हाल ही में, अमेरिकी दूतावास ने एफ-1 वीज़ा धारकों या इसके लिए आवेदन करने वाले छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। अमेरिका ने छात्र वीज़ा धारकों को याद दिलाया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं। संघीय या राज्य कानूनों का उल्लंघन करने पर वीज़ा रद्द किया जा सकता है और स्थायी यात्रा प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
अमेरिका की नई वीज़ा प्रवर्तन प्रणाली: 2026 के लिए कड़े नियम
- सोशल मीडिया पारदर्शिता की अनिवार्यता: अमेरिका ने जून 2025 से सभी F-1, M-1 और J-1 वीज़ा आवेदकों के लिए सोशल मीडिया जानकारी साझा करना अनिवार्य कर दिया है। अब उम्मीदवारों को पिछले पाँच वर्षों में उपयोग किए गए हर सोशल मीडिया अकाउंट को DS-160 फ़ॉर्म में दर्ज करना होता है और जाँच प्रक्रिया के लिए अकाउंट को सार्वजनिक रखना पड़ता है। यदि कोई आवेदक किसी अकाउंट को छिपाता है या जानकारी अधूरी देता है, तो इससे वीज़ा अस्वीकृति या भविष्य में किसी भी अमेरिकी वीज़ा श्रेणी के लिए अयोग्यता तक हो सकती है।
- बायोमेट्रिक एंट्री-एग्ज़िट जाँच का विस्तार: 26 दिसंबर 2025 से अमेरिका ने सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं पर गैर-अमेरिकी नागरिकों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक सत्यापन लागू कर दिया। इसमें हवाई अड्डों, भूमि सीमाओं और समुद्री बंदरगाहों पर फिंगरप्रिंट और फेशियल रिकग्निशन शामिल हैं। इन सख़्त उपायों का उद्देश्य CBP को छात्र वीज़ाधारकों को अधिक सटीक रूप से ट्रैक करना और उनके अधिकृत प्रवास अवधि के पालन को सुनिश्चित करना है।
- SEVIS स्थिति बनाए रखने की सख्ती: SEVIS प्रणाली के तहत हर छात्र को अपनी शैक्षणिक स्थिति सक्रिय रखना आवश्यक है। इसमें पूर्णकालिक नामांकन, कार्यक्रम में किसी भी परिवर्तन की रिपोर्टिंग और अध्ययन में रुकावट की स्थिति में स्कूल को समय पर सूचित करना होता है। संस्थान नियमित रूप से छात्र की स्थिति की जानकारी अमेरिकी अधिकारियों को भेजते हैं। इन प्रावधानों का पालन न करने पर SEVIS टर्मिनेशन हो सकता है, जिससे आगे वीज़ा संबंधी कठिनाइयाँ बढ़ सकती हैं।
- वीज़ा इंटीग्रिटी शुल्क का नया प्रावधान: अमेरिकी कांग्रेस ने जुलाई 2025 में एक नया Visa Integrity Fee लागू करने को मंजूरी दी, जो 2026 से अधिकांश गैर-आप्रवासी वीज़ा श्रेणियों, विशेषकर छात्र वीज़ा पर लागू होगा। यह शुल्क 250 अमेरिकी डॉलर है, जो मौजूदा वीज़ा आवेदन शुल्क और SEVIS शुल्क के अतिरिक्त देना होगा। यह एक तरह का सुरक्षा जमा है, और यदि कोई आवेदक वीज़ा शर्तों का पालन नहीं करता, तो यह राशि वापस नहीं की जाएगी।
- ड्रॉपबॉक्स नवीनीकरण सुविधा का समाप्त होना: सितंबर 2025 से कई छात्र वीज़ा आवेदक अब ड्रॉपबॉक्स इंटरव्यू वेवर का लाभ नहीं ले पाते, जिसके तहत पहले पात्र उम्मीदवार बिना साक्षात्कार के वीज़ा नवीनीकरण करा सकते थे। अब अधिकांश छात्रों को अमेरिकी दूतावास या कांसुलेट में व्यक्तिगत इंटरव्यू में उपस्थित होना अनिवार्य है।
F-1 स्टूडेंट वीज़ा क्या हैं?
