वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट 1 फरवरी को लोकसभा में पेश किया जाएगा, इससे पहले 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया जाएगा। इस आगामी बजट में नई प्राथमिकताओं को रेखांकित करने, विकास के रास्तों को मजबूत करने और आने वाले वर्ष के लिए एक स्पष्ट राजकोषीय दिशा निर्धारित करने की उम्मीद है।
केंद्रीय बजट 2026–27 से प्रमुख अपेक्षाएँ
- 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत होने वाला केंद्रीय बजट ऐसे समय में आ रहा है जब भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि के संकेत दे रही है। सरकारी अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 में वास्तविक GDP वृद्धि लगभग 7.4% रहने की संभावना है, जबकि कुछ संस्थान जैसे SBI इससे अधिक वृद्धि की उम्मीद जताते हैं। इसलिए यह बजट ऐसे प्रावधानों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है जो बढ़ती आर्थिक क्षमता को स्थिर गति प्रदान करें।
- विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार 2026–27 के बजट में वित्तीय अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे सकती है। वर्तमान वित्त वर्ष 2025–26 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4.4% निर्धारित है, और विश्लेषकों का मानना है कि सरकार इसे न केवल बनाए रखने बल्कि धीरे-धीरे कम करने की दिशा में भी कदम उठा सकती है।
- उद्योग जगत लंबे समय से जटिल कर प्रावधानों में सुधार की मांग कर रहा है। बजट से उम्मीद है कि सरकार TDS प्रावधानों को सरल करने, कर से जुड़े मुकदमों को कम करने और कस्टम्स एडवांस रूलिंग की अवधि बढ़ाने जैसे उपायों की घोषणा करे। इससे व्यापार वातावरण में स्थिरता आएगी और उद्योगों के लिए अनुपालन आसान होगा।
- विशेषज्ञों के अनुसार यह उम्मीद है कि सरकार निजी निवेश बढ़ाने के लिए एक्सीलरेटेड डिप्रिशिएशन जैसे प्रोत्साहन दोबारा लागू कर सकती है, विशेषकर विनिर्माण और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में। इससे उद्योगों को नई मशीनरी, स्वचालन और आधुनिक तकनीक अपनाने में सहायता मिल सकती है।
- सरकार उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं को और विस्तृत कर सकती है, खासकर AI, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष तकनीक और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में। ये प्रोत्साहन वैश्विक निवेश आकर्षित कर भारत को उन्नत विनिर्माण का केंद्र बना सकते हैं।
- बदलते तकनीकी परिदृश्य को देखते हुए बजट में कौशल विकास कार्यक्रमों का बड़ा विस्तार देखने को मिल सकता है। यह उम्मीद है कि नई योजनाएँ युवाओं को ग्रीन एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों के अनुरूप प्रशिक्षित करने पर केंद्रित होंगी।
आइए जानते हैं कि केंद्रीय बजट क्या होता है?
