकिस्तान के पासपोर्ट की छवि और भी खराब होगी। यह लगातार तीसरे साल दुनिया के चौथे सबसे कमजोर पासपोर्ट के रूप में दर्ज है, और ऐसे प्रतिबंध उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और यात्रा स्वतंत्रता दोनों को और प्रभावित करेंगे।
पाकिस्तान-यूएई के बीच गहरे संबध:
पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच लंबे समय से मजबूत राजनयिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं। यूएई पाकिस्तान का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है और वहाँ काम करने वाले लाखों पाकिस्तानी अपने देश पाकिस्तान को बड़ी मात्रा में धन (रेमिटेंस) भेजते है।
हर साल 8 लाख से अधिक पाकिस्तानी बेहतर नौकरी और आर्थिक अवसरों की तलाश में खाड़ी और मध्य-पूर्व के देशों के लिए वीज़ा आवेदन करते हैं। ग्लोबल मीडिया इनसाइट के संयुक्त अरब अमीरात जनसंख्या सांख्यिकी 2025 के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात में पाकिस्तानी नागरिकों की आबादी 19 लाख है।
सऊदी अरब ने भी की थी पाकिस्तानी भिखारियों पर कार्रवाई:
इस साल की शुरुआत में सऊदी अरब ने संगठित तरीके से भीख मांगने वाले नेटवर्कों पर बड़ी कार्रवाई की। इसके चलते स्थानीय कानून तोड़ने वाले हज़ारों पाकिस्तानी नागरिकों को देश से बाहर भेज दिया गया। सऊदी अधिकारियों का कहना था कि पकड़े गए कई लोग यात्रा वीज़ा पर आए थे और मस्जिदों, बाज़ारों और सार्वजनिक जगहों के बाहर भीख मांगते पाए गए। इस कार्रवाई से पाकिस्तान की सरकार काफी चिंतित हो गई थी।
दुनिया भर में 23,000 से ज़्यादा पाकिस्तानी जेल में:
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अलग–अलग देशों की जेलों में कुल 23,456 पाकिस्तानी कैद हैं। इनमें सबसे ज़्यादा 12,156 सऊदी अरब में और 5,292 संयुक्त अरब अमीरात में बंद हैं।
कई देशों में पाकिस्तानी नागरिक नशीली दवाओं की तस्करी, चोरी, हत्या, बलात्कार, जाली मुद्रा, मानव तस्करी और अवैध प्रवेश जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए हैं। चीन, बहरीन, अफ़ग़ानिस्तान, क़तर, ओमान, मलेशिया, तुर्किये और कई यूरोपीय देशों में भी पाकिस्तानियों को इसी तरह के मामलों में सज़ा मिली है। इससे साफ होता है कि कई देशों में पाकिस्तानी नागरिकों का आपराधिक रिकॉर्ड चिंताजनक स्तर पर बना हुआ है।
निष्कर्ष:
हालांकि पूर्ण पासपोर्ट प्रतिबंध से परहेज़ किया गया है, लेकिन केवल नीले और राजनयिक पासपोर्ट धारकों को वीज़ा मिलना यह दिखाता है कि आम पाकिस्तानी यात्रियों पर विश्वास कम हो गया है। दुनिया के कई देशों में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिकों के अपराधों में शामिल पाए जाने से पाकिस्तान के पासपोर्ट की छवि और कमजोर हुई है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए आवश्यक है कि वह विदेशों में अपने नागरिकों के व्यवहार और प्रवासन व्यवस्था में सुधार कर अंतरराष्ट्रीय भरोसा हासिल करे।