- F-1 स्टूडेंट वीज़ा अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था में प्रवेश का वह आधिकारिक दस्तावेज है, जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों को पूर्णकालिक अकादमिक पढ़ाई करने की अनुमति देता है। यह वीज़ा केवल उन विदेशी विद्यार्थियों को दिया जाता है, जो अमेरिका में डिग्री, सर्टिफिकेट या रिसर्च आधारित प्रोग्राम में नामांकित होते हैं।
- F-1 वीज़ा प्रक्रिया की शुरुआत तभी होती है जब छात्र को किसी SEVP-प्रमाणित संस्थान से औपचारिक प्रवेश मिलता है। अमेरिका सरकार केवल उन्हीं संस्थानों को अनुमति देती है जो विदेशी छात्रों की निगरानी और रिपोर्टिंग की क्षमता रखते हैं।
- प्रवेश प्राप्त करने के बाद संस्थान छात्र को Form I-20 जारी करता है, जो उसके कार्यक्रम, अवधि, वित्तीय समर्थता और SEVIS रिकॉर्ड का आधिकारिक प्रमाण है। यह दस्तावेज वीज़ा इंटरव्यू से लेकर अमेरिका में प्रवेश तक हर चरण में दिखाना अनिवार्य होता है।
- वीज़ा आवेदन से पहले छात्र को SEVIS I-901 शुल्क (USD 350) जमा करना जरूरी होता है। यह शुल्क छात्र की जानकारी को सरकारी SEVIS डेटाबेस में सक्रिय करता है, जिसके आधार पर उसकी पूरी शैक्षणिक यात्रा की निगरानी की जाती है।
- F-1 श्रेणी में आवेदन करते समय छात्रों को यह दिखाना पड़ता है कि उनका इरादा अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का नहीं है। इस आवश्यकता को “Non-Immigrant Intent” कहा जाता है और यह वीज़ा स्वीकृति का महत्वपूर्ण आधार है।
- एक बार अमेरिका पहुंचने के बाद F-1 स्थिति बनाए रखने के लिए छात्र को हमेशा पूर्णकालिक कोर्सलोड पूरा करना आवश्यक है। केवल सीमित परिस्थितियों में ही कोर्सलोड कम करने की अनुमति मिलती है और वह भी विश्वविद्यालय के DSO की मंजूरी के बाद।
- F-1 वीज़ा छात्रों को अपने शैक्षणिक सत्र के दौरान 20 घंटे प्रति सप्ताह तक कैंपस में काम करने की अनुमति देता है। यह अनुमति अलग से USCIS से नहीं लेनी होती।
- अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र Optional Practical Training (OPT) के लिए आवेदन कर सकते हैं, जो उन्हें अपने अध्ययन क्षेत्र में 12 महीने तक काम करने की अनुमति देता है। STEM क्षेत्रों के लिए यह अवधि अतिरिक्त 24 महीने बढ़ाई जा सकती है।
2026 में अमेरिकी कानून तोड़ने पर स्टूडेंट वीज़ा धारकों के लिए कड़े परिणाम
- वीज़ा तुरंत रद्द होने का जोखिम: अमेरिका में किसी भी छात्र द्वारा कानून का उल्लंघन करने पर उसका स्टूडेंट वीज़ा तुरंत रद्द किया जा सकता है। यह कार्रवाई उस समय भी की जा सकती है जब वीज़ा पहले से जारी हो चुका हो और छात्र देश में प्रवेश कर चुका हो। अमेरिकी दूतावास स्पष्ट रूप से मानता है कि वीज़ा एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं, इसलिए किसी भी प्रकार के कानूनी उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई की जाती है।
- देश से निष्कासन की संभावना: यदि किसी छात्र का वीज़ा कानूनी उल्लंघन के कारण रद्द हो जाता है, तो उसके डिपोर्टेशन की संभावना बहुत अधिक होती है। ऐसे मामलों में छात्र को निर्धारित समय के भीतर देश छोड़ना पड़ता है। डिपोर्टेशन न केवल शिक्षा को बाधित करता है, बल्कि आगे की शैक्षणिक और करियर योजनाओं को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