केंद्रीय बजट भारत सरकार का वार्षिक वित्तीय विवरण है जो बताता है कि किसी वित्तीय वर्ष में सार्वजनिक धन कैसे जुटाया जाएगा और कैसे खर्च किया जाएगा। इसमें 1 अप्रैल से शुरू होकर 31 मार्च को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए अपेक्षित राजस्व, प्रस्तावित व्यय और अनुमानित राजकोषीय संतुलन प्रस्तुत किया जाता है।
- स्वतंत्र भारत का पहला बजट 1947 में प्रस्तुत किया गया था और पहला पूर्ण बजट 1948 में पेश किया गया था। 2017 से, बजट हर साल 1 फरवरी को प्रस्तुत किया जाता है।
- भारत का संविधान केंद्रीय बजट तैयार करने और पारित करने के लिए एक स्पष्ट संरचना निर्धारित करता है। अनुच्छेद 112 में वार्षिक वित्तीय विवरण प्रस्तुत करने का प्रावधान किया गया है, जिसमें राष्ट्रपति को वार्षिक वित्तीय विवरण संसद के दोनों सदनों के समक्ष प्रस्तुत करवाना अनिवार्य है।
भारत में बजट निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया
- बजट तैयारी की शुरुआती रूपरेखा: भारत में केंद्रीय बजट की तैयारी की शुरुआत हर वर्ष लगभग सितंबर में होती है। इस चरण में वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की बजट प्रभाग सभी मंत्रालयों को विस्तृत निर्देशपत्र जारी करता है। इन निर्देशों में बताया जाता है कि प्रस्ताव कैसे तैयार किए जाएँ, अनुमान कैसे बनाए जाएँ और आगामी वित्त वर्ष की प्राथमिकताएँ क्या होंगी। मंत्रालय इन दिशानिर्देशों के आधार पर अपने नोट तैयार करते हैं।
- मंत्रालयों द्वारा अनुमान और विश्लेषण: प्रत्येक मंत्रालय अपने राजस्व और व्यय अनुमान अलग-अलग तैयार करता है। इसमें मौजूदा योजनाओं की प्रगति, नई योजनाओं की जरूरत, मानव संसाधन आवश्यकताएँ और वर्ष भर के संभावित परिणामों का मूल्यांकन शामिल होता है।
- वित्त मंत्रालय और NITI Aayog द्वारा समीक्षा: मंत्रालयों से प्राप्त प्रस्तावों का विस्तृत परीक्षण व्यय विभाग करता है। इसके बाद वित्त मंत्रालय यह सुनिश्चित करता है कि सभी प्रस्ताव राजकोषीय अनुशासन और राजकोषीय घाटे के लक्ष्यों के अनुरूप हों। इस दौरान NITI Aayog देश की दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं पर मार्गदर्शन देता है, जिससे नीतिगत संतुलन बनाए रखा जाता है।
- विशेष समितियों द्वारा क्षेत्रीय सुझाव: बजट प्रक्रिया में कई विशेष निकाय शामिल होते हैं, जैसे GST परिषद जो अप्रत्यक्ष कर संरचना में बदलाव सुझाती है, वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद जो वित्तीय जोखिमों की निगरानी करती है, और व्यय वित्त समिति (EFC) जो नई योजनाओं की उपयुक्तता का आकलन करती है। इसके अलावा, संसदीय स्थायी समितियाँ मंत्रालयों की मांगों और प्रदर्शन का विश्लेषण करती हैं।
- आर्थिक सर्वेक्षण की तैयारी: मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के नेतृत्व में आर्थिक सर्वेक्षण तैयार किया जाता है, जिसे बजट से एक या दो दिन पहले संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत किया जाता है। यह दस्तावेज पिछले वर्ष की आर्थिक स्थिति, प्रमुख चुनौतियाँ और नीति सुझावों का विस्तृत मूल्यांकन प्रस्तुत करता है।
- गोपनीयता और अंतिम तैयारी: सभी अनुमानों को अंतिम रूप देने के बाद दस्तावेजों को अत्यधिक गोपनीय रखा जाता है। पहले, बजट प्रिंटिंग के लिए अधिकारियों को एक सुरक्षित परिसर, बजट प्रेस, में अलग-थलग रखा जाता था। इन दस्तावेजों को बजट भाषण के लिए वित्त मंत्री द्वारा व्यवस्थित किया जाता है।
