केंद्रीय बजट 2026 को लेकर सभी अटकलों पर विराम लग गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि केंद्रीय बजट 2026 रविवार, 1 फरवरी को सुबह 11 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा। बजट प्रस्तुति का समय वही रहेगा, जो बीते कई वर्षों से अपनाया जा रहा है। इससे सरकार की बजट पेश करने की परंपरा में निरंतरता बनी रहेगी।
आज़ादी के बाद देश का 88वां बजट
केंद्रीय बजट 2026 भारत के स्वतंत्र होने के बाद पेश किया जाने वाला 88वां बजट होगा। हर साल की तरह इस बार भी बजट के माध्यम से सरकार देश की आर्थिक स्थिति, विकास योजनाओं और आगामी वित्त वर्ष की प्राथमिकताओं को संसद और देशवासियों के सामने रखेगी। यह बजट वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार का आर्थिक रोडमैप तय करेगा।
निर्मला सीतारमण रचेंगी ऐतिहासिक रिकॉर्ड
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं। इसके साथ ही वह भारत की पहली ऐसी वित्त मंत्री बन जाएंगी, जिन्होंने बिना किसी रुकावट के नौ बजट पेश किए हों। यह उपलब्धि उन्हें देश के सबसे लंबे समय तक बजट पेश करने वाले वित्त मंत्रियों की सूची में शीर्ष के और करीब ले जाएगी। वह पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड के पास पहुंच जाएंगी, जिन्होंने दो अलग-अलग कार्यकालों में कुल 10 बजट पेश किए थे।
2017 से बदली बजट पेश करने की तारीख
वर्ष 2017 से केंद्र सरकार ने बजट पेश करने की तारीख को 28 फरवरी से बदलकर 1 फरवरी कर दिया था। यह बदलाव तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने किया था। इसका उद्देश्य यह था कि बजट में किए गए प्रस्तावों और योजनाओं को नए वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से ही लागू किया जा सके। तब से हर साल बजट 1 फरवरी को सुबह 11 बजे पेश किया जा रहा है।
वीकेंड पर बजट पेश होना कोई नई परंपरा नहीं
रविवार या शनिवार को बजट पेश होना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले बजट 2025 शनिवार को पेश किया गया था। वहीं, अरुण जेटली ने भी अपने कार्यकाल में 2015 और 2016 में शनिवार के दिन बजट पेश किया था। इसलिए बजट का रविवार को पेश होना संसदीय परंपराओं के अनुरूप ही है।
GDP ग्रोथ अनुमान और बजट की रूपरेखा
सरकार द्वारा 7 जनवरी को जारी पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक GDP ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह दर पिछले वित्त वर्ष की तुलना में बेहतर मानी जा रही है। वैश्विक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफ वॉर के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। इन्हीं आंकड़ों और आर्थिक संकेतकों को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बजट 2026 की रणनीति तैयार की जा रही है।
बजट 2026 में क्या रह सकती हैं प्रमुख प्राथमिकताएं
आगामी बजट में सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, रोजगार सृजन, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, स्टार्टअप्स, डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर रहने की संभावना है। इसके अलावा मध्यम वर्ग, किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए टैक्स राहत और योजनाओं की घोषणा की उम्मीद भी जताई जा रही है।
लोकसभा में इस बार रचा जाएगा नया इतिहास
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि बजट सत्र के दौरान इस बार संसद में एक नया इतिहास रचा जाएगा। पहली बार ऐसा होगा जब संसद सदस्य सदन में 22 भाषाओं में अपनी बात रख सकेंगे। इसके साथ ही संसद की कार्यवाही का 22 भाषाओं में समानांतर अनुवाद किया जाएगा। आने वाले समय में संसद की कार्यवाही का प्रसारण भी सभी भाषाओं में करने की तैयारी है।
AI के जरिए संसद की कार्यप्रणाली में बदलाव
इस बजट सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सांसदों को सभी परिपत्र और दस्तावेज 22 भाषाओं में उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही संसद की कार्यवाही का लिखित रिकॉर्ड भी आधे घंटे के भीतर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
लोकसभा ने 6 वर्षों में बचाए 1000 करोड़ रुपये
लोकसभा ने 2019 से 2025 के बीच करीब 1000 करोड़ रुपये की बचत की है। यह बचत अनावश्यक खर्चों जैसे अतिरिक्त सजावट, गुलदस्ते, फूलों और गैर-जरूरी व्यवस्थाओं में कटौती करके की गई है। लोकसभा स्पीकर ने स्पष्ट किया है कि सांसदों की आवश्यक सुविधाओं और सेवाओं में कोई कटौती नहीं की गई है और आगे भी केवल वहीं खर्च घटाया जाएगा, जहां इसकी आवश्यकता नहीं होगी।
बजट क्या होता है और क्यों है महत्वपूर्ण
बजट सरकार का वार्षिक वित्तीय विवरण होता है, जिसमें यह बताया जाता है कि सरकार एक साल में कितना राजस्व जुटाएगी और उसे किन-किन क्षेत्रों में खर्च करेगी। बजट देश की आर्थिक नीतियों, विकास योजनाओं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का आधार होता है। इसके जरिए आर्थिक विकास को गति दी जाती है और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया जाता है।
बजट में किन बातों को किया जाता है शामिल
बजट में सरकार की आय के स्रोत जैसे प्रत्यक्ष कर, अप्रत्यक्ष कर, शुल्क और अन्य राजस्व शामिल होते हैं। वहीं खर्च की तरफ शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर, सब्सिडी और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए धन का प्रावधान किया जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के तहत इसे ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ कहा गया है।
बजट से जुड़े प्रमुख आर्थिक शब्द
राजकोषीय घाटा सरकार के कुल खर्च और उसकी कुल प्राप्तियों के बीच के अंतर को दर्शाता है। बैलेंस बजट तब कहलाता है जब सरकार की आय और खर्च बराबर हों। बॉन्ड सरकार या कंपनियों द्वारा जारी किया गया कर्ज साधन होता है। GDP किसी देश में एक वर्ष के दौरान उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाता है। विनिवेश का अर्थ सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर राजस्व जुटाना होता है।
निष्कर्ष:
केंद्रीय बजट 2026 न केवल सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं को दर्शाएगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाले वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ेगी। बदलते वैश्विक हालात, घरेलू जरूरतों और विकास लक्ष्यों के बीच यह बजट देश के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है।