- भविष्य में वीज़ा न मिलने की स्थिति: वीज़ा रद्द होने या डिपोर्टेशन के बाद छात्र भविष्य में किसी भी अमेरिकी वीज़ा श्रेणी के लिए अयोग्य हो सकता है। उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर यह अयोग्यता कुछ वर्षों के लिए भी हो सकती है और कई मामलों में स्थायी प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।
- ओवरस्टे पर प्रवेश प्रतिबंध: यदि छात्र अपने अधिकृत प्रवास से अधिक समय अमेरिका में रहता है, तो उस पर कड़े री-एंट्री बैन लागू होते हैं। 180 दिनों से अधिक अवैध उपस्थिति पर 3 साल का प्रतिबंध, और एक वर्ष से अधिक पर 10 साल का प्रतिबंध लागू हो जाता है। यह नियम 2026 में भी कठोरता से लागू किया जा रहा है।
- अपराध करने पर दंडात्मक प्रभाव: अमेरिका में छोटे अपराध भी गंभीर परिणाम ला सकते हैं। DUI, लाइसेंस के बिना ड्राइविंग, या चोरी जैसे अपराधों के कारण 2025 में कई अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीज़ा रद्द किए गए। ऐसे अपराध भविष्य में इमिग्रेशन लाभ, नौकरी आवेदन और सुरक्षा जांच पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
- राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के खतरे: अमेरिकी नीतियों के अनुसार विदेशी छात्रों द्वारा राजनीतिक रैलियों, प्रदर्शनों या सक्रिय गतिविधियों में भाग लेने पर भी जोखिम बन सकता है। यदि किसी गतिविधि को राष्ट्रीय हित के खिलाफ माना जाए, तो छात्र का वीज़ा संदेह के आधार पर भी प्रभावित हो सकता है।
भारतीय छात्रों के लिए नए अमेरिकी वीज़ा नियमों के प्रभाव
- 1 जनवरी 2026 से लागू हुए Visa Integrity Fee ने भारतीय आवेदकों के लिए कुल वीज़ा लागत को काफी बढ़ा दिया है। अब प्रत्येक छात्र को मानक MRV शुल्क और SEVIS I-901 शुल्क के साथ अतिरिक्त 250 डॉलर (लगभग ₹21,400) का भुगतान करना आवश्यक है। इससे कुल आवेदन खर्च लगभग ₹40,500 के आसपास पहुँच जाता है। इस बदलाव ने वीज़ा प्रक्रिया को शुरुआत में ही उच्च प्रशासनिक निवेश की आवश्यकता बढ़ा दी है।
- नए नियम पारंपरिक Duration of Status (D/S) व्यवस्था से हटकर छात्रों पर अधिक सख्त समय सीमा लागू करते हैं। अब अधिकांश स्टूडेंट वीज़ा अधिकतम चार वर्ष तक ही मान्य रहते हैं, जिसमें संभावित OPT अवधि भी शामिल है। जिन छात्रों के कार्यक्रम अधिक लंबे हैं या जो कई डिग्रियाँ लेना चाहते हैं, उन्हें अब अपनी अवधि पूरी होने से पहले अमेरिका छोड़कर पुनः कांसुलर वीज़ा स्टैम्पिंग करवानी होगी। यह प्रावधान छात्रों के लिए यात्रा खर्च, समय प्रबंधन और पढ़ाई में अवरोध जैसी नई चुनौतियाँ पैदा करता है।
- सितंबर 2025 के बाद अमेरिका ने भारतीय पासपोर्टधारकों के लिए थर्ड-कंट्री वीज़ा प्रोसेसिंग को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। अब भारतीय छात्र थाईलैंड, जर्मनी, UAE जैसे देशों में जाकर तेज़ अपॉइंटमेंट नहीं ले सकते। सभी वीज़ा इंटरव्यू और नवीकरण केवल भारत या आवेदक के कानूनी निवास वाले देश में ही किए जा सकते हैं। इससे इंटरव्यू स्लॉट की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है और कई छात्रों को पहले की तुलना में अधिक प्रतीक्षा समय का सामना करना पड़ रहा है।