- संसद में बजट की संसदीय प्रक्रिया: बजट पेश किए जाने के बाद संसद में इसकी विस्तृत जांच होती है।
- सामान्य चर्चा में सदस्य व्यापक प्राथमिकताओं पर विचार रखते हैं।
- स्थायी समितियाँ विभिन्न मंत्रालयों की मांगों की जांच करती हैं।
- लोकसभा में मांगों पर मतदान होता है।
- अनुदान विनियोग विधेयक से समेकित निधि से धन निकासी की अनुमति मिलती है।
- वित्त विधेयक कर प्रावधानों को प्रभावी रूप देता है।
राज्यसभा इन मांगों पर चर्चा कर सकती है, परंतु संशोधन नहीं कर सकती। - यह पूरी प्रक्रिया 1 अप्रैल से पहले समाप्त होनी आवश्यक है, ताकि नए वित्त वर्ष की शुरुआत सुचारू रूप से हो सके।
केंद्रीय बजट से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- बजट शब्द फ्रेंच भाषा के शब्द ‘Bougette’ से आया हैं, जिसका अर्थ है छोटा चमड़े का थैला। पुराने समय में वित्त मंत्री ऐसे ही एक थैले में वित्तीय दस्तावेज लेकर संसद पहुँचा करते थे, इसलिए यह नाम प्रचलित हुआ।
- बजट प्रस्तुत करने के दिन की शुरुआत वित्त मंत्री की ओर से नॉर्थ ब्लॉक में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक छोटी बैठक से होती है। इस बैठक में वित्त सचिव, राजस्व सचिव, व्यय सचिव और आर्थिक मामलों के सचिव शामिल होते हैं। इसे बजट-पेशी की औपचारिक शुरुआत माना जाता है।
- बजट छपाई शुरू होने से पहले वित्त मंत्रालय में होने वाली हलवा रस्म एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपरा है। इस परम्परा में बड़े पात्र में हलवा बनाकर कर्मचारियों के बीच बाँटा जाता है। यह रस्म टीमवर्क और अंतिम चरण की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।
- वित्त मंत्री दो हिस्सों में बजट भाषण प्रस्तुत करते हैं। पहले हिस्से में देश की आर्थिक स्थिति, विकास रुझान और नीतिगत प्राथमिकताओं का विस्तृत आकलन दिया जाता है। दूसरे हिस्से में कर प्रस्ताव, राजस्व अनुमान, और व्यय विवरण प्रस्तुत किए जाते हैं। आमतौर पर यह भाषण 90 से 120 मिनट तक चलता है।
- 1947 से 2020 तक वित्त मंत्री बजट पेश करते समय एक चमड़े का ब्रीफकेस साथ रखते थे, जो ब्रिटिश परंपरा के रेड डिस्पैच बॉक्स से प्रेरित था। लेकिन 2021 में इस परंपरा को बदलते हुए वित्त मंत्री ने टैबलेट डिवाइस के माध्यम से बजट प्रस्तुत किया। यह बदलाव डिजिटल भारत की दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम माना गया।
- साल 1955 में वित्त मंत्री सी. डी. देशमुख ने पहली बार बजट दस्तावेज हिंदी में छपवाने की पहल की। इसका उद्देश्य बजट को आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाना था, जो एक ऐतिहासिक निर्णय साबित हुआ।
- लगभग 92 वर्षों तक भारत में रेलवे बजट अलग से पेश किया जाता था। 2017 में सरकार ने इसे केंद्रीय बजट में सम्मिलित कर दिया। इस निर्णय से परिवहन और राष्ट्रीय वित्तीय योजनाओं का बेहतर समन्वय संभव हुआ।
- इंदिरा गांधी देश की पहली महिला बनीं जिन्होंने 1970-71 में केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। वहीं निर्मला सीतारमण ने लगातार 9 बजट पेश कर इतिहास बनाया।
- भारत में सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड मोरारजी देसाई के नाम है। उन्होंने कुल 10 बजट प्रस्तुत किए, जो आज भी एक अद्वितीय उपलब्धि है।
- वित्त मंत्री यशवंतराव बी. चव्हाण द्वारा प्रस्तुत 1973-74 का बजट देश के इतिहास में ‘ब्लैक बजट’ के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इस वर्ष असाधारण रूप से उच्च वित्तीय घाटा दर्ज किया गया था।
