मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष अब तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है। हालात तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई जारी है, दूसरी तरफ ईरान लगातार जवाबी हमले कर रहा है। इस बीच यूरोप के कुछ देश खुलकर सामने आ रहे हैं, तो कुछ दूरी बनाए हुए हैं।
स्पेन ने अमेरिका को सैन्य अड्डे देने से किया इनकार
संघर्ष के बीच एक अहम घटनाक्रम सामने आया जब Spain ने साफ शब्दों में कहा कि वह इस ऑपरेशन के लिए अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल नहीं होने देगा। स्पेन के विदेश मंत्री José Manuel Albares ने बयान दिया कि स्पेनिश बेस किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए उपलब्ध नहीं हैं और न ही होंगे।
इस फैसले के तुरंत बाद दक्षिणी स्पेन में स्थित रोटा और मोरॉन एयरबेस से करीब 15 अमेरिकी विमान रवाना हो गए। यह संकेत था कि यूरोप के भीतर भी इस युद्ध को लेकर एकमत राय नहीं है।
स्पेन का यह रुख अमेरिका के लिए रणनीतिक तौर पर झटका माना जा रहा है, क्योंकि यूरोपीय ठिकाने मिडिल ईस्ट ऑपरेशन के लिए अहम सपोर्ट पॉइंट होते हैं।
ब्रिटेन को लेकर ट्रम्प की नाराजगी
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने पुराने सहयोगी United Kingdom पर नाराजगी जताई। मामला हिंद महासागर में स्थित ब्रिटेन के सैन्य अड्डे Diego Garcia से जुड़ा है।
अमेरिका चाहता था कि जंग के पहले दिन ही इस बेस से ईरान पर हमला किया जाए। लेकिन ब्रिटेन ने तुरंत अनुमति नहीं दी। लगभग 48 घंटे बाद अनुमति दी गई, वह भी सीमित शर्तों के साथ। अमेरिका को यहां से केवल ईरान के मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने की इजाजत मिली।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री Keir Starmer के इस फैसले से ट्रम्प असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि सहयोगी देशों को ऐसे समय में पूरी मदद करनी चाहिए।

ईरान का चार देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमला
तीसरे दिन ईरान ने बड़ा जवाबी कदम उठाया। ईरान ने मिडिल ईस्ट के चार देशों में स्थित छह अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया।
Kuwait में कुछ अमेरिकी फाइटर जेट हादसे का शिकार हुए। रिपोर्ट के अनुसार, जेट हवा में नियंत्रण खो बैठे और फिर जमीन से टकरा गए। हालांकि इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई।
इसके अलावा कुवैत ने गलती से तीन अमेरिकी फाइटर जेट्स को दुश्मन का विमान समझकर निशाना बनाया। सभी पायलट सुरक्षित बताए गए हैं।
ईरान का साफ इनकार – बातचीत नहीं होगी
ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी Ali Larijani ने स्पष्ट कर दिया कि ईरान अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि यह खबरें गलत हैं कि ईरान बातचीत की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने ट्रम्प पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके फैसलों ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर किया है और अब अमेरिकी सैनिकों की मौत पर चिंता जताई जा रही है।
अब तक का नुकसान – मौतें और तबाही
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के 1000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए हैं। शुरुआती 30 घंटों में 2000 से ज्यादा बम गिराए गए।
अब तक 555 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 700 से ज्यादा घायल हुए हैं।
28 फरवरी को शुरू हुए हमलों के पहले दिन ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई थी। इसके बाद स्थिति और गंभीर हो गई।
रविवार को तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। बाद में चौथे सैनिक की भी मौत हो गई।
इस्फहान के परमाणु ठिकाने के पास धमाके
ईरान के शहर Isfahan में स्थित परमाणु ठिकाने और एयरबेस के आसपास तेज धमाके सुने गए। हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि इन धमाकों का सीधा कारण क्या था, लेकिन आशंका है कि यह हमलों से जुड़ा मामला है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री का बयान
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा कि ईरान में चल रहे सैन्य अभियान की कोई तय समय सीमा नहीं है। यह दो हफ्ते, चार हफ्ते या छह हफ्ते भी चल सकता है। अंतिम फैसला राष्ट्रपति के हाथ में है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि फिलहाल ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिक तैनात नहीं हैं, लेकिन भविष्य में इस संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
ईरान के अंदर नेतृत्व संकट
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद देश में नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनकी पत्नी मंसूरेह खोझस्तेह बघेरजादेह, जिन्होंने 1964 में उनसे विवाह किया था, भी हालिया हमलों में लगी चोटों के कारण चल बसीं।
अब चर्चा है कि उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया जा सकता है। ईरान की एक्सपर्ट असेंबली जल्द फैसला ले सकती है।
