कनाडा और अमेरिका के रिश्तों में हाल के दिनों में एक नया और संवेदनशील विवाद उभरकर सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिकी अधिकारियों ने कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में सक्रिय अलगाववादी समूहों के नेताओं से मुलाकात की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब वैश्विक राजनीति पहले ही अस्थिरता के दौर से गुजर रही है और पश्चिमी लोकतंत्रों में आंतरिक असंतोष बढ़ रहा है।
कनाडा के लिए यह मुद्दा केवल एक प्रांत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की संप्रभुता, संघीय ढांचे और राष्ट्रीय एकता से जुड़ा हुआ गंभीर विषय है। वहीं अमेरिका के लिए यह आरोप उसकी विदेश नीति और पड़ोसी देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप को लेकर सवाल खड़े करता है।
अल्बर्टा अलगाव आंदोलन की पृष्ठभूमि
अल्बर्टा कनाडा का एक संसाधन-समृद्ध प्रांत है, जिसे देश की “ऊर्जा राजधानी” भी कहा जाता है। कनाडा के कुल कच्चे तेल उत्पादन का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है। लंबे समय से अल्बर्टा में यह भावना मौजूद रही है कि संघीय सरकार उसकी आर्थिक योगदान के अनुपात में उसे पर्याप्त राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता नहीं देती।
अलगाववादी समूहों का तर्क है कि संघीय सरकार की जलवायु नीतियाँ, कार्बन टैक्स और पर्यावरणीय नियम अल्बर्टा के तेल और गैस उद्योग को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इसके अलावा, यह भी आरोप लगाया जाता है कि अल्बर्टा से वसूले गए टैक्स का बड़ा हिस्सा दूसरे प्रांतों के विकास में खर्च किया जाता है, जबकि अल्बर्टा को अपेक्षाकृत कम लाभ मिलता है।
राजनीतिक रूप से भी अल्बर्टा की पहचान कनाडा के अन्य हिस्सों से अलग मानी जाती है। यहाँ की आबादी अपेक्षाकृत अधिक रूढ़िवादी विचारों वाली है, जबकि पूर्वी और मध्य कनाडा में उदारवादी राजनीति का प्रभाव अधिक है। यही वैचारिक टकराव समय-समय पर अलगाव की मांग को हवा देता रहा है।
अमेरिकी भूमिका और कनाडा की प्रतिक्रिया
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारियों ने पिछले कुछ महीनों में अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं से कई बार बातचीत की। इसी दौरान अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट नामक संगठन के नेताओं ने अमेरिका से आर्थिक सहायता की मांग भी रखी।
इस घटनाक्रम पर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति से सीधे बात कर कनाडा की संप्रभुता के सम्मान की मांग की और स्पष्ट किया कि अल्बर्टा का भविष्य तय करना केवल कनाडाई नागरिकों का अधिकार है। कनाडा सरकार का रुख साफ है कि किसी भी बाहरी शक्ति का आंतरिक मामलों में दखल अस्वीकार्य है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका के भीतर भी “अमेरिका फर्स्ट” जैसी नीतियों और आक्रामक कूटनीति की चर्चा तेज है। डोनाल्ड ट्रम्प पहले भी कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने जैसी टिप्पणियाँ कर चुके हैं, जिससे दोनों देशों के बीच अविश्वास की भावना गहरी हुई है।
क्या अल्बर्टा वास्तव में अलग हो सकता है?
कानूनी और राजनीतिक दृष्टि से अल्बर्टा का कनाडा से अलग होना बेहद कठिन प्रक्रिया है। कनाडा के संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, कोई भी प्रांत एकतरफा तरीके से देश से अलग नहीं हो सकता। इसके लिए स्पष्ट प्रश्न पर जनमत संग्रह, स्पष्ट बहुमत और संघीय सरकार के साथ लंबी बातचीत आवश्यक होती है।
इतिहास बताता है कि क्यूबेक ने दो बार जनमत संग्रह कराया था, लेकिन दोनों ही बार अलगाव का प्रस्ताव असफल रहा। इसके बाद कनाडा सरकार ने क्लैरिटी एक्ट लागू किया, जिसने अलगाव की प्रक्रिया को और सख्त कानूनी दायरे में बाँध दिया।
वर्तमान सर्वेक्षणों से भी यह संकेत मिलता है कि अल्बर्टा की स्वतंत्रता का समर्थन अभी अल्पसंख्यक लोगों तक ही सीमित है। कई लोग जनमत संग्रह की मांग को सरकार पर दबाव बनाने का एक राजनीतिक हथकंडा मानते हैं, न कि वास्तविक अलगाव की तैयारी।
व्यापक अंतरराष्ट्रीय और राजनीतिक निहितार्थ
अल्बर्टा विवाद केवल कनाडा-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों में अलगाव की भावना वैश्विक राजनीति में अस्थिरता पैदा कर सकती है।
यदि किसी विकसित और स्थिर लोकतंत्र जैसे कनाडा में अलगाव की आवाज़ें तेज होती हैं, तो यह दुनिया के अन्य संघीय देशों के लिए भी एक चेतावनी हो सकती है। इसके साथ ही, किसी बाहरी शक्ति द्वारा अलगाववादी समूहों से संपर्क करने के आरोप अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
निष्कर्ष:
अल्बर्टा अलगाव विवाद कनाडा के लिए एक राजनीतिक और संवैधानिक चुनौती है, जबकि अमेरिका के लिए यह उसकी कूटनीतिक छवि से जुड़ा मामला बन गया है। फिलहाल अलगाव की संभावना कम दिखती है, लेकिन यह मुद्दा यह स्पष्ट करता है कि संघीय ढांचे में क्षेत्रीय असंतोष को समय रहते संवाद और संतुलित नीतियों के माध्यम से संबोधित करना कितना आवश्यक है।
कनाडा की मजबूती उसकी संघीय व्यवस्था, लोकतांत्रिक संस्थाओं और कानून के शासन में निहित है। वहीं, अमेरिका-कनाडा संबंधों की स्थिरता के लिए यह जरूरी है कि दोनों देश एक-दूसरे की संप्रभुता और आंतरिक मामलों का सम्मान करें।
परीक्षा-उपयोगी प्रश्न
प्रीलिम्स प्रश्न
कनाडा में किसी प्रांत के अलगाव से संबंधित निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(a) कोई भी प्रांत एकतरफा तरीके से कनाडा से अलग हो सकता है
(b) अलगाव के लिए केवल प्रांतीय विधानसभा की मंजूरी पर्याप्त है
(c) स्पष्ट जनमत, स्पष्ट प्रश्न और संघीय सरकार से बातचीत आवश्यक है
(d) अलगाव का निर्णय केवल सुप्रीम कोर्ट लेता है
मेन्स प्रश्न
“अल्बर्टा में अलगाव की मांग कनाडा की संघीय व्यवस्था के सामने नई चुनौतियाँ प्रस्तुत करती है।”
इस कथन के आलोक में अल्बर्टा अलगाव आंदोलन के कारणों, कानूनी बाधाओं और कनाडा-अमेरिका संबंधों पर इसके प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