साइप्रस में ब्रिटिश बेस पर ड्रोन हमला
ईरान ने साइप्रस में स्थित ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स (RAF) के अक्रोटिरी बेस को निशाना बनाया। साइप्रस में मौजूद यह बेस लंबे समय से पश्चिमी देशों की सैन्य गतिविधियों का अहम केंद्र रहा है।
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि देर रात हुए ड्रोन हमले में बेस को मामूली नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।
यह हमला ऐसे समय हुआ जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ईरानी मिसाइल साइट्स को निशाना बनाने के लिए अमेरिका को सीमित अनुमति दी थी। इसके बाद यह सवाल उठने लगे कि क्या ब्रिटेन अब सीधे तौर पर इस जंग में खिंचता जा रहा है।
कतर के ऊर्जा ठिकानों पर वार
Qatar के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दो ड्रोन देश की ऊर्जा सुविधाओं पर गिरे। एक ड्रोन मेसाईद स्थित बिजली संयंत्र के पानी के टैंक से टकराया, जबकि दूसरा रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में ऊर्जा ठिकाने के पास गिरा।
कतर ने कहा कि किसी की जान नहीं गई है, लेकिन नुकसान का आकलन किया जा रहा है। ऊर्जा ठिकानों पर हमले से वैश्विक गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि कतर दुनिया के बड़े गैस निर्यातकों में से एक है।
ओमान की खाड़ी में तेल टैंकर पर हमला
Gulf of Oman में एक तेल टैंकर पर बम से लैस ड्रोन बोट से हमला हुआ। मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले टैंकर MKD VYOM को मस्कट तट के पास निशाना बनाया गया।
इस हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। यह घटना बताती है कि समुद्री व्यापार भी अब खतरे में है। खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
सऊदी की रिफाइनरी में आग
रिपोर्ट्स के मुताबिक Saudi Aramco की एक रिफाइनरी में ड्रोन हमले के बाद आग लग गई। कंपनी ने कहा कि हालात पर काबू पा लिया गया है और एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक है। इसका मुख्यालय धहरान में है और यह वैश्विक ऊर्जा बाजार की बड़ी आपूर्तिकर्ता है। ऐसे हमलों से तेल सप्लाई और कीमतों पर सीधा असर पड़ता है।
तेल और शेयर बाजार में उथल-पुथल
संघर्ष के असर से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड की कीमत एशियाई बाजार में करीब 13% तक बढ़ी, बाद में थोड़ी गिरावट के बाद भी लगभग 5% ऊपर रही।
एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशक अनिश्चितता के माहौल में सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ रहे हैं। अमेरिका में भी स्टॉक फ्यूचर्स में गिरावट देखी गई।
यह स्थिति कोविड-19 के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक झटका मानी जा रही है।
3000 से ज्यादा उड़ानें रद्द
मिडिल ईस्ट के ऊपर से उड़ानें बंद होने का असर दुनिया भर की हवाई यात्रा पर पड़ा है। शनिवार और रविवार को मिलाकर करीब 3000 से ज्यादा उड़ानें रद्द की गईं।
Emirates, Etihad Airways और Qatar Airways जैसी प्रमुख एयरलाइनों ने कई रूट अस्थायी रूप से रोक दिए हैं।
Dubai International Airport, जो दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स में गिना जाता है, लगातार तीसरे दिन प्रभावित रहा। लाखों यात्री अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं।
पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन
ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद Pakistan के कई शहरों में प्रदर्शन हुए। कराची, स्कर्दू और इस्लामाबाद में हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें 23 लोगों की मौत हो गई।
सुरक्षा बलों ने आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
जर्मनी और फ्रांस की प्रतिक्रिया
Germany ने कहा है कि वह स्थिति पर गंभीरता से विचार कर रहा है और जरूरत पड़ी तो जवाबी कार्रवाई में शामिल हो सकता है।
वहीं France के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा कि ऐसे हमलों पर पहले अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा होनी चाहिए थी। उनका कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जैसे मंचों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
लेबनान की चिंता
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इजराइल और हिज्बुल्लाह दोनों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि लेबनान को ऐसे युद्ध में नहीं घसीटा जाना चाहिए जिसका उससे सीधा संबंध नहीं है।
इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान और बेरूत के कुछ इलाकों में लोगों को घर खाली करने का आदेश दिया है। रमजान के महीने में हजारों लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए।
भारत की चिंता और कूटनीतिक पहल
मिडिल ईस्ट में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री से फोन पर बात की और क्षेत्रीय हालात पर चिंता जताई।
भारत ने आम नागरिकों की सुरक्षा और जल्द से जल्द हिंसा रोकने की अपील दोहराई है।
ईरान में नया सुप्रीम लीडर कौन?
ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद देश में सत्ता के शीर्ष पद को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक-दो दिनों के भीतर नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
सबसे ज्यादा चर्चा उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को लेकर है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से उन्हें संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
ईरान की एक्सपर्ट असेंबली, जो सुप्रीम लीडर का चयन करती है, जल्द औपचारिक ऐलान कर सकती है। अगर मुजतबा को जिम्मेदारी मिलती है, तो यह ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा।
अमेरिकी संसद में उठे सवाल
समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सांसदों को दी गई एक गोपनीय ब्रीफिंग में पेंटागन अधिकारियों ने माना कि ऐसी कोई ठोस खुफिया जानकारी नहीं थी जिससे यह संकेत मिले कि ईरान अमेरिका पर तत्काल हमला करने वाला था।
हालांकि अधिकारियों ने यह भी कहा कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें और उसके सहयोगी समूह अमेरिकी हितों के लिए खतरा बने हुए थे।
यह खुलासा ट्रम्प प्रशासन के उस दावे पर सवाल खड़ा करता है जिसमें कहा गया था कि ईरान से तात्कालिक खतरा था।
ट्रम्प का बयान – जंग कितने दिन चलेगी?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान के साथ चल रही लड़ाई चार से पांच हफ्ते तक चल सकती है। पहले उन्होंने इसे चार हफ्तों तक सीमित बताया था, लेकिन अब समयसीमा बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ऑपरेशन के शुरुआती दो दिनों में ईरान की मौजूदा लीडरशिप से जुड़े कई अहम लोगों को निशाना बनाया गया।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय कानून का सवाल
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने United Nations के महासचिव को पत्र लिखकर अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई को “आतंकी हमला” बताया है।
उन्होंने कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इससे वैश्विक शांति को खतरा है। ईरान ने मांग की है कि जिम्मेदार देशों पर कार्रवाई हो।
दूसरी ओर फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने कहा है कि ऐसे मामलों में पहले अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा होनी चाहिए थी।
मिडिल ईस्ट के देशों का संयुक्त बयान
अमेरिका ने बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया।
इस बयान में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की गई और कहा गया कि इन हमलों ने नागरिकों और बुनियादी ढांचे को खतरे में डाला है।
इन देशों ने कहा कि वे अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए एकजुट हैं।
लेबनान में बढ़ता तनाव
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा है कि उनका देश किसी बड़े युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहता। उन्होंने हिज्बुल्लाह और इजराइल दोनों से संयम बरतने की अपील की।
इजराइल की ओर से दक्षिणी लेबनान और बेरूत के कुछ इलाकों को खाली कराने के आदेश के बाद हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए।
वैश्विक असर – अर्थव्यवस्था और आम लोग
इस जंग का असर केवल सरकारों तक सीमित नहीं है।
- तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
- शेयर बाजारों में गिरावट
- हजारों उड़ानों का रद्द होना
- समुद्री व्यापार में खतरा
इन सबने दुनिया भर के आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री से फोन पर बातचीत कर हालात पर चिंता जताई। भारत ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए और हिंसा जल्द रोकी जानी चाहिए।
मिडिल ईस्ट में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं, इसलिए भारत स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है।
आगे क्या?
अब सबसे अहम सवाल यही है:
- क्या अमेरिका जमीनी सेना उतारेगा?
- क्या ईरान नेतृत्व बदलने के बाद और सख्त रुख अपनाएगा?
- क्या यूरोप खुलकर किसी एक पक्ष के साथ आएगा?
- और क्या यह संघर्ष सीमित रहेगा या पूरे क्षेत्र को लंबे युद्ध में धकेल देगा?
तीन दिनों में जिस तेजी से हालात बदले हैं, उसने दुनिया को चौंका दिया है। मिसाइल, ड्रोन, आर्थिक दबाव और राजनीतिक बयान – सब मिलकर एक ऐसा माहौल बना रहे हैं जिसमें जरा सी चूक भी बड़े युद्ध का कारण बन सकती है।
अब निगाहें कूटनीति पर हैं। अगर बातचीत का रास्ता नहीं खुला, तो यह टकराव और लंबा खिंच सकता है।

